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कभी दूसरों के घर में बर्तन मांजकर जीवन यापन करती थी कलावती, आज हैं तीरंदाज केंद्र में कोच

मनीष झा की स्टोरी

NEWSWING

Ranchi, 01 November : रांची के ग्रामीण क्षेत्र सिल्ली से निकलकर सफलता की राह पकड़ने वाली तीरंदाज कलावती की कहानी बहुत कुछ सिखाती है. उनकी इस कहानी में हार ना मानने का जज्बा, समाज में साकारात्मक बदलाव लाने का जुनून और बहुत कुछ है. कलावती के बारे में कहा जाता है कि जब वह 12 महीने की थी तो माता-पिता का साया उससे छिन गया. रिश्तेदार भी बेगाने हो गये. लेकिन समाज के लोगों ने उसे थाम लिया. कलावती का पालन-पोषण उसके चाचा-चाची ने किया. अब कलावती समाज व देश के तीरंदाजों की बेहतरी के लिये छात्र और छात्राओं को तैयार कर रही है. छत्तीसगढ़ सरकार में बतौर तीरंदाज कोच उसकी बहाली हुई है. उक्त बातों की जानकारी स्वयं कलावती ने न्यूज विंग के सवांददाता मनीष कुमार झा से खास बातचीत के दौरान दी.

दूसरों के घर बर्तन मांजकर करती थी जीवन यापन

हम ऐसा कह सकते हैं कि तीरंदाज कलावती की पूरी जिंदगी ही संघर्ष का दूसरा नाम है. अपने हालातों से जूझते हुए कलावती आज की तारीख में देश और राज्य के लिये गोल्ड मेडल जितने वाले तीरंदाज तैयार कर रही है. एक समय था, जब सिल्ली के इलाके में दूसरों के घर वह  बर्तन मांजने का काम करती थी. लेकिन उसके सपनों ने उसे टूटने नहीं दिया और हिम्मत के साथ आगे बढ़ते रहने का हौसला दिया. कलावती ने संघर्ष करते हुए अपनी तीरंदाजी को पूरा किया. वहीं अब तीरंदाजों का कोच बन सफलता का परचम लहरा रही है.

कलावती की तीरंदाजी में कौशल असाधरण

फिलहाल कलावती छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दंतेवाड़ा जिला में संचालित तीरंदाज  केंद्र में बतौर कोच नियुक्ति हुई हैं. वहीं अगर उनके प्रशिक्षण के बारे में बात करें तो शिशिर महतो बिरसा मुंडा आर्चरी एकेडमी में 2010 से ही वह तीरंदाज का प्रशिक्षण लेती रही है. कलावती का कहना है कि जब वह सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी तभी से उन्हें किसी भी चीज पर निशाना लगाने में मजा आता था. जिसके बाद कलावती के स्कूल के एक शिक्षक ने उसे बहुत प्रोत्साहित किया और उनके लोगों के सामने उनके तीरंदाजी की काफी तारीफ भी की. जिसके बाद सिल्ली के लोकल प्रशासन द्वारा तीरंदाजी ट्रायल का आयोजन किया गया. जिसमें  कलावती ने प्रतिभागी के रूप में भाग लिया और बिरसा मुंडा आर्चरी एकेडमी के लिये उनका सेलेक्शन हो गया.

सुदेश महतो की अहम रही भूमिका

तीरंदाजी में कलावती की जिज्ञासा को देखते हुए उसे सिल्ली के बिरसा मुंडा तीरंदाजी केंद्र में शामिल किया गया. आर्चरी के संरक्षक सुदेश महतो ने भी किसी भी प्रकार की संसाधन की कमी नहीं होने दी. इंडियन राउंड ट्रेडिशनल एवं जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में भी उसका बेहतरीन प्रदर्शन रहा.

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