झारखंड की आदिम जनजाति के विकास के लिए केन्द्र बजट में 35.5 प्रतिशत की कमी

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 05/18/2018 - 19:47

Ranchi : केन्द्र सरकार के द्वारा आदिम जनजातियों के विकास के लिए किये जाने वाले प्रावधान की बजट राशि में 2016-17 के मुकाबले 2017-2018 में 35.5 प्रतिशत की कमी की गयी है. केन्द्र सरकार की ओर से आदिम जनजातियों की अवस्था का आकलन करने के बाद अत्यधिक पिछड़ापन तथा कमजोर होने के कारण उनके संरक्षण तथा विकास एवं उनकी आबादी में आ रही कमी को रोकने के मकसद से  विशेष योजनाओं का का संचालन किया जा रहा है. इन योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भूमि विकासकृषि वृद्धि, मवेशी विकास आदि कार्य किये जाते हैं. इन योजना को चलाने के लिए 2016-17 में 31 करोड़ 20 लाख रूपये का प्रावधान था, लेकिन चालू वित्त वर्ष में मात्र 20 करोड़ 43 लाख 75 हजार रूपये का ही प्रावधान किया गया है.

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हाशिये पर आज भी हैं आदिम जनजातियां

झारखंड में आदिम जनजातियों की दयनीय अवस्था जग जाहिर सी बात है.  राज्य सरकार की ओर से भी उनकी दशा और अवस्था सुधारने के लिए कई प्रयास शुरू किये गये हैंलेकिन उनकी अवस्था आज भी दयनीय बनी हुई है. आदिम जनजातियों के निवास स्थल आज भी बिजली, पानीसड़क जैसे सुविधाओं से वंचित हैं.  गुमला जिला के पट क्षेत्र में रहने वाले असुर परिवार को तीन से पांच किलोमीटर की दूरी से पेयजल लाना पड़ता है. वही दमिन इको में पहाड़िया परिवारों को पेयजल की घोर किल़लत का सामना करना पड़ता है. दुमका जिला के रामगढ़ प्रखंड के विभिन्न गांवों के 545 आदिम जनजाति परिवार को डाकिया योजना के तहत खाद्यान्न नहीं  मिलने की सूचना पर अधिकारीयों के द्वारा संज्ञान लिया गया हैलेकिन आदिम जनजातियों से जुड़ी योजना को ईमानदारी पूर्वक धरातल पर उतारने की जरूरत है.  राज्य सरकार की ओर से आदिम जनजातियों के विकास और रोजगार के लिए विशेष प्रावधान किये गये हैं.  सरकारी नौकरी में भी कोटा निर्धारण किये जाने के बाद भी शिक्षा का स्तर निम्न होने के कारण इन समूह के युवाओं को विशेष लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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झारखंड की आदिम जनजातियां

राज्य की आठ जनजातियां पीटीजी समूह के अंतर्गत आती हैं. इनमें असुर, बिरहोर, बिरजिया, कोरबा, माल पहाड़िया, पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया और सबर जनजाति शामिल हैं. 2011 की जनगणना के आधार पर असुर जनजाति की कुल जनसंख्या 22459, बिरहोर जनजाति की आबादी 10726बिरजिया जनजाति की आबादी 6276, कोरबा जनजाति की आबादी 5606, माल पहाड़िया जनजाति की जनसंख्या 135797पहाड़िया जनजाति की आबादी 25585, सौरिया पहाड़िया की आबादी 46222  सबर जनजाति की जनसंख्या 9698 है.

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वित वर्ष 17-18  में 19059.43  लाख का प्रावधान

केन्द्र की ओर से आदिम जनजाति के विकास योजना के संचालन के लिए वित्त वर्ष 2017-18  में कुल 19059.43 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. आंध्र प्रदेश 2076  लाख, बिहार 295.91  लाख, छत्तीसगढ़ 817. 50, लाखगुजरात 390.67 लाखकेरल 62 लाख, कर्नाटक 467 लाख , मध्य प्रदेश 5929.29 लाख, महाराष्ट्र 1265 .25 लाखमणिपुर 195 लाख उड़ीसा 548.31 लाख, राजस्थान 778.50 लाख, तमिलनाडु 1770 .75 लाखत्रिपुरा 1323.75 लाख, तेलंगाना 674 लाख, उत्तराखंड 130 लाखव पश्चिम बंगाल के लिए 330.75 लाख का प्रावधान किया गया है.

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