मौजूदा वित्त वर्ष में आठ प्रतिशत रहेगी ऋण वृद्धि : एसोचैम

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 12/29/2017 - 13:44

New Delhi : अर्थव्यवस्था में नरमी तथा बैंकिंग क्षेत्र में संकटग्रस्त संपत्तियों के अत्यधिक दबाव के चलते मौजूदा वित्त वर्ष में ऋण वृद्धि करीब आठ प्रतिशत रह सकती है. उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने यह अनुमान व्यक्त किया है. हालांकि, यह मार्च 2017 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में इसके 5.1 प्रतिशत के आंकड़े से अधिक है. पिछले वित्त वर्ष में यह दर पांच दशक के निचले स्तर पर थी.

पूंजी आधार मजबूत होने से बैंक उद्योगों और विशेषतौर से एमएसएमई को दे सकेंगे अधिक कर्ज

एसोचैम ने जारी बयान में कहा कि इस साल ऋण में वृद्धि की मुख्यतौर पर खुदरा क्षेत्र तथा कृषि क्षेत्र का बेहतर योगदार रहा है. मौजूदा वित्त वर्ष के उत्तरार्द्ध में यदि तेजी आयी तो आधारभूत संरचना से जुड़े कुछ क्षेत्र भी ऋण वृद्धि में योगदान दे सकते हैं. सरकार द्वारा बैंकों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उपक्रमों को अधिक ऋण प्रदान करने के लिए कहे जाने से रिण वृद्धि में इनका भी योगदान संभव है. सरकार ने बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये की नई पूंजी डालने का जो कार्यक्रम बनाया है उसका एक मकसद बैंकों की कर्ज देने की क्षमता को बढ़ाना भी है. पूंजी आधार मजबूत होने से बैंक उद्योगों और विशेषतौर से एमएसएमई को अधिक कर्ज दे सकेंगे. बैंकों की फंसी कर्ज राशि (एनपीए) अधिक होने की वजह से वह ज्यादा कर्ज नहीं दे पा रहे हैं.

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बैंक अब काफी सोच विचार कर दे रही है कर्ज

उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) मार्च 2015 के 2.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर जून 2017 में 7.33 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यही वजह है कि बैंक अब कर्ज देने में काफी सोच विचार कर रहे हैं और उद्योगों को आसानी से कर्ज नहीं मिल पा रहा है. बेहतर रेटिंग वाली कंपनियां बाजार से पूंजी जुटा रही हैं. बॉंड बाजार में भी उन्हें सस्ता पैसा मिल रहा है.

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