कोयला व्यवसायी संजय सिंह हत्याकांड में गवाहों का बयान, नहीं देखा किसी को गोली चलाते

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 01/05/2018 - 10:46

Dhanbad : कोयला व्यवसायी संजय सिंह की हत्या मामले में गुरुवार को कोर्ट में दो गवाहों ने अपना बयान दिया. गवाह सुरेंद्र जैन और बीपी डालमिया ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने किसी को गोली चलाते नहीं देखा था. वो लोग एसपी कोठी में थे. गोली चलने की अवाज सुनकर वो लोग बाहर निकले तब लोगों से पता चला कि सुरेश सिंह की गाड़ी पर गोली चली है. उन्होंने किसी को गोली चलाते नहीं देखा.

एसपी से मिलने आए थे उनके आवास पर: गवाह

सुरेंद्र जैन ने कोर्ट को कहा कि मेरे भाई राजकुमार जैन का अपहरण हो गया था. अपने भाई की बरामदगी के लिए वे धनबाद एसपी के आवास पर एसपी से बातचीत कर रहे थे. बाहर सड़क पर गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो वे एसपी के साथ बाहर आये. तब तक सुरेश सिंह की गाड़ी वहां से जा चुकी थी. गवाह बीपी डालमिया ने भी सुरेंद्र जैन की बातों का समर्थन करते हुए कहा वे भी एसपी से मिलने आये थे, घटना के बाद वे लोग बाहर निकले. गौरतलब है कि संजय सिंह हत्याकांड के 21 वर्ष बीत चुके है पर अभी तक सिर्फ तीन गवाहों की गवाही हो पायी है. पिछली तारीख में मृतक संजय सिंह की पत्नी पुष्पा सिंह ने गवाही हुयी थी.

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26 मई 1996 को हुयी थी संजय सिंह की हत्या

उल्लेखनीय है कि 26 मई 1996 को सुबह साढ़े दस बजे एसपी कोठी के निकट कोयला कारोबारी संजय सिंह की गोली मार कर हत्या दी गयी थी. हत्या की प्राथमिकी बहनोई कृष्णा सिंह के बयान पर सुरेश सिंह व पप्पू सिंह उर्फ रविशंकर सिंह के विरुद्ध दर्ज की गयी थी. प्राथमिकी के अनुसार संजय सिंह गाड़ी संख्या बीआर 17एच-0003 से सुरेश सिंह व पप्पू सिंह के साथ घर से निकले थे. थोड़ी देर बार संजय की पत्नी पुष्पा सिंह को मदन सिंह ने फोन कर बताया कि उनके पति को गोली मार दी गयी है. सूचना पर ये लोग केंद्रीय अस्पताल धनबाद गये जहां डॉक्टरों ने संजय को मृत घोषित कर दिया था. प्राथमिकी में कृष्णा सिंह ने आरोप लगाया था कि व्यापारिक दुश्मनी के कारण सुरेश सिंह ने गोली मार कर संजय सिंह की हत्या कर दी थी. अनुसंधान के बाद पुलिस ने सुरेश सिंह और रविशंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. बाद में हाइकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीआइडी से करायी गयी. सीआइडी ने अनुसंधान पूरा कर रामधीर सिंह, पवन कुमार सिंह, राजीव रंजन सिंह, काशीनाथ सिंह व विनोद सिंह के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र समर्पित किया था. 

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