Skip to content Skip to navigation

790 ट्रैफिक पुलिसकर्मी की जरूरत, हैं सिर्फ 292, तो क्यों ना हो राजधानी जाम

Chandi dutta jha  

Ranchi, 21 November: राजधानी रांची में ट्रैफिक व्यवस्था फेल होती नजर आ रही है. फिलहाल इससे लोगों को निजात मिलती नहीं दिख रही है. शहर के लाइफलान रातू रोड, मेन रोड, लालपुर, कांटा टोली और हरमू रोड लगभग हर रोज जाम रहते हैं. जाम से निबटने के लिए ट्रैफिक पुलिस के सारे इंतजाम फेल साबित हो रहे हैं. संकरी सड़कें, बेतरतीब पार्किंग, ट्रैफिक नियमों का उल्‍लंघन और वाहनों की बेतहाशा संख्‍या जाम की मुख्‍य वजहें हैं, जिस कारण शहर में आए दिन लोग जाम से परेशान हैं. वहीं ट्रैफिक पुलिस भी ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं. इसका कारण यह है कि करीब 13 लाख आबादी पर महज 292 ट्रैफिक सिपाही मौजूद हैं.

यह भी पढ़ेंः शराब दुकानों पर भीड़ और सड़क जाम से सरकार को फायदा होगा, बीजेपी सांसद महेश पोद्दार ने ली चुटकी

ट्रैफिक पुलिस के 790 पद हैं स्वीकृत

राजधानी रांची की वर्तमान जनसंख्या करीब 13 लाख है. इतनी बड़ी जनसंख्या के मुताबिक शहर में वाहन भी बहुत ज्यादा हैं. 13 लाख लोगों को संभालने के लिए सिर्फ 292 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं. इस हिसाब से लगभग 4452 लोगों पर एक ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाती है, जबकि स्वीकृत पद 790 को भी अगर भर दिया जाए, तब लगभग 1645 लोगों पर एक ट्रैफिक पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे. यानि विभाग में मैनपावर की काफी कमी है.

यह भी पढ़ेंः राजधानी की 21 ट्रैफिक सिग्नल लाइट में से 11 पड़े हैं खराब, सीटी और डंडे से ट्रैफिक को हांक रहे जवान

अधिकतर ट्रैफिक सिग्नल हैं खराब

ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए करोड़ों रूपये की लागत से रांची में 21 ट्रैफिक सिग्नल लगाये गये हैं. वर्तमान में शहर के 21 चौक-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं, लेकिन अधिकतर ट्रैफिक सिग्नल खराब हैं, कइयों का टाईमर सही नहीं है. ट्रैफिक सिग्नल के खराब होने से भी ट्रैफिक जाम की समस्या होती है. अगर ट्रैफिक सिग्नल सही रूप से काम करता तो शायद कुछ हद तक जाम की समस्या से राहत मिलती.

यह भी पढ़ेंः काफिला छोड़ एक वाहन लेकर निकलें मंत्री तो नहीं लगेगा जाम: मुख्यमंत्री

अवैध वाहनों का होता है परिचालन

राजधानी रांची में बिना परमिट के चलने वाले डीजल ऑटो की संख्‍या बहुत ज्‍यादा है. वहीं शहर में कई ई-रिक्शा अवैध रूप से चलाये जा रहे हैं. जहां-तहां इनके द्वारा यात्रियों को चढ़ाने-उतारने एवं खड़े रहने से जाम की समस्‍या रहती है. ये लोग निर्धारित पड़ाव पर वाहन को रोकने के बजाए जहां-तहां खड़ा कर देते हैं, जिससे जाम की समस्या पैदा होती है. वहीं रांचीवासियों में भी ट्रैफिक नियमों के प्रति सम्‍मान कम है. यहां मेयर से लेकर नेताओं तक में ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन की प्रवृति है और वो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से उलझ जाते हैं. इस पर एक बार मुख्‍यमंत्री तक को बयान देना पड़ा है कि, पुलिस किसी को भी न बख्‍शे.

यह भी पढ़ेंः अफसरों ने मेन रोड में दौड़ा दी 108 एंबुलेंस, लगा घंटों जाम, लोग हुए परेशान (देखें वीडियो)

रातू रोड से पिस्का मोड़ महज 3 किमी में 38 कट्स

शहर की सबसे घनी आबादी वाले रातू रोड में तीन किमी में 38 कट्स हैं. दोनों ओर घनी आबादी हैं. इन कट्स की वजह से रातू सुबह से शाम तक जाम रहता है. पीक आवर में किशोरी सिंह यादव चौक से पिस्‍का मोड़ तक की तीन किमी से भी कम दूरी तय करने में घंटे से भी ज्‍यादा समय लगना आम बात है. रातू रोड चार पहिया वाहनों के लिये एक दु:स्‍वप्‍न की तरह है. जबकि रांची से गुमला, डाल्‍टनगंज सहित छत्‍तीसगढ़ और मध्‍यप्रदेश जाने का रास्‍ता रातू रोड से होकर हीं है. इसी रोड में आगे आइटीआई बस स्‍टैण्‍ड भी है.

यह भी पढ़ेंः जरूरी ना हो तो घर से ना निकलें, पूरी राजधानी जाम

क्या कहते हैं ट्रैफिक एसपी

ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह कहते हैं कि ट्रैफिक व्‍यवस्‍था सुधार के लिए प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लोगों में भी पार्किंग सेंस की कमी है. वे कहीं भी वाहन पार्क कर देते हैं और ट्रैफिक नियमों का उल्‍लंघन करते हैं. ट्रैफिक व्यवस्था को ठीक रखने के लिए पुलिस के साथ-साथ आम लोगों का सहयोग भी आवश्यक है, तभी बेहतर सुधार हो सकता है.  

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Slide
City List: 
Share

Add new comment

loading...