सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय से RTI आवेदनों के जवाब में देरी का कारण बताने को कहा

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 01/12/2018 - 18:41

New Delhi : मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर ने प्रधानमंत्री कार्यालय को सूचना आयुक्तों की नियुक्ति, आरटीआई से जुड़े मामलों में अर्जियों के हस्तांतरण में देरी के लिए कारण बताने का निर्देश दिया है. कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) की याचिकाओं पर यह आदेश आया जिन्होंने अपने चार आरटीआई आवेदनों के माध्यम से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति, 2017 के प्रस्तावित आरटीआई नियमों और प्रधानमंत्री के यात्रा बिल आदि से संबंधित फाइल नोटिंग का ब्योरा मांगा था.

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पीएमओ से संबंधित सूचना मांगी थी

सूचना के अधिकार कानून के अनुसार जब किसी सरकारी प्राधिकार से कोई सूचना पाने के लिए आवेदन किया जाता है और सूचना किसी दूसरे प्राधिकार के पास हो या उसकी विषय सामग्री किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकार के कामकाज से जुड़ी हो तो आवेदन को हस्तांतरित किया जाता है. आरटीआई कानून की धारा 6(3) कहती है, ‘‘बशर्ते कि इस उप-धारा के अनुसार किसी आवेदन का हस्तांतरण जल्द से जल्द किया  जाएगा, लेकिन किसी भी मामले में आवेदन मिलने की तारीख से पांच दिन के बाद नहीं.’’ बत्रा ने कहा कि उन्होंने केवल पीएमओ के रिकार्ड से संबंधित सूचना के लिए अनुरोध किया था.

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सूचना देने में देरी के पीछे की बदनीयती

सुनवाई के दौरान बत्रा ने कहा कि उन्होंने पीएमओ के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) द्वारा सूचना देने में लंबी देरी रोजाना की बात बन जाने का अनुभव किया. माथुर ने बत्रा की दलीलों का उल्लेख करते हुए अपने आदेश में कहा, ‘‘वे लगातार ऐसा कर रहे हैं, जबकि उनके पहले के मामलों में चेतावनी के साथ निर्देश दिये गये हैं.’’ पीएमओ के सीपीआईओ ने आयोग को बताया कि सूचना देने में देरी बदनीयती से नहीं हुई. माथुर ने अपने चारों आदेशों में कहा, ‘‘प्रतिवादी (पीएमओ) को आरटीआई कानून के अनुसार आदेश प्राप्त करने की तारीख से 30 दिन के अंदर आरटीआई आवेदन को हस्तांतरित नहीं करने के लिए लिखित में कारण बताने का निर्देश दिया जाता है.’’

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