सोशल मीडिया पर #MosqueMeToo अभियान में महिलाओं ने रखी अपनी बात, कहा- पवित्र धार्मिक स्थलों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं, शेयर की आपबीती

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/15/2018 - 12:31

Ranchi: पिछले साल यौन शोषण के खिलाफ शुरू हुए अभियान  #MeToo ने पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किया. हाल ही में सोसल मीडिया पर एक और ऐसा ही अभियान #MosqueMeToo के नाम से शुरू हुआ है, जिसमें दुनिया भर से महिलाएं जुड़ी हैं और ये महिलाएं खासतौर पर धार्मिक स्थलों पर होनेवाले यौन अपराधों और यौन शोषण से जुड़ी आपबीती सुना रही हैं. सोसल मीडिया पर #MosqueMeToo की शुरूआत लेखिका और पत्रकार मॉना ट्हावी ने की थी. उन्होंने वर्ष 2013 में हज के दौरान उनके साथ हुए यौन शोषण के बारे में इसके माध्यम से दुनिया के सामने आपनी बात रखी.

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"जवाब देते वक्त मैं अपने आंसू नहीं रोक सकी

इस लेखिका और पत्रकार ने एक अन्य महिला के साथ हुई ऐसी ही घटना का जिक्र किया और कहा कि एक महिला ने अपनी मां के साथ हज के दौरान हुए यौन शोषण के बारे में बताया और एक कविता भी लिखी, जिसका जवाब देते वक्त मैं अपने आंसू नहीं रोक सकी. लेखिका के ऐसा लिखने भर से आप सहज रूप से उस वहशीपन का अंदाजा लगा सकते हैं कि मात्र जवाब देने के दौरान ही वह रो पड़ी थीं. बता दें कि लेखिका द्वारा शुरू किया गया यह अभियान फारसी टविटर पर टॉप टेन ट्रेंड में आ गया है. यही नहीं मात्र 24 घंटे में ही इसमें जुड़नेवाले महिलाओं और पुरूषों की संख्या दो हजार के आंकड़े को पार कर गयी. इसपर महिलाओं ने भारी संख्या में यह बात स्वीकार की है कि हज के दौरान या मस्जिदों में भीड़ का फायदा उठाकर उन्हें गलत तरीके से छुआ गया या कुछ गलत करने की कोशिश की गयी. कईयों ने अपने साथ हुई घटना को यहां खुल कर रखा.

हिजाब पहनने से सुरक्षित होती हैं महिलाएं इस दावे को बताया खोखला

इसके माध्यम से कई लोगों ने यह बात भी कही कि हिजाब में रहने से महिलाओं की सुरक्षा होती है यह बात बिल्कुल गलत है. बता दें कि ईरान में हिजाब को इतना इंपोर्टेंटस दिया गया है कि कई जगह पर पोस्टर लगा कर इसके फायदे का प्रचार किया गया है. जिसमें बताया गया है कि बिना हिजाब की महिलाएं बिना रैपर की लॉलीपॉप जैसी हैं जिसपर कई मक्खियां लालच भरी निगाह से देखती हैं और बैठने की कोशिश करती हैं. हाल ही में ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रर्दशन भी किये गये थे, जिसमें करीब 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था.

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जानें महिलाओं ने कैसे कैसे वाकये शेयर किये

@NewtmasGrape हैंडल के किसी ने लिखा कि जब वह मात्र 10 साल की उम्र में थीं तब एख मस्जिद में एक व्यक्ति ने पीछे से उनके अंगों को बुरी तरह से दबोचा था.

ट्विटर पर @djenanggulo हैंडल के साथ एक महिला ने लिखा कि सऊदी अरब में स्थित मस्जिद नवाबी से कुछ फीट की दूरी पर ही एक व्यक्ति ने उनका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचने का प्रयास किया गया.

कई ईरानी और फारसी बोलने वाले ट्विटर यूजर्स ने न सिर्फ अपने साथ हुए यौन शोषण के अनुभव बताए बल्कि इस मान्यता को भी चुनौती दी कि हिजाब महिलाओं को यौन शोषण और दुर्व्यवहार से बचाता है.

ट्विटर पर @nargesska नामक एक हैंडल से एक महिला ने लिखा कि धर्मस्थलों पर जाने से पहले महिलाओं को चेतावनी दी जाती है. जब मेरी मां तवाफ कर रही थीं तब पापा उसके पीछे खड़े होकर उसकी रक्षा कर रहे थे.

यूजर 'हनन' ने ट्विट किया, "मेरी बहनों ने इस माहौल में यौन शोषण झेला है, जो वो अपने लिए सुरक्षित मानती थीं. भयानक लोग पवित्र स्थानों पर भी होते हैं. एक मुस्लिम के तौर पर हमें अन्याय झेल रही अपनी बहनों का साथ देना चाहिए."

@reallyHibbs हैंडल से लिखा गया कि जब मैं जामा मस्जिद में गयी, तो एक व्यक्ति ने मेरी छाती पर हाथ मारने का प्रयास किया था. उस समय उन्होंने इस संबंध में किसी से भी बात नहीं की थी क्योंकि लोगों को उस समय लगता कि मैं इस्लामोफोबिया का समर्थन कर रही हूं.

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