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बोकारो: वीरान पड़ी बांधगोड़ा और सतनपुर पहाड़ी में लौटी रौनक, वर्ष 2006 से ग्रामीणों की टीम ने मिल कर किया काम(देखें वीडियो)

News Wing

Bokaro, 21 October: वीरान हो चुकी चास वन क्षेत्र के बांधगोड़ा और सतनपुर पहाड़ी की हरियाली डेढ़ दशक के बाद वापस लौटने लगी है. इसका श्रेय पहाड़ी के आसपास बसे गांव के ग्रामीणों को जाता है. इस पहाड़ी पर डेढ़ दशक पूर्व सिर्फ पेड़ों के ठूठ पाए जाते थे, अब वह ठूठ पेड़ के रूप में तब्दील हो चुके हैं. जो अब पहाड़ी में हरियाली के रूप में दिखने लगी है. साथ ही उसमें पशु पक्षियों का डेरा भी बन गया हैं.

काफी मात्रा में हो गए है कीमती पेड़

पहाड़ी पर अब काफी मात्रा में कीमती पेड़ हो गये है, जिसमें शीशम, सखुआ, सागवान के अलावे कई तरह के ऐसे पेड़ दिखने लगे हैं, जो पेड़ इस पहाड़ी से गायब हो चुके थे. अब तो पहाड़ी की जमीन भी नहीं दिखती. पहले यहां चारों तरफ पहाड़ी की पथरीली मिट्टी और पत्थर ही दिखते थे. ग्रामिणों का साझा प्रयास रंग लाया. डेढ़ सौ एकड़ में फैला यह जंगल आसपास के गांव के लोगों को शुद्ध हवा मुहैया करा रही है, बल्कि बोकारो शहर में रहने वाले लोगों को भी अब यह जंगल सुकून देने लगा है. एक तरह से पर्यटक स्थल भी  बन चुका है.

वर्ष 2006 से शुरू हुआ जंगल बचाने का अभियान

वर्ष 2006 से ग्रामीणों ने जंगल बचाने की मुहिम शुरू की और देखते ही देखते बांधगोड़ा और सतनपूर की पहाड़ी में पौधे तैयार होने लगे. यहां के लोगों को प्रारंभ के दिनों में भू-माफियाओं का सामना भी करना पड़ा. क्योंकि पहाड़ी के आसपास की जमीन को लगातार भू-माफिया कब्जा कर बेचने का खेल खेल रहे थे. जिसमें स्थानीय प्रशासन के अधिकारी से लेकर कर्मचारी भी मिले हुए थे. जिसका पर्दाफाश उन दिनों ग्रामीणों ने किया. अब यह जंगल पूरी तरह से भू माफियाओं से मुक्त हो गया है.

जंगल बचाने में लगी है ग्रामीणों की टीम

जंगल को बचाने की मुहिम में सामाजिक कार्यकर्ता योगो पूर्ति, राम दयाल सिंह, रामलाल सोरेन, विजय घटवार, कल्याणी सिंह, पंचू सिंह, हेमू टूडू, नागर मांझी, भीषम बाउरी का सराहनीय योगदान रहा है. टीम के संयोजक योगो पूर्ति बताते हैं कि शुरू के दिनों में जब भू-माफिया इस जंगल को लगातार नुकसान पहुंचा रहे थे. तो लोगों की एक टीम बनी और वो टीम लगातार इस जंगल की सुरक्षा में तैनात रही. जिस का परिणाम डेढ़ दशक के बाद अब लोगों को दिखने लगा है. जिला प्रशासन और वन विभाग का शुरू में सहयोग नहीं मिला. लेकिन काम को देखने के बाद और कई तरह के पत्राचारों के बाद हाल के दिनों में वन विभाग के अधिकारियों ने वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया. उसके बाद लोगों को एक नई दिशा मिली. ग्रामिणों का मानना है कि वन विभाग अगर थोड़ा सक्रिय रहे, तो यह जंगल पूरी तरह से आबाद हो सकता है. अभी सतनपूर और बांधगोडा की पहाड़ी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पहाड़ी पर बना दो टावर

दोनों पहाड़ी पर बना टावर लोगों को कर रहा आकर्षित प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पहाड़ी पर बना दो टावर, जो इस पहाड़ी की खूबसूरती को काफी बढ़ाता है. हलाकि रखरखाव के अभाव में यह दोनों टावर जर्जर हो चुका है. बोकारो शहर के दक्षिण दिशा में स्थित बांधगोडा की पहाड़ी लोगों के बीच शुरू से आकर्षण का केंद्र रही है. अब जैसे- जैसे जंगल बढ़ रहा है. लोगों को और ज्यादा आकर्षित कर रहा है.

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Yogi purti Ji ek jaberdast samajik karyekarta hai samaj me inki ek also pahchan hai AASAS school ke dwara garib baccho ko acchi sikksha pradan bahut Dino se karte as Rahe hai inki or inke puri terms ko hardik badhai

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