खरसावां गोलीकांड के शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि, नहीं पहुंचे मुख्यमंत्री

Submitted by NEWSWING on Mon, 01/01/2018 - 19:14

Kharsawa: नये साल के पहले दिन खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी. एक जनवरी 1948 को शहीद मैदान में 6000 लोग शहीद हुए थे. झारखंडी प्रतिरोध संस्कृति की गौरवमई विरासत और पूर्वजों के संघर्षों, बलिदान को जेहन में संजोए हुए हजारों की संख्या में लोग सुबह से ही शहीद मैदान में जमा होने लगे थे. हो युवा महासभा से जुड़े शुरा बिरूली ने कहा इस धटना को इतिहासकरो ने भी इतिहास में मुकम्मल स्थान नहीं दिया है, फिर भी शहादत की इतिहास को याद रखते हुये कोल्हान के लोग आज के दिन को इतिहास के काला दिवश के रूप में याद करते हैं. हालांकि पिछली बार हुई घटना को लेकर मुख्यमंत्री इस बार शहीदों को श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे. श्रद्धांजलि देने वाले नेताओं में अर्जुन मुंडा, दशरथ गगराई, दीपक बिरुआ और शशिभूषण समड शामिल थे.

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अपने संघर्षों की विरासत आगे बढ़ायेंगे

विष्णु बांड्रा ने कहा कि हम लोग पदयात्रा करते हुए अपने पूर्वजों के शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि देने खरसावां आए हैं. हम अपने अधिकारों के लिए अब सजग हो रहे हैं. हमें कोई मूर्ख बना कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता. हम अपनी विरासत और संस्कृति को बचाने में सक्षम हैं. सरकार भले ही हमारी भाषा, संस्कृति, इतिहास और जल, जंगल, जमीन को लेकर नकारात्मक रवैया अपनाये, लेकिन हम अपने संघर्षों के बल पर अपनी विरासत को आगे बढ़ायेंगे.

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शहीदों को सम्मान देने के लिए नहीं मनाते नये साल का जश्न

राज कंडिया बताते हैं शहीदों के सम्मान के लिये आज का दिन हम लोग नव वर्ष का उत्साह नहीं मनाते, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए इस दिन को याद करते हुए खरसावां शहीद मैदान में जमा होते हैं. एक जनवरी 1948 के बारे में बताते हुए राज कहते हैं कि आज ही के दिन सैकड़ों आदिवासी अलग आदिवासी प्रदेश झारखंड की मांग करने इकट्ठे हुए थे. आदिवासियों की आवाज को दबाने के लिए प्रशासन ने उनपर फायरिंग कर दी, जिसमें मरने वालों की सही तादाद किसी को मालूम नहीं. ओडिशा प्रशासन ने लाशों को ठिकाने लगाने के लिए खरसावां के कुओं में फेंका था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार मात्र 17 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार इस घटना में सैकड़ों लोगों की जाने गई थी. इस घटना की तुलना तत्कालीन गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने जालियांवाला बाग की घटना से की थी.

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1 जनवरी 2017 को मुख्यमंत्री रघुवर दास का हुआ था विरोध

1 जनवरी 2017 को खरसावां शहादत दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री शहीदों को श्रद्धांजलि देने खरसावां पहुंचे थे. उस दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री का जमकर विरोध किया था. सीएम को काला झंडा दिखाया गया था और जूते-चप्पल भी फेंके गये थे. इस साल भी मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी थी. सुरक्षा की दृष्टि से इस बार दिसंम्बर के पहले हफ्ते से ही प्रशासन जोर शोर से अपनी तैयारी कर रखी थी, लेकिन पिछली बार हुई घटना को देखते हुए सीएम इस बार वहां शहीदों को श्रद्धांजलि देने नहीं पुहंचे.

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प्रशासन ने कर रखी थी पूरी तैयारी

पिछले साल शहीद दिवस पर हुई घटना को लेकर जिला प्रशासन ने इस बार पूरी तैयारी कर रखी थी. 28 दिसंबर को जिला प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन के लोगों के साथ सामूहिक बैठक की गई है. बैठक में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मुख्यमंत्री समेत शहीद परिवार, अन्य राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन के लोगों के लिए अलग-अलग समय का निर्धारण किया गया था. यह भी सुनिश्चित किया गया कि किसी तरह का विरोध-प्रदर्शन 1 जनवरी को यहां न हो. बैठक में डीसी छवि रंजन ने कहा था कि शहीद दिवस पर सभी कार्यक्रम समयबद्ध तरीके से होंगे. उन्होंने बताया कि शहीद पार्क में मुख्यमंत्री के पहुंचने तक मुख्य गेट बंद रहेगा. शहीद पार्क से मुख्यमंत्री के वापस लौटने के बाद मुख्य गेट खुलेगा, साथ ही तैनात मजिस्ट्रेट व पुलिस बल के जवान भी जूता पहन कर नहीं जायेंगे.

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