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राज्य सेवा के कर्मी और अधिकारी के प्रमोशन का रास्ता साफ, सरकार की नीति तैयार, कभी भी हो सकती है घोषणा

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Akshay Kumar Jha

Ranchi : झारखंड राज्य के अधिकारियों और कर्मियों के लिए खुशखबरी है. उनके प्रमोशन का रास्ता सरकार ने निकाल लिया है. किसी भी वक्त कार्मिक विभाग की तरफ से लेटर जारी हो सकती है. लेटर जारी होने के बाद करीब 1500 से ज्यादा कर्मी और अधिकरी सरकार के प्रमोशन नीति से प्रभावित होंगे. राज्य के कर्मियों और अधिकारियों के प्रमोशन का मामला कोर्ट में लंबित होने की वजह से सभी कर्मी और अधिकारियों का प्रमोशन अभी तक रुका हुआ था. सरकार की नीति के मुताबिक अगर कोर्ट का फैसला आता है तो सरकार की इस नीति की सराहना होगी और यदि कोर्ट सरकार की नीति के खिलाफ फैसला सुनाती है तो प्रमोशन पाए अधिकारी और कर्मी प्रभावित होंगे. कर्मियों और अधिकारियों से प्रमोशन वापस भी लिया जा सकता है.

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प्रमोशन का मामला कोर्ट में, कार्मिक विभाग ने लगायी थी रोक

राज्य के अधिकारियों और कर्मियों के प्रमोशन का मामला कोर्ट में लंबित है. हर महीने मामले की सुनवाई के लिए तारीख मिलती है, लेकिन सुनवाई हो नहीं पा रही है. अमरेंद्र कुमार सिंह बनाम राज्य सरकार के केस में 27 फरवरी 2017 को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के कर्मियों और अधिकारियों को प्रमोशन में मिलने वाले जातिगत आरक्षण पर रोक लगा दी थी. 25 जनवरी 2018 को कार्मिक विभाग की तरफ से एक चिट्ठी जारी की गयी. चिट्ठी में कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए राज्य सरकार के सभी कर्मियों और अधिकारियों के प्रमोशन पर रोक लगा दी गयी. कहा गया कि कोर्ट का फैसला आने तक कोई प्रमोशन नहीं होगा. लेकिन सरकार ने अपने स्तर से प्रमोशन के लिए रास्ता अब साफ कर लिया है. किसी भी समय कार्मिक विभाग की तरफ से लेटर जारी की जा सकती है.

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सरकार की नीति के बाद कहां फंसेगा पेंच

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सरकार की प्रमोशन नीति के बाद राज्य के कर्मियों और अधिकारियों के बीच खुशी तो होगी, लेकिन विरोध भी हो सकता है. दरअसल सरकार सामान्य जाति के वर्ग के कोटे में सभी का प्रमोशन करने पर विचार कर रही है. ऐसे में वो पद खाली रहेंगे जो एससी और एसटी के लिए आरक्षित है. अगर ऐसा होगा तो सामान्य वर्ग के कर्मियों और अधिकारी अपना विरोध जताएंगे कि उनके कोटे की सीट एससी और एसटी को कैसे दी जा रही है. वहीं एससी-एसटी की संख्या कम होने की वजह से सामान्य वरीयता के आधार पर प्रमोशन मिलने का विरोध एससी और एसटी उम्मीदवार कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें प्रमोशन का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा.

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संघ ने की मांग कंडीशन लगाकर दे दिया जाए प्रमोशन  

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने प्रमोशन के मामले में सरकार से मांग की थी कि कंडीशन लगाकर सभी कर्मियों और अधिकारियों को प्रमोशन दे दिया जाए. कोर्ट का फैसला अगर सरकार की नीति के मुताबिक नहीं रहने की शर्त में प्रमोशन वापस ले लिया जाए. ऐसा उदाहरण उद्योग विभाग में देखने को मिला है. 2017 सितंबर में कुछ लोगों का प्रमोशन प्रोविजनल प्रमोशन की तौर पर किया गया था. प्रमोशन के बाद उन्हें सारे लाभ मिल रहे हैं. कोर्ट का फैसला आने पर प्रमोशन प्रभावित हो सकता है.   

सरकार ने प्रमोशन का रास्त निकाल लिया हैः केके खंडेवाल (कार्मिक सचिव)

सरकार ने राज्य के कर्मियों और अधिकारियों को दी जाने वाली प्रमोशन का रास्त निकाल लिया है. लेकिन कार्मिक विभाग की तरफ से इसकी घोषणा नहीं की गयी है. कुछ तैयारियां बाकी है. सारी औपचारिकता पूरी होते ही घोषणा कर दी जाएगी.

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