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बोकारोः दो सालों में सेल चालू नहीं कर सकी कोल माइंस

News Wing

Bokaro 13 october : जिले के चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर गांव में इलेक्ट्रो स्टील कंपनी की ओर से बनाए गए कोल माइंस को दो साल पहले भारत सरकार की ओर से छीन लिया गया था. जो कि अब फिर से सेल को दे दी गई है.

क्या है मामला

बता दें कि कोल माइंस को भारत सरकार की ओर से छीन लेने के बाद उस माइंस की रखरखाव की जिम्मेवारी बीसीसीएल को दी गई थी. बीसीसीएल ने इसको फिर से सेल के हवाले कर दिया. अब सेल ना तो इस माइंस से उत्पन्न कोयले का उत्पादन कर रहा है और ना ही इस माइंस के रखरखाव के लिए कोई उचित व्यवस्था कर रहा है. हांलाकि मेंटेनेंस के नाम पर सेल ने कई ठेका मजदूरों को माइंस में नौकरी दे रखा है जो माइंस को मेंटेन करने का काम दो सालों से कर रहे हैं. सेल को कोयले का माइंस इलेक्ट्रोस्टील के बंद पड़ी खदान से कोयला के उत्पादन के लिए दिया गया था.

लोगों को है कोल माइंस खुलने का इंतजार

चंदनकियारी के पर्वतपुर तालगढ़िया, फतेहपुर, पड़वा आदि आसपास के ग्रामीणों को कोल माइंस  खुलने का इंतजार है. लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रो स्टील कंपनी की ओर से केवल का उत्पादन किया जाता था. उस वक्त करीब 2000 से अधिक मजदूर माइंस में काम करते थे. आस-पास में के गांव की लोगों को रोजगार मिला हुआ था. लेकिन इलेक्ट्रो स्टील कंपनी ने जब कोल माइंस को बीसीसीएल के हवाले कर दिया और बीसीसीएल में सेल के हवाले कर दिया तब लोगों को दोबारा उम्मीद जगी की सेल भारत सरकार की कंपनी है और अब कोयले का उत्पादन सेल की ओर से किया जाएगा. तो लोगों को उचित मजदूरी और हर तरह की सुविधाएं भी मिलेगी. लेकिन दो साल बीतने को है. सेल की ओर से कोयले के उत्पादन के लिए अब तक कोई ठोस पहल ने किया गया. जिसके कारण माइंस के आस-पास के इलाकों में सन्नाटा पसरा रहता है. लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रो स्टील कंपनी ने सिर्फ और सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए यहां से कोयले का उत्पादन करती रही. इस तरह सेल से लोगों को भारी उम्मीदें हैं लेकिन अब पूरा होता दिख नहीं रहा है.

इलेक्ट्रो स्टील कंपनी ने कोयले का किया दुरुपयोग

इलेक्ट्रो स्टील कंपनी को भारत सरकार की कोल मंत्रालय की ओर से पर्वतपुर के पास कोयले का माइंस इसलिए उपलब्ध कराया गया था ताकि पर्वतपुर से कोयला निकालकर सियाल जोरी के स्टील कंपनी में इसका उपयोग किया जा सके. लेकिन कंपनी ने स्टील उत्पादन से पूर्व ही भारी मात्रा में यहां से कोयले का उत्पादन कर बाजारों में  बेचने का काम करती रही. कंपनी की ओर से कोयला उत्पादन कर सिर्फ मुनाफा कमाने का काम किया गया. इसके बाद केंद्र में 2014 में जब नई सरकार सत्ता में आई उसके बाद कोलगेट घोटाला उजागर होना शुरू हुआ और कोलगेट घोटाला के बाद इलेक्ट्रोस्टील कंपनी से भारत सरकार ने माइंस ले लिया.  

अब भी है माइंस में भारी मात्रा में कोयला

पर्वतपुर के कोल ब्लाक में अब भी भारी मात्रा में कोयले का भंडार है. जिस कोयले का उपयोग सेल के विभिन्न इकाइयों में की जा सकती है .पर्वतपुर के आसपास के इलाकों में इलेक्ट्रो स्टील कंपनी की ओर से दो कास्ट और चार इन माइंस का निर्माण किया गया था. साथ ही बगल में एक कोयले का छोटा वासरी भी बनाया गया है. जिस कारण कोयला उत्पादन कर उसका वाशिंग भी वहीं पर करने की सुविधा थी. सेल के कोई भी अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि आखिर दो सालों में सेल कोयले के उत्पादन की दिशा में कोई पहल क्यों नहीं कर रही है. जबकि यहां से कुछ ही दूर पर तेल का अपना कोल माइंस चासनाला में चलता है. जहां से हर दिन सेल करीब एक रैक कोयला बोकारो स्टील प्लांट लाती है.

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