बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की वजह से न्यूरो सर्जरी में बढ़ रही है मरीजों की संख्या : डॉ बीके सिंह

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 04/19/2018 - 14:20

Saurabh Shukla

Ranchi : डॉ बीके सिंह रांची के जाने माने न्यूरो सर्जन हैं. लंबे समय तक उन्होंने रिम्स में काम किया. आज की तारीख में वह साईं अस्पताल में  बतौर चिकित्सक काम कर रहे हैं. न्यूज विंग संवाददाता में उनसे सिर में चोट लगने से होने वाले नुकसान की स्थिति पर बातचीत की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश.  

सवाल : आप कब से इस पेशे में हैं.

 जवाब: मेरा नाम डॉक्टर बसंत कुमार सिंह है. मैंने 1969 में एमबीबीएस की पढ़ाई दरभंगा मेडिकल कॉलेज से की और फिर  1979 में एमएस किया. उसके बाद मैंने अपना योगदान एक सर्जन के रूप रिम्स में दिया. 1984 से मैंने असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर न्यूरो सर्जरी ज्वाइन किया. 1994 से रिम्स के न्यूरो सर्जरी में एचओडी के पद पर था. 2005 में मैं वहां से रिटायर हो गया.

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सवाल: आपके कार्यकाल के दौरान कोई  ऐसी घटना,  जो आपके जेहन में अब भी हो.

 जवाबआउटडोर में मैं मरीज देख रहा था. तभी पुरुलिया से एक मरीज आया,  जिसके माथे में  कुल्हाड़ी  पूरा तरह से घुसा हुआ था और सिर्फ कुल्हाड़ी का डंडा बाहर था. उस वक्त मैंने उस मरीज से पूछा कि यह कैसे हुआ तो उसने बांग्ला में बताया कि वह गाय चरा रहा था, वहीं पर एक व्यक्ति से झगड़ा हुआ और उसी ने उसे मार दियाहम लोगों ने तुरंत उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर उसके सिर में लगे कुल्हाड़ी को बाहर निकाला और उसका इलाज किया. मरीज स्वस्थ होकर रिम्स से लौटा. इन सबके अलावा ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कई केस को हल किया. 1994 से लेकर 2005 तक 21 साल तक न्यूरो सर्जरी में अपना योगदान दिया.

 सवाल : न्यूरो सर्जरी में आने वाले ज्यादातर मरीज किस तरह की दुर्घटना के शिकार हुए रहते हैं.

 जवाब अधिकतर मरीज रोड एक्सीडेंट की घटना का शिकार होकर आते हैं. चूंकि लोग बिना हेटमेट पहने  बाइक चलाते हैं और दुर्घटना होने पर उनके सिर में चोट लगती है.  बिना हेलमेट पहने  बाइक चलाने वालों में युवाओं की संख्या ज्यादा होती है.  50 प्रतिशत मरीज के अंग का परमानेंट डैमेज सड़क दुर्घटना में होता है. जैसे लकवा, शरीर के अंग को नुकसान आदि. साथ ही  ब्रेन डैमेज की घटना सड़क हादसे में ज्यादा होती है. जबकि कुछ लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं.

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सवाल : आप के समय में  रिम्स की स्थिति और आज की स्थिति में आप किस तरह के बदलाव देखते हैं. 

 जवाबबहुत बदलाव हुआ है रिम्स में, कई सुधार भी हुए हैं. उस दौर में न्यूरो सर्जरी विभाग में मात्र 36 बेड था. मैं जब रिम्स से रिटायर हो गया, उस समय 75 बेड की व्यवस्था थी और ओटी बनाया था. आगे की व्यवस्था भी करके आया था. मेरे बाद सीबी सिन्हा और अभी डॉक्टर अनिल रिम्स में अच्छा काम कर रहे हैं. अभी न्यूरो में डेढ़ सौ बेड के आसपास हैं. जमीन पर मरीज रहता है, लेकिन डॉक्टर इलाज करते हैं. जब मैं रिम्स में सेवा दे रहा था, उस समय ओपीडी में 75 से 80 मरीज देखते थे. अभी दो शिफ्ट में  200 से 300 मरीजों को रिम्स में देखा जाता है.

 सवाल: रिम्स के मॉड्यूलर ओटी के शुरू हो जाने से लोगों को क्या फायदा होगा?

 जवाब: मॉड्यूलर ओटी में ऑपरेशन होने से मरीज को संक्रमण नहीं होगा. मॉड्यूलर ओटी की बनावट ऐसी है कि इसमें स्टेरलाईज हवा आएगा. साथ ही साउंड प्रूफ भी होता है. इस ओटी में आने वाला हवा फ़िल्टर होकर आता है. जिससे हवा से होने वाले संक्रमण का खतरा कम होता है.

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सवाल: सर में लगी गंभीर चोट को ठीक होने में कितना वक्त लग जाता है.

 जवाबवह चोट के ऊपर निर्भर करता है. चोट यदि गंभीर होता है तो रिकवरी होने में समय लगता है. मुझे याद है, एक बच्चे के सिर में चोट लगी थी और हड्डी टूटकर ब्रेन में घुस गया था. हमलोगों ने उसका इलाज किया और वह ठीक हो गया. रिम्स में प्रतिदिन 2000 मरीज आते हैं. दो हजार मरीजों को देखने के लिए जितने डॉक्टर चाहिए, उतने नहीं हैं. अभी डॉक्टर रिटायर कर रहे हैं और जूनियर डॉक्टरों को प्रमोट नहीं किया जा रहा है. इस वजह से यह समस्या बनी है. मैन पावर की कमी है और मरीजों की संख्या ज्यादा है.

 सवाल बतौर चिकित्सक आप क्या कहना चाहेंगे.

जवाब: मैं यही कहना चाहूंगा कि डॉक्टर को अपना फर्ज इमानदारी पूर्वक निभाना चाहिए. साथ ही  मरीज को भी अस्पताल में धैर्य बनाए रखने की जरूरत  है. कभी-कभी मरीज डॉक्टर से उलझ जाते हैं. ऐसी परिस्थिति नहीं होनी चाहिए. प्राइवेट और कॉरपोरेट अस्पताल में पैसे वाले लोगों का इलाज होता है. बाहर से डॉक्टर को बुलाया जाता है. उन्हें मोटी रकम फीस के रूप में दिया जाता है. वह पैसा अस्पताल किससे लेगा? पैसा मरीजों से ही लिया जाता है. वैसे अस्पताल में पैसे वाले लोग जाते हैं. गरीब प्राइवेट अस्पताल का नाम सुनते ही भाग जाता है. मैंने बहुत से गरीब मरीजों का इलाज मुफ्त में  किया है और उनकी  सेवा भी की है.

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