एसपी थानेदार पर बना रहे हैं दबाव, सरेंडर करनेवाले नक्सली नकुल यादव के खिलाफ कोर्ट में बयान देने से कर रहे हैं मना

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/09/2018 - 13:48

Ranchi: भाकपा माओवादी नकुल यादव के खिलाफ गवाही देने लोहरदगा कोर्ट पहुंचे बोकारो जिले के थाना प्रभारी पीसी दवेगम को नकुल यादव के पक्ष में गवाही देने की धमकी दी जा रही है. गौरतलब है कि यह धमकी उन्हें और कोई नहीं उनके सीनियर आला अफसर दे रहे हैं. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जानेवाले पीसी देवगम के अनुसार उनपर नकुल के पक्ष में गवाही देने का दबाव डाला जा रहा है और कहा जा रहा है कि चुंकि इस नक्सली ने सेंरेंडर कर दिया है इसलिए पुलिस को उसके संबंध में कड़ा बयान नहीं देना चाहिए. भाकपा माओवादी का जोनल कमांडर नकुल यादव सेन्हा थाना क्षेत्र के धरधरिया जलप्रपात में 2011 में सीरिज बम विस्फोट कांड में आरोपी था. देवगम ने कहा कि इस नक्सली ने जो किया मैंने अपनी आखां से देखा है मेरे सामने 11 जवान मारे गये, 60 के करीब लोग घायल हुए उस दौरान मैं खुद भी घायल हुआ था और अब मेरे ही सीनियर यह कह रहे हैं कि ऐसे नक्सली के खिलाफ सख्ती से नहीं नरमी से उसके पक्ष में गवाही दें क्योंकि उसने सेरेंडर कर दिया है. 

गौर करनेवाली बात है कि क्या नक्सली के सेरेंडर कर देने मात्र से उसके खिलाफ चल रहे हत्या और साजिश संबंधी सारे केसों से उसे छुटकारा मिल जाता है. देवगम ने कहा कि चाहे जो हो मैं ऐसे नक्सली नकुल यादव की गवाही में नरमी नहीं ला सकता. मैं वहीं कहूंगा जो हुआ है. नक्सली ब्लास्ट में घायल होने के बाद मुझे इतना दर्द नहीं हुआ था जितना की मेरे ही अफसरों द्वारा मेरे जवानों को मारनेवाले के खिलाफ गवाही देने के लिए मुझे मना किया जाने पर हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि दबाव देनेवाले अफसरों ने तो सारे मामले को सिर्फ कागज पर देखा है लेकिन मैंने सबकुछ अपनी आखों से देखा. जो तबाही इस नक्सली ने फैलायी थी. उन्होंने खुद को असुरक्षित भी बताया और कहा कि अब जबकि पुलिस डिपार्टमेंट ही मुझपर नक्सली नकुल के पक्ष में बयान देने का दबाव डाल रहा है, तो ऐसे में अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा हूं. उन्होंने कहा, बिना किसी सुरक्षा के बाकारो से रांची और रांची से लोहरदगा गवाही देने जाता हूं. मामला संगिन है लेकिन मुझे किसी तरह की सुरक्षा मुहैया नहीं करायी जाती है. पीसी देवगम के मुताबिक वह लोहरदगा आ कर गवाही देने की अपनी बाध्यता को खत्म करने के लिए दिल्ली हुमन राइटस को लेटर लिखेंगे.

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क्या हुआ कोर्ट मे जब गवाही देने पहुंचे देवगम
लोहरदगा एसपी क्राइम रीडर के माध्यम से देवगम को पता चला कि उन्हें थाना अंतर्गत धरधरिया में 13 मई 2011 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट कांड के संदर्भ में गुरूवार को कोर्ट में गवाही के लिए उपस्थित होना है. इसके लिए दवेगम बोकारो एसपी को सूचना देकर लोहरदगा व्यवहार न्यायालय पहुंचे थे. कोर्ट में गवाही के लिए पेश होने से पहले ही किस्को थाना के एएसआई असरफी बहेलिया ने उन्हें मोबाइल फोन देकर बात करने को कहा. जब उन्होंने फोन पर बात की तो दूसरी तरफ अभियान एसपी विवेक ओझा थे. विवेक ओझा ने कहा कि नकुल उंचे कद का नेता है और उसने पुलिस के सेरेंडर नीति अभियान के तहत ही सेरेंडर किया है इसलिए आप उसके खिलाफ अनावश्यक बयान नहीं देंगे. ऐसी बात सुन कर देवगम ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया और कहा कि आपने इस घटना को कांगजों में देखा है, लेकिन मैंने अपनी आंखें से देखा है. इसलिए मैं आपकी बात नहीं मानूंगा. 

किसी और के फोन से करायी थानेदार  ने बात 
देवगम ने कहा कि बात होने के बाद जब मैंने फोन वापस बहेलिया को दिया, तो उसने वहीं खड़े दो व्यक्ति के हाथ में फोन दे दिया. उसके ऐसा करने पर मैंने उसपर गुस्सा भी किया और कहा कि आम पब्लिक के मोबाइल से मेरी बात कराने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति की पहचान बहेलिया ने नकुल के साले के रूप में की लेकिन दूसरे व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी. उन्होंने कहा, अपने ही अफसरों द्वारा नकुल को बचाने के प्रायस और मुझपर डाले गये दबाव के बाद मेंने गवाही की तिथि टालने की अपील की, इसके बाद नकुल की पेशी न कराकर इसी कांड के आरोपी सुरेंद्र लोहरा की पेशी कर उसकी गवाही ली गयी. एक अन्य प्रभात मोची की गवाही होनी थी लेकिन वह होटवार जेल में बंद है और वीडियो कॉन्फ्रेंस के तहत गवाही देनी थी इसलिए टल गयी. 

डीआईजी अमोल वी होमकर के समक्ष नक्सली नकुल यादव ने किया था सेरेंडर
25 लाख रूपये के इनामी नक्सली नकुल यादव और मदन यादव ने चार मई 2017 को डीआईजी अमोल वी होमकर के समक्ष सेरेंडर कर दिया था. नकुल यादव गुमला क्षेत्र का नामी नक्सली था. उसके नाम का इलाके में आतंक था. उसने कई छोटे-बड़े नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया था. बड़े-बड़े ठेकेदार से लेकर कंपनियां तक उसकी बात सुनने को मजबूर थे. पुलिस के लिए वह एक चुनौती के समान था. नक्सलियों के सरेंडर अभियान के दौरान इन नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सेरेंडर तो कर दिया लेकिन इन पर कई ठेकेदारों को मारने सहित अन्य कई तरह के मामले चल रहे हैं. पुलसि थाने में नकुल यादव के खिलाफ कुल 45 मामले दर्ज हैं.

करोड़ों की संपत्ति का मालिक है ये नक्सली
उल्लेखनीय है कि यह इनामी नक्सली काफी धनी भी है हालांकि उसने ज्यादातर संपत्ति अपनी पत्नी और भाई के नाम ले रखी है. नोटबंदी के दौरान उसके भाई रोहित यादव के पास से पुलिस ने करीब 25 लाख रूपये बरामद किये थे. ईडी ने भी उसकी संपत्ति जब्त करने के आदेश दिये थे. नकुल यादव की पत्नी के नाम पर बैंक में 10 लाख, भाई के नाम पर बैंक में 61 लाख और पांच जेसीबी हैं. कुंदा के प्रतापपुर में 27 एकड़, मैकलुस्कीगंज में 10 डिसमिल, भाई रोहित यादव के नाम पर एक करोड़ का मकान भी है.

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