Skip to content Skip to navigation

ब्रदर्स एकेडमी का उत्कृष्ट प्रदर्शन, छह सालों में सैकड़ों छात्रों को भेजा IIT

News Wing

Ranchi, 09 October

- तीन शिक्षकों से शुरू हुआ संस्थान फहरा रहा सफलता का परचम 

- आज 22 शिक्षक 500 से अधिक छात्रों को करा रहे तकनीकी संस्थानों में 


प्रवेश की तैयारी

ब्रदर्स एकेडमी राजधानी में इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच जाना पहचाना नाम है. इस वर्ष यहां के 107 बच्चों ने JEE एडवांस्ड क्लियर किया है. इसके बाद से यह संस्थान आइआइटी एवं मेडिकल की तैयारी के लिए छात्रों एवं अभिभावकों के बीच काफी प्रचलित है. वर्तमान में बच्चों की मांग को देखते हुए संस्थान ने एक सेंटर हिनू स्थित आइलेक्स सिनेमा के पास खोला है ताकि राजधानी के बच्चों को तकनीकी संस्थान के लिए बेहतर तैयारी का लाभ दिया जा सके. वर्तमान में यहां हर रोज हजारों छात्रों को तकनीकी संस्थानों में प्रवेश के लिए तैयारी करायी जाती  है. 

ब्रदर्स एकेडमी का गौरवशाली इतिहास 

ब्रदर्स एकेडमी की स्थापना 13 दिसंबर 2011 में हुई. उस वक़्त संस्थान में केवल तीन शिक्षक पारस अग्रवाल, शुवेंदु शेखर एवं प्रेम प्रसुन थे. शुरुवाती दौर में यहां छात्रों की संख्या काफी कम थी. लगभग चार सौ बच्चों से इस संस्थान की शुरुआत की गयी. संस्थान ने रांची के लोगों को उस समय हैरत में डाल दिया जब यहां का एक बच्चा शशि प्रकाश आइआइटी प्रवेश परीक्षा में सीटी टॉपर बना. इसके बाद हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में छात्रों का चयन आइआइटी एवं मेडिकल में होता रहा है. वर्तमान में 22 शिक्षक इस संस्थान में हैं. अधिकांश आइआइटी, बीआइटी, एनआईटी तथा अन्य रेपुटेड संस्थानों से बीटेक डिग्री के साथ पासआउट हैं. ये शिक्षक सैकड़ों  छात्रों को देश के बेहतरीन तकनीकी संस्थानों में प्रवेश की तैयारी कराते हैं. 

आइआइटी धनबाद के छात्र हैं पारस अग्रवाल 

ब्रदर्स एकेडमी के संस्थापक पारस अग्रवाल आइएसएम धनबाद के छात्र रहे हैं (वर्तमान में इसका नाम आइआइटी धनबाद) है. उन्होंने लाखों की नौकरी छोड़कर ब्रदर्स एकेडमी खोलने का निर्णय लिया. भौतिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में संस्थान के बच्चों को पढ़ाते हैं. पारस अग्रवाल ने न्यूज विंग को बातया कि शिक्षा प्रदान करने से बेहतर कार्य कोई नहीं. शिक्षा के प्रसार के लिए शैक्षिक योग्यता अधिक मायने नहीं रखती है बल्कि शिक्षक का छात्रों के प्रति समर्पण महत्व रखता है. समय और विषय वस्तु पर पकड़ ही शिक्षक को छात्रों को जोड़ता है और सफलता का मुकाम दिलाता है. 

City List: 
Share

Add new comment

loading...