न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#3YrsOfDeMoDisaster: नोटबंदी को प्रियंका गांधी ने बताया आपदा, कहा- फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी

910

New Delhi: मोदी सरकार के पहले शासनकाल में हुए नोटबंदी के शुक्रवार को तीन साल पूरे हो गये. 8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने रात के आठ बजे देश में 500 और 1000 के नोट बंद किये जाने की घोषणा की थी.

सरकार के इस फैसले से हर कोई प्रभावित हुआ था. और 8 नवंबर की तारीख शायद ही कोई भूल पाये. 500 और एक हजार के नोट बंद करने के अपने फैसले से धीरे-धीरे दूरी बनाती दिखती है.

इसे भी पढ़ेंः#Ayodhya पर फैसले से पहले CJI रंजन गोगोई ने यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी को किया तलब

सरकार भले ही दावा करे कि नोटबंदी का कदम सही था, लेकिन इसकी सफलता को लेकर कोई पुख्ता आंकड़ा पेश करने में सरकार नाकाम रही है. वही नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर कांग्रेस ने एकबार फिर मोदी सरकार को घेरा है.

Trade Friends

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी एक ‘आपदा’ साबित हुई है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया.

नोटबंदी एक आपदा- प्रियंका

प्रियंका ने आठ नवंबर को नोटबंदी के तीन साल पूरे होने के मौके पर मोदी सरकार पर हमला बोला.

उन्होंने लिखा, “नोटबंदी को तीन साल हो गए. सरकार और इसके नीम-हक़ीमों द्वारा किए गए, ‘नोटबंदी सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए. नोटबंदी एक आपदा साबित हुई जिसने हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी. इस ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा?”

इसे भी पढ़ेंःबंगाल BJP अध्यक्ष के “दूध में सोना होने के” बयान पर गाय लेकर गोल्ड लोन लेने पहुंचा किसान

SGJ Jewellers

वित्तीय आपातकाल की ओर धकेल रही सरकार- पुनिया

वहीं कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने आरोप लगाया कि सरकार अपने गलत आर्थिक फैसलों के जरिये देश को “वित्तीय आपातकाल” की ओर धकेल रही है.

गुरूवार शाम को मीडिया को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीएल पुनिया ने कहा, “नोटबंदी का फैसला बगैर सोचे-समझे लिया गया था और इसके दुष्परिणाम देश आज भी भुगत रहा है. मोदी सरकार लगातार गलत आर्थिक फैसलों के जरिये देश को वित्तीय आपातकाल की ओर धकेल रही है.”

उन्होंने दावा किया कि सरकार देश के हितों से समझौता करते हुए क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के करार पर दस्तखत करने जा रही थी. लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के जोरदार विरोध के कारण उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े.

गौरतलब है कि नोटबंदी के मोदी सरकार के फैसले के बाद आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी. वहीं छोटे उद्योग-धंधों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा था. क्योंकि ये ज्याीदातर कैश में लेनदेन करते थे. और नोटबंदी के दौरान इन उद्योगों के लिए कैश की किल्लित हो गई. इसकी वजह से उनका कारोबार ठप पड़ गया. लोगों की नौकरियां भी गईं.

इसे भी पढ़ेंः#Bihar: अपनी ही सरकार पर घोटाले का आरोप, सड़क निर्माण में राशि गबन को लेकर BJP प्रदेश अध्यक्ष ने सीएम को लिखा पत्र

kanak_mandir

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like