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झारखंड में सखी मंडल स्मार्टफोन योजना फेल, ना चलाने की ट्रेनिंग मिली ना सिम कार्ड

News Wing Ranchi, 15 October: झारखंड सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का महज चंद महीनों में क्या हश्र होता है यह जानना है तो सखी मंडल स्मार्टफोन योजना को देख लें. इसे देखने के बाद पता चल जायेगा कि कैसे करोड़ों रुपये का सरकार ने दुरुपयोग कर दिया. बगैर किसी तैयारी के करोड़ों रुपये के स्मार्टफोन सरकार ने सखी मंडलों को बांट दिये.

न्यूज विंग ने जब पड़ताल की तब पता चला कि यह स्मार्टफोन तो गांव की भोली-भाली महिलाओं के किसी काम का ही नहीं रहा. जिन गांवों में घंटों बिजली नहीं रहती, जहां महिलाएं ढंग से साक्षर नहीं हैं वहां सरकार ने बिना पुख्ता तैयारी के महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाने की कवायद शुरू कर दी. अब हालत यह है कि पूरे राज्य के सखी मंडल की महिलाएं इस सरकारी झुनझने से काफी त्रस्त हैं.

साहिबगंज में 95 सखी मंडलों में से ज्यादातर सखी मंडलों का फोन बेकार

साहिबगंज के सदर प्रखंड के रामपुर पंचायत के संकरी गली गांव के समदा सीज़ पंचायत में कुल 95 सखी मंडली के ग्रुप लीडर को कार्बन कम्पनी के स्मार्ट फोन दिये गये हैं. सरस्वती आजीविका महिला सखी मंडली की ग्रुप लीडर निभा देवी ने कहा कि स्मार्ट फोन मिल तो गया है,लेकिन इसका उपयोग वो नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि आज तक सिम कार्ड दिया ही नहीं गया है. स्मार्टफोन से करना क्या है, यह भी बताया नहीं गया है.

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अभी भी डब्बे की शोभा बढ़ा रहा है मोबाइल

इसी पंचायत के शंकर आजीविका सखी मंडली की ग्रुप लीडर अनीता एक्का को भी स्मार्टफोन मिला था, लेकिन आज तक वो मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर पायी हैं. उन्हें मोबाइल तो मिला, सिम कार्ड नहीं मिला. इसके कारण स्मार्टफोन अब भी डब्बे में पड़ा हुआ है.

डब्बे से निकाल कर भी क्या करेंगे मोबाइल..?

शिवगंगा आजीविका के सुगरी देवी और लक्ष्मी आजीविका सखी मंडल की पिंकी देवी ने भी यही कहा कि उन्हें मोबाइल तो मिला, लेकिन सिम कार्ड नहीं दिया. इस कारण मोबाइल डब्बे में ही पड़ा है और डब्बे से मोबाइल को निकाल कर भी वे क्या करेंगी. इस्तेमाल करने की जानकारी ही नहीं दी गयी है.

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सिम के अभाव में यूज़ नहीं हो पा रहे स्मार्टफोन

समदा सीज़ पंचायत में कुल सात गांव हैं, जिसमें हाथीगढ़, सकरी गली, समदा नाला, समदा रामपुर, गोपालपूर और अम्बाडीह आता है. इन सभी पंचायतों के सखी मंडलों के ग्रुप लीडर को स्मार्टफोन दिये गये हैं, जो बगैर सिम के किसी काम के नहीं. सखी मंडली समूह में शामिल ज्योत्सना देवी, टुबो देवी, बसंती देवी, अंजलि देवी, लखी देवी, माला देवी और सकुन देवी भी सिम के अभाव में मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं.

क्या कहते हैं एनएससीपीएल कर्मचारी

गांवों में समूह का निर्माण कर सखी मंडली का गठन करवाने वाले एनएससीपीएल  के कर्मचारी प्रमोद कुमार रजक ने बताया की उन्होंने 95 मोबाइल सखी मंडली समूह को दिये हैं, लेकिन सिम कार्ड अभी तक नहीं मिला है. इसलिए महिलाएं इसका उपयोग नहीं कर पा रही हैं.

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हमेशा बना रहता है फोन के फटने का डर 

गोड्डा के पत्थरगामा ब्लॉक के जोबाबहा महिला मंडल की मेरी को भी स्मार्टफोन मिला था. मेरी को एक महीने पहले फोन दिया गया. उन्होंने बताया कि उनके स्मार्टफोन में कई सुविधाएं हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि फोन बहुत जल्द गर्म हो जाता है. हमेशा फोन के फटने का डर बना रहता है. इसलिए अभी तक फोन को ठीक से इस्तेमाल करना नहीं सीख पायी हैं. बस फोन से कॉल लगाना और फोनबुक से नंबर निकालना ही आता है.

कैलकुलेटर की तरह यूज हो रहा मोबाइल

गोड्डा जिला के धरनगी गांव की सोना मोनी  को मोबाइल तो मिला लेकिन इस्तेमाल करना नहीं सिखाया गया. वह बताती हैं कि वो अब तक फ़ोन से कैलकुलेटर यूज़ करना ही सीख पायी हैं. धीरे-धीरे दूसरे फीचर्स भी सीखने की कोशिश कर रही हैं. मोबाइल के बैटरी बैकअप को लेकर उनकी भी शिकायत है. उनका कहना है कि मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करतीं, फिर भी बहुत जल्द बैटरी खत्म हो जाता है.

महज 2 से तीन घंटे चलती है बैटरी

हजारीबाग के खुटरा पंचायत के 11 सदस्यीय दीप महिला समूह को भी एक स्मार्टफोन मिला है. पार्वती देवी को 15 दिन पहले मोबाइल मिला है. उनकी शिकायत यह है कि मोबाइल का बैटरी महज दो से तीन घंटा ही चलता है. उपर से मोबाइल का स्क्रीन भी ठीक से काम नहीं करता है.

एक दिन में दो बार करना पड़ता है मोबाइल चार्ज

रामगढ़ जिला के मांडू के गोविंदपुर गांव में भी स्मार्टफोन झुनझुना साबित हुआ है. यहां के संगम आजीविका  महिला समूह की अध्य्क्ष रेणु देवी ने बताया कि  करीब एक महीने पहले उन्हें कार्बन कंपनी का फ़ोन दिया गया था, लेकिन अब तक सिम कार्ड नहीं मिला, ना ही ट्रेनिंग हुई.  खुद से ही एक सिम लगावाया है, लेकिन फ़ोन का बैटरी बैकअप बहुत कम है. एक दिन में ही दो बार चार्ज करने की जरूरत पड़ती है.

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