Skip to content Skip to navigation

रांची स्टेशन पर दिव्यांग बच्चा छह सालों से मांग रहा भीख, अबतक सरकारी सुविधाओं से वंचित! (देखें वीडियो)

Md. Asghar Khan

Ranchi, 11 Octoebr: एक जिद है, जो सचिन दास को सितारों सी जिंदगी में ले जाएगी. अभी तो उसका व्हील रिक्शा खुद का है, तमन्ना कार की है. कई सालों से पैरों से मजबूर यह किशोर रांची रेलवे स्टेशन पर भीख मांग रहा है. जबकि चाहता है पैसा कमाना, हम जैसा ही विकास की रफ्तार में दौड़ना.

दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए बनी संस्थाओं की नजर सचिन पर क्यों नहीं पड़ती ?

दिव्यांगों के लिए काम करने वाली संस्थाएं और सरकारी अमले के लिए सचिन दास का घसीटना उनकी मंथर(सुस्त) गति को बताता है. वहीं बच्चों के लिए रेलवे स्टेशन पर संचालित सेंट्रल गवर्नमेंट चाइल्ड लाइन को भी इस बच्चे का रेंगना नजर नहीं आता है. उधर रांची में सरकारी अनुदान पर चल रही दीप शिखा नामकूम और बरियातु चेशायर होम जैसी संस्था की आंखे बंद हैं. हैरत नहीं होती आपको कि वे योजनाएं किस फाइल में गुम हैं, सचिन इन सुविधाओं से वंचित क्यों है.

दिव्यांग चेयर तक अपने पैसों से लेना पड़ा, लेकिन आज भी मदद की आस

16 वर्ष का सचिन पिछले सात सालों से रांची के रेलवे स्टेशन पर भिक्षा मांग, बड़े भाई सूरज को घर चलाने में सहायता करता आ रहा है. दूसरी तरफ आत्मर्निभर बनने के लिए आज भी उसने मदद की आस नहीं छोड़ी है. अपनी लड़खड़ती जुबान से सचिन कहता है, मांग-चांग वाली इस जिंदगी में जिना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन क्या करुं, परिवार के भरण-पोषण की चुनौतियों की चिंता के आगे बेबस हूं. कुछ पैसों की मदद हो जाए, तो छोटी सी दुकान खोल लूं. सचिन के परिवार में पिता सकलदेव दास आखं से मजबूर हैं, तो मां अक्सर बीमार रहती हैं. छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है. चुटिया स्थित किराए के मकान में रह रहे, इस किशोर को 1500 रुपये में व्हील चेयर तक खुद खरीदना पड़ा.

शहर में रहकर दर्जनों दिव्यांग योजनाओं से वंचित

देश में लगभग 7 करोड़ विकलांग हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों का नाम बदलकर दिव्यांग रखा, इनके लिए अलग मंत्रालय और कई सारे स्वावलंबी योजानाओं की शुरुआत की. इधर इनके कल्याण में एनजीओ और संस्थाएं भी अपनी सक्रीयता का दावा करती हैं. मगर 75 प्रतिशत डिसएबल्ड सचिन को देख ऐसा लगता है कि दिव्यांगजनों के लिए योजनाएं कागजों तक सिमटी हुई हैं. नहीं तो, राजधानी रांची के रेलवे स्टेशन जैसी जगह पर मांग कर गुजारा कर रहे सचिन, सरकार और संस्थाओं की आंखों से अबतक छुपे कैसे रह गये.

केंद्र और राज्य द्वारा संचालित योजनाएं

दिनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना, दिव्यांग लोन योजना, दिव्यांग कल्याणकारी योजना, दिशा (प्ररांभिक हस्तक्षेप और स्कूल चलो अभियान योजना), विकास योजना, व्यस्कों के लिए सामुहिक घर योजना, बढ़ते कदम योजना, स्वास्थ बीमा योजना, स्वरोजगार योजना, विवेकानंद स्वालंबन योजना आदि हैं. जबकि सचिन का अभी तक युनिवर्सल आइडी कार्ड भी नहीं बन पाया. इस कार्ड के तहत दिव्यांग जन देश के किसी भी कोने में रहकर सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं.

निश्चित ही सचिन तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगाः राज्य निःशक्तता आयुक्त

राज्य निःशक्तता आयुक्त शतीश चंद्रा ने कहा, इस बच्चे पर जल्द ही संज्ञान लिया जायेगा. अगर उसके पास दिव्यांग्ता प्रमाणपत्र है, तो निश्चित रुप से केंद्र और राज्य के द्वारा चलाई जा रही स्वावलंबी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जायेगा.

आंख मूंद कर बैठी है संस्था

स्टेशन पर आते जाते लोगों की नजर उसे भीख देकर अपना पीछा छुड़ाने के लिए रोज पड़ती है. लेकिन स्टेशन स्थित केंद्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन की आंखें पिछले छह साल से भीख मांग रहे इस बच्चे पर क्यों नहीं पड़ी. यह वह संस्था है, जिसका काम ही ऐसे बच्चों की मदद करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है.

Lead
City List: 
Share

Add new comment

loading...