शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं- सुप्रीम कोर्ट

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/17/2018 - 10:18

NewDelhi: रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. देश की सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि शादी का झांसा देकर सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप नहीं हो सकते. कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले को रद्द कर दिया है, जिसमें लड़का और लड़की 8 साल से साथ रह रहे थे. लड़के ने लड़की को शादी का वादा किया था. इन आठ सालों में दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने. कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में लड़के को रेप का आरोपी ठहराना मुश्किल है. वह भी तब, जब शिकायतकर्ता खुद मान रही है कि वे आठ वर्षों तक पति-पत्नी की तरह रहे हैं.

इसे भी पढ़ें:रेलवे होटल टेंडर घोटाला मामले में बढ़ी लालू परिवार की मुश्किल, लालू, तेजस्वी और राबड़ी देवी के खिलाफ चार्जशीट दायर

8 सालों से थे रिलेशन में

शीर्ष अदालत पहुंचे इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से आरोप था कि वे पति-पत्नी की तरह से आठ साल तक साथ रहे और अब वह उससे भाग रहा है और धोखा दे रहा है. ऐसे में कोर्ट ने युवक पर लगे सभी आरोपों को रद्द कर दिया है.

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बदला

शिकायतकर्ता का आरोप है कि 8 सालों से दोनों रिलेशनशिप में थे, और अब वो उससे पीछा छुड़ा रहा है. कथित पति ने रेप (आईपीसी की धारा 376, 420, 323 और 506 के तहत) की कार्यवाही समाप्त करने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की,  लेकिन हाईकोर्ट ने कार्यवाही समाप्त करने से मना कर दिया और कहा कि जब आदमी शादी करने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता है और यह पता लग जाए कि उसका शुरू से ही शादी करने का कोई इरादा नहीं था, तो इसे बलात्कार माना जाएगा. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के भी कई फैसले हैं. 

इसे भी पढ़ेंराज्य के 65.15 फीसदी लोगों ने निकाय चुनाव में किया अपने मतों का इस्तेमाल, रांची में 49.3 फीसदी वोटिंग

जस्टिस एस.ए. बोब्डे और एल. नागेश्वर राव की पीठ ने आदेश में कहा कि हमें इस बात से मतलब नहीं है कि अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता वास्तव में विवाहित हैं या नहीं. दोनों अपनी मर्जी से एकदूसरे के साथ रह रहें थे. लेकिन आरोपी पर बलात्कार का आरोप बनाए रखना मुश्किल है. ये हो सकता है कि उसने शादी के लिए झूठा वादा कर दिया हो. लेकिन आठ साल तक चले इस रिलेशन में शारीरिक संबंधों को रेप मानना मुश्किल है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी दिया था ऐसा फैसला

कुछ दिन पहले इसी तरह के एक फैसले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी माना था कि आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता है. बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने एक रेप केस की सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया था कि किसी रिलेशनशिप में अगर लड़का-लड़की सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं तो ऐसे में व्यक्ति को रेप का दोषी नहीं माना जाएगा. अदालत ने इस फैसले के साथ ही आरोपी को भी बरी कर दिया था.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Top Story
loading...
Loading...