3000 करोड़ मुआवजा घोटालाः जिस CO ने की ज्यादा गड़बड़ी, भू-राजस्व विभाग ने उसे टंडवा भेजा, जहां एनटीपीसी कर रहा था भूमि अधिग्रहण

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/12/2018 - 11:46

Ranchi: हजारीबाग के बड़कागांव में पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण में हुए 3000 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले के तार सरकार के शीर्ष अफसरों से भी जुड़े हुए हैं. रिटायर आईएएएस देवाशीष गुप्ता की एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त सबसे अधिक गड़बड़ी की गयी, उस वक्त बड़कगांव के अंचलाधिकारी (सीओ) दिलीप ठाकुर थे. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि उनके कार्यकाल में ही सबसे अधिक गड़बड़ी की गयी. रिपोर्ट में ही इस बात का भी जिक्र है कि उस सीओ को बाद में चतरा के टंडवा अंचल में पोस्टिंग दी गयी, जहां एनटीपीसी का एक और परियजोना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा था. यहां उल्लेखनीय है कि सीओ की पोस्टिंग भू-राजस्व विभाग करती है.

इसे भी पढ़ें - 3000 करोड़ के मुआवजा घोटाले में सबसे ज्यादा गड़बड़ी करने वाले सीओ ने एसआईटी को बताया था, वरीय अधिकारियों का दबाव था

इसे भी पढ़ें - क्या रांची पुलिस ने डीजीपी डीके पांडेय व अन्य अफसरों को बचाने के लिए 514 युवकों को नक्सली बताकर सरेंडर कराने वाले केस की फाइल बंद कर दी ! 

सीनियर अफसर ने बनाया था दबाव

सीओ ने एसआईटी के समक्ष उपस्थित होकर बताया था कि एनटीपीसी के पक्ष में काम करने के  लिए उस पर सीनियर अफसरों का दबाव था. शुरु में उसने इसका विरोध किया था, जिसके बाद उसके वेतन निकासी पर रोक लगा दी गयी थी. फिर बाद में उसने सीनियर अफसरों के कहे अनुसार काम किया. यहां उल्लेखनीय है कि सीओ स्तर के अधिकारी के वेतन निकासी पर रोक का अधिकार जिला के डीसी या फिर भू-राजस्व विभाग की है.

इसे भी पढ़ें - हजारीबाग के बड़कागांव में हुए 3000 करोड़ के मुआवजा घोटाले की सीबीआई जांच शुरु

अंचल कार्यालय और सीओ पोस्ट अॉफिस की तरह काम किया

रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि भूमि अधिग्रहण के लिए सरकारी अमीन से जमीन का सर्वे या मापी नहीं कराया गया. एनटीपीसी की तरफ से नियुक्त अमीन ने यह काम किया. एनटीपीसी के कार्यालय के कंप्यूटर से जमीन अधिग्रहण के कागजात तैयार किए जाते थे और उसे सीओ के पास भेजा जाता था. सीओ दिलीप ठाकुर एनटीपीसी द्वारा तैयार कागजात पर हस्ताक्षर कर देते थे. उल्लेखनीय है कि बड़कागांव सीओ अॉफिस में उस वक्त कंप्यूटर भी नहीं थे. इस तरह बड़कागांव सीओ कार्यालय में एनटीपीसी और फर्जी जमाबंदी के जरिए मुआवजा लेने वाले के बीच पोस्ट अॉफिस का काम किया.

इसे भी पढ़ें - दस दिनों में एक लाख शौचालय बनाने का सरकारी दावा झूठा, जानिए शौचालय बनाने का सच ग्रामीणों की जुबानी

नोटबंदी के समय भी चर्चा में आया था दिलीप ठाकुर का नाम

पहले बड़कागांव और बाद में टंडवा का सीओ बनने वाले दिलीप ठाकुर का नाम नोटबंदी के तुरंत बाद भी चर्चा में आया था. एक खुफिया एजेंसी ने सरकार को रिपोर्ट की थी कि सीओ दिलीप ठाकुर ने बड़े स्तर पर पुराने नोटों की बदली करवायी है. कुछ पेट्रोल पंप के जरिए करोड़ों रुपये को खपाने में सफलता पायी है. हालांकि उस रिपोर्ट पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गयी. उल्लेखनीय है कि जब दिलीप ठाकुर बड़कागांव के सीओ थे, तब उनके कार्यालय का एक कर्मचारी 21 लाख रुपया रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था. 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.