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माले का आरोप, अरवल में माहौल बिगाड़ने में प्रशासन की मिलीभगत

News wing

Patna, 03 October : अरवल में साम्प्रदायिक तनाव को लेकर भाकपा माले ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है. आरोप लगाया कि तनाव का यह माहौल भाजपा और आरएसएस की सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ है. प्रशासन अगर तत्पर होता तो तनाव बढ़ने से पहले ही स्थिति को संभाल लिया जाता.

ज्ञात हो कि अरवल में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने के बाद धारा 144 लगा दी गई है.

पूर्व सांसद कॉ रामेश्वर प्रसाद ने की शांति की अपील

भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी सदस्य व  पूर्व सांसद कॉ रामेश्वर प्रसाद ने प्रभावित इलाके का दौरा किया और लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि अरवल की धरती हमेशा से अमन, भाईचारे और हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतिक रही है. मगर बिहार में भाजपा की सरकार बनते ही माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है. ऐसी उन्मादी-उत्पाती ताकतों का बहिष्कार किया जाना चाहिए.

ऐसे बिगड़ा माहौल 

इस बार दशहरा और मुहर्रम की तिथि लगभग एक साथ पड़ जाने के कारण शरारती तत्वों को अच्छा मौका मिल गया. प्रशासन को हर स्थिति के लिए तैयार रहने की जरुरत थी. 01 अक्टूबर को अरवल पुरानी सब्जी बाजार होकर ताजिया का जुलूस निकलना था. वहीँ रास्ते में गुजरते हुए दुर्गा पूजा के पंडाल के रोलेक्स से ताजिया टकराने लगा. लोगों ने ताजिया को कंधे से उतारकर जमीन पर रख दिया. आगे निकल चुके जुलूस को भ्रम हुआ कि ताजिया को रोक लिया गया है. उस वक़्त हल्का विवाद हुआ मगर मसला शांत हो गया और ताजिया कर्बला की ओर निकल गया. मगर आरोप है कि  लौटते वक्त ताजिया को उस रास्ते से नहीं जाने दिया गया.

मूर्ति विसर्जन के समय तनाव बढ़ा

माले के नेताओं ने कहा कि उनके हस्तक्षेप के बाद दूसरे रास्ते से ताजिया को निकाला गया. फिर उन्मादियों ने मोटरसाइकिलों पर सवार होकर ‘जय श्री राम के नारे’ लगाये और मुस्लिम मुहल्लों में घुमने लगे. फिर भी आपसी समझदारी से स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया गया.

मगर अगले दिन दुर्गा मूर्ति के विसर्जन के वक़्त माहौल बहुत बिगड़ गया. माले नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने भी शुरू में चुप रह कर धार्मिक उन्मादियों का ही साथ दिया. मगर हालात जब और बिगड़ गये तब धारा 144 लागू कर दी गई. सब कुछ एक सोची-समझी साजिश के तहत हुआ है. 

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