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रांची में नहीं दिख रही दिवाली की रौनक, बाजार में पसरा सन्नाटा

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Ranchi, 06 October : इस वर्ष पर्व-त्योहारों को लेकर राजधानीवासियों में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है. लोगों में अजीब सी उदासी छायी हुई है. लोगों के साथ शहर के दुकानदारों का भी हाल कुछ ऐसा ही है. उनका कहना है कि नयी कर प्रणाली ने सभी व्यापारियों को उलझा रखा है. जीएसटी लागू होने के बाद बाजार में मंदी छा गयी है. व्यापारियों ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, ग्रॉसरी, जेवर-कपड़ा इत्यादि के खरीद में काफी गिरावट आयी है.

अगस्त के बाद नहीं बिक रहे लैपटॉप-कम्प्यूटर

शहर के ओवरब्रीज के समीप लैपटॉप-कम्प्यूटर विक्रेता अरविंद कुमार का कहना है कि अगस्त के बाद बाजार में काफी गिरावट आयी है. ऐसा लगता है कि दुकान में ग्रहण लग गया है. अब तो हमें यह डर सता रही है कि दिवाली पर भी बाजार संभलेगा या नहीं. लगता है इस वर्ष हमारी धनतेरस और दिवाली फीकी रह जायेगी. उन्होंने बताया कि दिवाली के मौके पर उनलोगों को बाजार से बहुत आस रहती है.

ग्रॉसरी स्टोर्स का भी हाल बुरा

ग्रॉसरी स्टोर के संचालक प्रमोद सिंह का कहना है कि उनके व्यापार का भी हाल कुछ अच्छा नहीं है. आम दिनों के मुकाबले खरीदारी में गिरावट आयी है. पहले शॉपिंग करने महिलाएं अधिक संख्या में आती थीं पर अब ऐसा नहीं है. ग्राहकों की संख्या में आयी कमी की वजह से हमारे बिजनेस पर काफी प्रभाव पड़ा है. इसकी भरपाई करना मुश्किल है. जीएसटी से भी हमलोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में गिरावट

मालवाहक टेम्पो पियागो शोरूम के मालिक सुजीत मलिक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बाजार पूरी तरह से धराशायी हो गयी है. अगर आप 2016 की बात करें तो धनतेरस और दिवाली में इस समय से ही बुकिंग शूरू हो गयी थी. मैंने पिछले साल धनतेरस में 91 पियागो की बुकिंग की थी. वहीं कैश में 32 गाड़िया बिकी थी. वहीं, इस वर्ष अभी तक सिर्फ 7 पियागो की बुकिंग हुई है. अभी समय है, देखते हैं बाजार कैसा रहता है.

इस बार नहीं है पहले जैसी रौनक

कपड़ा व्यवसायी मदन शाह का कहना है कि इस बार के फेस्टिवल्स में वो रौनक नजर नहीं आ रही है, जो हर साल दिखती है. इसका खास कारण है लोगों के पास पैसे की कमी. बाजार में आर्थिक मंदी जैसी हलात हो गयी है. इससे उभरने के लिये सरकार को ये नयी टैक्स प्रणाली में सुधार करने की जरुरत है. हमलोग दुकान संभाले या कंप्यूटर संभाले.

मंथली राशन लेने वालों में भी कमी

राशन दुकानदार विक्की केसरी का कहना है कि हमारे दुकान में पहले मंथली राशन ले जाने वालों की संख्या अधिक थी. लेकिन अब उसमें भी भारी कटौती दिख रही है. पहले हमलोगों को टैक्स चुकाने में इस तरह की दिक्कत नहीं होती थी, लेकिन अब कंप्यूटर की भाषा समझने में समय बीत जाता है. हमारे जैसे छोटे दुकानदारों को ये नयी कर प्रणाली से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.

जेवर दुकानों में ग्राहक कुछ पूछने भी नहीं आ रहे

अपर बाजार के आभूषण विक्रेताओं का साफ कहना है कि धनतेरस और दिवाली इतनी नजदीक है फिर भी हमारे दुकानों में ग्राहक पूछने तक नहीं आ रहे हैं. बाजार की ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं हुई थी. एक तरफ तो हम जीएसटी से काफी परेशान हैं, वहीं महीने में तीन बार नई टैक्स प्रणाली का फॉर्म भरना पड़ता है. इसको सरल करना चाहिये या इसे हटा ही देना चाहिये.

बाइक-कार की नहीं हो रही बुकिंग

रांजधानी में इस बार बाइक और कार की बुकिंग और बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. केपी ऑटोमोबाइल्स और साई टीवीएस के मार्केटिंग मैनेजर का कहना है कि हमारे शोरूम में इस बार फेस्टिव सीजन में कैसा कारोबार रहेगा, ये बताना मुश्किल है. ऐसा लग रहा है कि बाजार की अर्थव्यस्था पूरी तरह हिल चुकी है. ग्राहक शोरूम तक तो पहुंचते हैं लेकिन फिर कुछ समय में उनके फैसले बदल जाते हैं. लग रहा है इस बार की धनतेरस-दिवाली की बाजार कहीं पूरी तरह से फीकी ना रह जाये.

क्रेडिट कार्ड रहते हुये भी खरीदारी से डर रहे ग्राहक

ग्राहकों के पास क्रेडिट कार्ड होने के बावजूद भी खरीदारी से डर रहे हैं. बाजार की अर्थव्यवस्था सही ट्रैक पर नहीं चलने के कारण सब सहमे हुए हैं. उन्हें लगता है कब आर्थिक मंदी के दौर से गुजरना पड़े इसकी कोइ गैरंटी नहीं है. इसलिये लोग क्रेडिट कार्ड से भी शॉपिंग नहीं करना चाहते है.

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