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स्वच्छता की मिसाल हैं 62 वर्षीय रामनारायण, गंदगी फैलाने वालों को सीखने की जरूरत (देखें वीडियो)

Md. Asghar Khan

अपना घर ही नहीं सड़क-नालियों को भी खुद करते हैं साफ

Ranchi, 18 November: "ब्लड प्रेशर और सुगर तो है हीं, इधर कई दिनों से बीमार भी चल रहे हैं. समझाते, बिगड़ते भी हैं, लेकिन सूर्योदय होते ही हाथ में झाड़ू पकड़ सड़कों की सफाई करने निकल जाते हैं"  ये बात रामनरायण प्रसाद के बारे में उनकी पत्नी रमावती देवी कहती हैं. पिछले साल ही नगर विकास एवं विभाग आवास से रिटायर्ड हुए रामनरायण 62 वर्ष की उम्र में भी रोज-सूबह पांच सौ मीटर तक सड़क से कुड़े बटोरना नहीं भूलते. बात बरसात की हो या पूस के ठंड की बस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को साकार करने निकल ही जाते हैं. वह फिलहाल रांची के बसाड़गढ़ के ओमप्रकाश नगर में अपना घर बनाकर पिछले पांच साल से रह रहे हैं. लेकिन इससे पहले बिरसा चौक के पास गेमन इंडिया रोड में नौ साल तक किराए के मकान में रहे, जहां उन्हें सड़कों और नालियों की सफाई करते देख हर कोई रुक जाता था. पास में ही रहने वाले एक अधिवक्ता, रामनरायण से काफी प्रभावित हुए और इसकी सूचना अखबार को दी, जिससे उन्हें सुर्खियां मिलीं.

स्कूल से ही सफाई करते आ रहे हैं

न्यूजविंग से बातचीत में रामनरायण बताते हैं कि जब पांचवीं का छात्र था, तभी से क्लास और मुहल्ले की सड़क-नाली अकेले ही साफ करता था. बिहार आरा के कोलवर थाना के रहने वाले रामनरायण नौकरी के दौरान जहां कहीं भी रहे, वहां उन्होंने आस-पास की सड़कों की सफाई का बीड़ा उठाए रखा. पहले कचरे को इकक्ठा करना और फिर उसे कंधे पर उठाकर दूर कहीं फेकने तक का काम अकेले ही करते हैं. 'आपके के ऐसा करने से कितना बदलाव आया' के सवाल पर बुजुर्ग रामनरायण कहते हैं कि लोगों की अलग-अलग मानसिकता होती है. कोई गंदे में रहना चाहता, तो कोई साफ-सुथरा रहना. मैं तो ऐसा वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शारीरिक फिटनेस के लिए करता हूं. आस-पास का इलाका स्वच्छ रहेगा, तो हवा भी स्वच्छ मिलेगी. तकलीफ सिर्फ इस बात की होती है कि लोग मदद करने के बजाय अपना कचरा तक दरवाजे पर ही फेंक देते हैं. रामनरायण स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि इससे लोगों में सफाई के प्रति जागरुकता आई है. इस अभियान को बहुत पहले शुरु करना चाहिए था.

 उनके सराहनीय कार्यों को देख खुद पर शर्मिंदा हैं पड़ोसी

रामनरायण प्रसाद के पड़ोसी राजेश कुमर सिंह, मनोज मिश्रा, पवन पांडे, संतोष शर्मा कहते हैं कि चाचा हमलोगों के लिए एक मिसाल हैं. जबसे वह यहां घर बनाकर रह रहे हैं, सड़कें और नालियां चकाचक रहती हैं. हर रोज चाचा दो-तीन घंटा आसपास के कुड़े, कचरे को साफ करते हैं. उन्हें देख हमलोगों को खुद पर शर्मिंदगी महसूस होती है. वहीं रामनरायण की पत्नी उनके इस काम से काफी गुस्से में रहती हैं. क्योंकि इसके चक्कर में रामनरायण कभी भी समय पर नाश्ता नहीं करते. परिवार में दो बेटे विद्यासगार और रमानंद सागर हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं.

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