राव की शिकायत पर गृह विभाग ने डीजीपी से मांगी प्रतिक्रिया

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/13/2018 - 18:49

Ranchi: बकोरिया कांड की जांच पर उठ रहे सवाल में नया मोड़ आया है.  सीआईडी के पूर्व एडीजी एमवी राव की शिकायत के बाद अब गृह विभाग हरकत में आया है. विभाग ने डीजीपी डीके पांडेय से मामले पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है. गृह सचिव एसकेजी राहटे ने बताया कि एमवी राव की चिट्ठी के बाद विभाग की तरफ से डीजीपी डीके पांडेय से उनका पक्ष जानने के लिए उनसे कमेंट्स मांगे गये हैं. उनका कमेंट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी.

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क्या लिखा है एमवी राव ने अपनी चिट्ठी में

सीआइडी के पूर्व एडीजी एमवी राव ने पिछले हफ्ते सरकार को एक पत्र लिखा था. पत्र में उन्होंने कहा है कि डीजीपी डीके पांडेय ने उन पर बकोरिया में हुए फर्जी मुठभेड़ की जांच को धीमा करने का दवाब डाला था. एडीजी ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि एक बड़े अपराध को दबाने और अपराध में शामिल अफसरों को बचाने की कोशिश हो रही है. राव ने गृह सचिव एसकेजी रहाटे को दिए पत्र की प्रति मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार और राज्यपाल के प्रधान सचिव एसके सत्पथी को भी दी है.

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बकोरिया कांड के मुख्य बिंदु

- आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में कुल 12 लोग मारे गए थे. उनमें से एक डॉ आरके उर्फ अनुराग के नक्सली होने का रिकॉर्ड पुलिस के पास उपलब्ध था.

- घटना के ढ़ाई साल बीतने के बाद भी मामले की जांच कर रही सीआइडी ने न तो तथ्यों की जांच की, न ही मृतक के परिजनों और घटना के समय पदस्थापित पुलिस अफसरों का बयान दर्ज किया.

- पलामू सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक ने बयान दिया है कि पलामू के एसपी ने उन्हें घटना का वादी बनने के लिए कहा. इंकार करने पर सस्पेंड करने की धमकी दी.

- हरीश पाठक ने अपने बयान में यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम हाउस में चौकीदार ने तौलिया में खून लगाया और कथित मुठभेड़ के बाद मिले हथियारों की मरम्मती डीएसपी के कार्यालय में की गयी. यही कारण है कि घटना के 25 दिन बाद जब्त हथियार को कोर्ट में पेश किया गया.

- मारे गए 12 लोगों में दो नाबालिग थे. चार की पहचान अभी तक नहीं हुई है. आठ मृतकों के संबंध में नक्सली होने का कोई रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है.

- मामले की जांच किए बिना ही डीजीपी डीके पांडेय ने कथित मुठभेड़ में शामिल जवानों व अफसरों के बीच लाखों रुपये इनाम के रूप में बांट दिये.

- मामले की जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट एसटीएफ के तत्कालीन आइजी आरके धान ने दिया है. उन्होंने घटना के बाद घटनास्थल पर गए सभी अफसरों का बयान दर्ज करने का निर्देश अनुसंधानक को दिया है. उल्लेखनीय है कि घटना के बाद डीजीपी डीके पांडेय, तत्कालीन एडीजी अभियान एसएन प्रधान, एडीजी स्पेशल ब्रांच घटनास्थल पर गये थे.

- आइजी आरके धान ने घटना के समय पलामू में पदस्थापित पुलिस अफसरों के मोबाइल का लोकेशन हासिल करने का भी निर्देश दिया है.

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