हाल-ए-रिम्स : कैदियों को मिलता है बेड, सुरक्षाकर्मी सोते हैं जमीन पर

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 01/18/2018 - 16:57

Saurav Shukla, Ranchi : झारखंड का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रिम्स, जहां आम और खास लोग अपनी बीमारी का इलाज करवाने आते हैं. इस अस्पताल में राज्य ही नहीं, राज्य के बाहर के कैदी भी अपना बेहतर इलाज के लिए हैं. कैदियों को भी यहां बेड और अन्य जरूरी सुविधाएं दी जाती है, लेकिन जिन सुरक्षाकर्मियों की हिरासत में ये कैदी लाये जाते हैं, उनके सोने के लिए एक अदद बेड भी उपलब्ध नहीं करायी जाती है. ऐसे में ये सुरक्षाकर्मी कड़कड़ाती ठंड में भी फर्श पर रोकर रात गुजारते हैं.

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एक कैदी के साथ रहते हैं दो सुरक्षाकर्मी

कैदी वार्ड में एक कैदी के साथ दो पुलिसकर्मी को सुरक्षा के दृष्टिकोण से तैनात किया जाता है. इनकी सुरक्षा के साथ-साथ जांच से लेकर अन्य सभी काम तैनात सुरक्षाकर्मी को ही करना पड़ता है. इस वार्ड में पुलिस कर्मियों की ड्यूटी करने की समय सीमा निर्धारित नहीं है. सुरक्षाकर्मी हर समय चौकन्ना रहते हुए कैदी मरीज के बेहतर इलाज के प्रयास में लगे रहते हैं. वर्तमान समय में इस वार्ड में 21 कैदी इलाजरत हैं, जिनकी सुरक्षा में 42 पुलिसकर्मी हरवक्त तैनात रहते हैं. वहीं कैदी वार्ड की सुरक्षा में आठ पुलिस के जवान की तैनाती भी की गयी है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर उन्हें एक बेड तक नहीं मिलता है.

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स्वास्थ्य मंत्री को लिखित आवेदन देने के बाद भी नहीं मिला बेड: रंजू कुमारी

कैदी वार्ड की इंचार्ज रंजू कुमारी ने कहा कि बेड की कमी से स्वास्थ्य मंत्री को भी कुछ माह पूर्व अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अब तक बेड उपलब्ध नहीं कराया गया है. वहीं वार्ड में लगे एक्वागार्ड भी खराब हैं, जिससे पीने की पानी की समस्या बनी रहती है. वहीं हर रोज शौचालय जाम हो जाता है. लिखित शिकायत करने के बाद उसे साफ तो किया जाता है, लेकिन अगले दिन से फिर वही समस्या बनी रहती है. इसका ठोस निदान होना चाहिए.

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बेड देने का नहीं है प्रावधान: प्रभारी निदेशक

वार्ड में सुरक्षाकर्मियों के लिये बेड के विषय पर रिम्स प्रभारी निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षाकर्मी के लिये बेड देने का प्रावधान नहीं है. केवल कैदी को ही बेड दिया जाता है.

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