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झारखंड गठन का झूठा दावा करती है झामुमोः भाजपा

NEWS WING

Ranchi, 14 November: झामुमो की आदत घड़ीयाली आंसू बहाने की हो गयी है. जिस वक्त राज्य के गठन का महोत्सव मनाना चाहिए था. दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर विकास के लिए प्रयास किया जाना था, उस वक्त झामुमो धरना और प्रदर्शन कर रही है. इसी से जाहिर होता है कि झामुमो झारखंड का कितना विकास चाहती है. बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश इन बातों को मीडिया के सामने रख रहे थे. उन्होंने कहा इतिहास गवाह है कि झामुमो ने हमेशा झारखंड को दूसरी पार्टी की झोली में डालने का काम किया है. ये दावा करते हैं कि झारखंड गठन में अहम भूमिका रही है. लेकिन ऐसा है नहीं. जब से झारखंड राज्य के गठन के लिए आंदोलन और प्रयास हो रहा है उस वक्त झामुमो का कहीं नाम और निशान नहीं था.

1912 से ही हो रहा है झारखंड के लिए आंदोलन

प्रदेश महामंत्री ने कहा कि झारखंड के लिए आज से नहीं बल्कि 1912 से ही आंदोलन हो रहा है. 1928 में ही साइमन कमीशन को अलग राज्य झारखंड के लिए आवेदन दिया गया था. इसके बाद कई बार झारखंड के लिए आवाज उठती रही. वहीं झामुमो का गठन 1973 में हुआ. दीपक प्रकाश ने बताया कि 1988 आगरा के अधिवेशन में ही बीजेपी ने झारखंड अलग के लिए आह्वन कर दिया था. कहाः झामुमो ने भी आंदोलन किया. लेकिन, उनका आंदोलन सीमित समाज को लेकर था. बीजेपी ने हमेशा से ही सार्वजनिक आंदोलन किया है.

झामुमो ने की कई बार झारखंड को बेचने को कोशिश     

दीपक प्रकाश ने कहा कि 28 जुलाई 1993 को नरसिम्हा राव की अल्पमत सरकार को बचाने के लिए झामुमो के चार सांसदों ने झारखंड को बेचने का काम किया. 17 जून 1993 को यह साबित हो गया कि झामुमो के नेताओं के खाते में करोड़ों रुपए आए. लालू और कांग्रेस को कई बार झारखंड को बेच दिया झामुमो ने. कहाः जब भी सत्ता सुख झामुमो को मिली. उन्होंने परिवार हित में काम किया ना कि राज्य हित में. प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता प्रत्युल शाहदेव और प्रवीण प्रभाकर भी मौजूद थे.  

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