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कब बढ़ेगी महिला जजों की संख्या, रूढ़िवादी सोच को तो नहीं झलका रहे ये आंकड़े

Manjusha Bhardwaj

सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक सभी जगह न्याय की देवी की मूर्ति होती है लेकिन अगर हम कोर्ट में महिला जजों की संख्या पर गौर करें तो यहां उनकी संख्या बहुत कम है. यह बात आंकड़ों से साफ होती नजर आती है. आज हर क्षेत्र में महिलाएं अपना लोहा मनवा रही हैं. वहीं न्याय के क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति इतनी कम होना विचार का विषय है. भारत में न्यायाकि क्षेत्र को परंपरागत रूप से पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है. शायद इसी वजह से महिलाओं की इतनी कम संख्या होने पर भी इस बारे में ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक महिला जजों की संख्या बहुत कम है. इस बात की सच्चाई सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में साफ तौर पर देखी जा सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट में 25 जज कार्यरत हैं. इनमें जस्टिस आर भानुमति ही मात्र एक महिला जज हैं. वहीं अगर हाई कोर्ट की बात करें तो देश भर के 24 हाईकोर्ट में कुल 692 जज हैं. जिनमें महिला जजों की संख्या मात्र 70 है. अब आंकड़ों पर अगर ध्यान दिया जाए तो महिला जजों की संख्या पुरुष जजों के मुकाबले मात्र 10 प्रतिशत ही है.  

वहीं, उच्चतम न्यायालय से लेकर स्थानीय अदालतों तक देश में इस समय कुल 4704 महिला जजों की नियुक्ति है. यह कुल जजों की संख्या का मात्र 28 फीसद है. इस वक्त सुप्रीम कोर्ट से निचली अदालतों तक कुल जजों की संख्या 17,160 है.

महिला जजों की नियुक्ति के मामले में कई राज्य पीछे

कानून मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में पिछले तीन सालों में किसी भी महिला जज की नियुक्ति नहीं की गयी है. निचली अदालतों में जज के रूप में महिलाओं की नियुक्ति के मामले में झारखंड, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व हिमाचल प्रदेश बहुत पीछे है. यहां महिला जजों की संख्या मात्र 10 से 15 प्रतिशत ही रही है.

क्या है झारखंड और बिहार का हाल

अब अगर झारखंड की बात करें तो यहां कुल जजों की संख्या 448 है जिसमें महिला जजों की संख्या मात्र 62 है. अगर महिला जजों की झारखंड में प्रतिशत देखी जाए तो यह महज 13.83 प्रतिशत ही है. वहीं यहां महिला जजों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण भी दिया गया है. लेकिन फिर भी यह आंकड़े पुरुषों के मुकाबले काफी कम हैं. उधर बिहार में कुल जजों की संख्या 1002 है जिसमें 99 महिला जज शामिल हैं. यानी कुल संख्या के मुकाबले 9.88 प्रतिशत ही है. वहीं बिहार में महिला जजों को सबसे ज्यादा आरक्षण है जो कि 35 प्रतिशत है.

मुंबई हाईकोर्ट में हैं सबसे ज्याद महिला जज

बॉम्बे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में मंजुला चेल्लूर की नियुक्ति की गई. वह पिछले साल 22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश नियुक्त की गईं. बॉम्बे हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा महिला जज हैं. यहां 73 जज हैं जिनमें कुल 12 महिला जज हैं.

दिल्ली में महिला जजों के लिए नहीं है आरक्षण

दिल्ली की बात करें तो यहां कुल जजों की संख्या 489 है जिनमें महिला जजों की संख्या 170 है. वहीं दिल्ली में महिलाओं के लिए किसी तरह का कोई आरक्षण नहीं है.

मद्रास में कुल छह महिला जज

मद्रास हाई कोर्ट में महिला जजों का संख्या बढ़कर छह हो गयी. दूसरी ओर यहां पुरुष न्यायाधीशों की संख्या 53 है.

राजस्थान व इलाहाबाद में भी महिला जजों की संख्या कम

राजस्थान हाईकोर्ट में कुल 36 जज हैं, जिसमें 2 महिला जज हैं. वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुल 110 जज हैं जिनमें महिला जजों की संख्या मात्र छह है. कम और ज्यादा यही हालात देश के बाकी हाईकोर्ट का भी है.

जेंडर बायस्ड केस में महिलाओं की भागीदारी हो सकती है खास

महिला जजों की संख्या और भी होनी चाहिए क्योंकि उनके सोचने और समझने का तरीका पुरुषों के मुकाबले अलग होता है. खासकर जो जेंडर बायस्ड केस आते हैं उनमें उनकी भागीदारी बहुत ज्यादा हो सकती है.

महिला जजों की संख्या कम होना कहीं रुढ़िवादीता को तो नहीं झलका रहा

महिला जजों की संख्या कम होना क्या हमारे समाज की रुढ़िवादिता को झलका रही है. समाज बढ़ रहा है, देश तरक्की कर रहा है लेकिन अभी भी लगता है कि लोग कहीं ना कहीं उसी मानसिकता से चल रहे हैं जैसा वो आज से 20-25 साल पहले चला करते थे. जब तक यह मानसिकता नहीं बदलेगी, जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेगी कि हमें महिलाओं आगे लाना चाहिए. उसके लिए खुलकर समर्थन भी देना होगा तब तक शायद यह मुमकिन नहीं हो पायेगा. हम आजादी से लेकर आज तक बस समानता की बातें ही करते आए हैं कि यहां सब एक बराबर हैं. महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं लेकिन धरातल पर यह बातें कहीं साफ तरीके से नजर नहीं आ रही है. बहरहाल आंकड़ों से यह साफ होता है कि न्याय की सर्वोच्च संस्था में महिला जजों की जरुरत है. ऐसे में उम्मीद ही की जा सकती है कि आने वाले समय में कोर्ट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी.

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