जन प्रतिनिधि की शैक्षणिक योग्यताओं की पड़ताल करने का मतदाताओं को है अधिकारः दिल्ली हाई कोर्ट

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/17/2018 - 13:17

- सीआईसी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की 10 वीं और 12 वीं कक्षा के रिकार्ड को आवेदक को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मुआयना करने की इजाजत दी थी

- जब  परीक्षा के अंक ऑनलाइन उपलब्ध हैं, तो निजता का अधिकारका दावा नहीं बन सकताः दिल्ली हाई कोर्ट

- जब एक जन प्रतिनिधि अपनी शैक्षणिक योग्यताओं की घोषणा करता है, तब मतदाता को भी उस घोषणा की पड़ताल करने का अधिकार हैः आयोग

New Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि सीबीएसई परीक्षा के अंक अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं, तो पूर्व छात्र - छात्राओं के लिए निजता का अधिकारका कोई दावा नहीं बन सकता. केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के एक निर्देश को चुनौती देने वाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की. दरअसल, सीआईसी ने अपने निर्देश में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की 10 वीं और 12 वीं कक्षा के रिकार्ड को आवेदक को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मुआयना करने की इजाजत दी थी.

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मामले की अगली सुनवाई आठ मार्च को

न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि क्या छात्रों के सीबीएसई के सारे अंक अब लोगों के लिए उपलब्ध हैं ? यदि आज यह संभव है, तो आप यह नहीं कह सकते कि पूर्व छात्रों का निजता का अधिकार का दावा बनता है. अदालत ने सीबीएसई के वकील अनिल सोनी से वर्तमान तथ्यात्मक स्थिति पर जानकारी प्राप्त करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ मार्च की तारीख तय कर दी. अदालत ने पिछले साल नवंबर में बोर्ड से कहा था कि यदि यह आरटीआई आवेदक मोहम्मद नसरूद्दीन को सूचना नहीं देता है, तो यह सीआईसी के आदेश पर स्थगन को आगे नहीं बढ़ा सकती.

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सीआईसी ने आवेदक को स्मृति के स्कूली रिकार्ड का मुआयना करने की इजाजत दी थी

अदालत से सीबीएसई ने कहा कि इसने आरटीआई आवेदक को अपनी अपील और स्थगन आदेश के बारे में जानकारी दी है. सीबीएसई ने 17 जनवरी 2017 के सीआईसी के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि स्मृति के स्कूली रिकार्ड का आरटीआई अधिनियम के तहत खुलासा नहीं किया जा सकता क्योंकि यह तीसरे पक्ष की सूचना है. सीआईसी ने आवेदक को स्मृति के स्कूली रिकार्ड का मुआयना करने की इजाजत दी थी और सीबीएसई की यह दलील खारिज कर दी थी कि नसरूद्दीन द्वारा मांगी गई सूचना निजीप्रकृति की है. आयोग ने कहा था कि जब एक जन प्रतिनिधि अपनी शैक्षणिक योग्यताओं की घोषणा करता है, तब मतदाता को भी उस घोषणा की पड़ताल करने का अधिकार है.

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