इतिहासकार श्रीमाली ने कहा : इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना अलग तरीके का आतंक

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 01/01/2018 - 16:15

 

Kolkata : इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के जनरल प्रेसीडेंट के एम श्रीमाली ने देश में बहस एवं तर्क के लिए सिकुड़ते स्थान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश एक अलग तरीके का आतंक है. श्रीमाली ने कहा कि इतिहास को फिर से लिखने की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की कोशिश का एकमात्र एजेंडा एक ऐसे हिंदू राष्ट्र का गठन करना है, जहां अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया जाए.

भारत में तर्क एवं बहस के लिए स्थान सिकुड़ता जा रहा है

दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के पूर्व प्रोफेसर ने पीटीआई भाषासे कहा  कि यह चिंता का विषय है कि भारत में तर्क एवं बहस के लिए स्थान सिकुड़ता जा रहा है. हमने परेशान करने वाली इस प्रकार की प्रवृत्ति पहले कभी नहीं देखी. जिन्हें इतिहास की बहुत कम जानकारी है, वे इतिहास को अपने हिसाब से गढ़ने और अपने विचारों को थोपने की कोशिश कर रहे हैं. यह अलग तरीके का आतंक है.’’ श्रीमाली ने आरोप लगाया कि संघ और भाजपा धार्मिक आधारों पर देश को बांटने के लिए प्रतिबद्ध है. इतिहास तर्क पर आधारित होता है और उसे अपने हिसाब से गढ़े गए सत्यों, कल्पना या मिथकों पर नहीं लिखा जा सकता.

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पौराणिक कथा का हर हिस्सा इतिहास नहीं होता

पूर्व प्रोफेसर ने कहा कि पौराणिक कथाओं को समझने के तरीके हैं. पौराणिक कथा का हर हिस्सा इतिहास नहीं होता, लेकिन आप तर्क पेश नहीं करते, आप लोगों को परेशान करने की कोशिश करते हैं. यह इतिहास को लिखने का तरीका नहीं है.’’ श्रीमाली ने कहा कि हिंदुत्व का इस्तेमाल ताकत हासिल करने के लिए किया जा रहा है. अयोध्या मंदिर और पद्मावती फिल्म को लेकर हंगामे का लक्ष्य हिंदू मतों को हासिल करना है.

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