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60 करोड़ रुपये से बन रहे हज हाउस से राज्य के आजमीनों को वंचित कर देगी ‘नई हज नीति’

Md. Asghar Khan

Ranchi, 13 October : झारखंड का हज हाउस हमेशा सुर्खियों में रहा. कभी भवन निर्माण में हुए घोटले की आलोचना को लेकर, तो कभी मुख्यमंत्री रघुवर दास के द्वारा नए भव हज भवन के निर्माण घोषणा और इसके लागत को लेकर. हज हाउस का निर्माण एक बार फिर से लोगों के बीच चर्चाओं का विषय बना हुआ है. चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या ‘नई हज नीति’ 60 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस हज हाउस के लाभ से राज्य के आजमीनों को वंचित कर देगी ? कडरु स्थित नौ मंजिला हज भवन अभी निर्माणधीन है, जिसे एक से दो साल में पूरा कर लिया जायेगा. लेकिन सावल यह है कि राज्य के आजमीन इस भव भवन में ठहर पायेंगे, उसकी सुविधाओं का लाभ ले पायेंगे ? या फिर अाने वाले समय में इसका कोई दूसरा इस्तेमाल होने लगेगा. इस भवन को लेकर राजनीति होने लगेगी. नई हज नीति अौर इस निर्माणाधीन हज हाउस को लेकर newswing.com ने लोगों से बातें की, तो कई तरह की प्रतिक्रियाएं मिली है.

रांची से इम्बारकेशन प्वाइंट हटाने का है प्रस्ताव

दरअसल, सात अक्टूबर को नई हज नीति बनाने के लिए यूपीए सरकार के द्वारा गठित समिति ने अल्पसंख्यक मंत्रालय को फाइनल रिपोर्ट सौंपी है. रिपोर्ट में हज यात्रा को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए देश के 21 हज इम्बारकेशन प्वाइंट को कम करके उसे नौ कर देने की शिफारिश की गयी है. जिसमें झारखंड का रांची हज इम्बारकेशन प्वाइंट भी शामिल है. रांची के हज इम्बारकेशन प्वाइंट को कोलकत्ता शिफ्ट होने की बात कही गयी है. इसके बाद से ही झारखंड स्टेट हज कमेटी और मुस्लिम संगठनों ने नई हज नीति का विरोध शुरु कर दिया है. लोग इम्बारकेशन प्वाइंट नहीं हटाने के लिए विरोध-अनुरोध कर रहे हैं, तो कई संस्थाएं आंदोलन कर विरोध करने की बात कर रही है.

इम्बारकेशन प्वाइंट हटने से क्या हो सकती है परेशानी

अगर नई हज नीति के अनुसार रांची से हज इम्बारकेशन प्वाइंट हटाया जाता है, तो झारखंड के आजमीनों को कोलकत्ता से जद्दा या मदीना के लिए उड़ान भरना पड़ेगा. इस दौरान झारखडं स्टटे हज कमेटी का कार्यलय भी कोलकत्ता शिफ्ट हो जायेगा. विभिन्न जिलों के आजमीनों को रांची के मुकाबले ज्यादा खर्च करके कोलकत्ता पहुंचना पड़ेगा. वहां से वह उड़ान भरेंगे. यात्रा के लिए पासपोर्ट, वीजा, टिकट अन्य कागजात के लिए उन्हें 48 घंटे पहले कोलकत्ता पहुंचना होगा. 48 घंटे तक वह कहां और कैसे रहेंगे, यह समस्या अलग से होगी. सरकार के इंतजाम रांची जैसे ही कोलकाता में होंगे, इसकी उम्मीद न के बराबर है.

नौ साल के संघर्ष के बाद झारखंड को मिला था विमान

2009 से झारखंड से आजमीनों के लिए हज विभान शुरु हुई. झारखंड हज कमेटी के पूर्व सदस्य और झारखंड राब्ता हज कमेटी के महासचिव हाजी मोख्तार अहमद कहतें है कि राज्य को नौ साल के संघर्ष इम्बारकेशन प्वाइंट. इसके लिए मुस्लिम संस्थाओं ने काफी मशक्कत किया. इससे पहले आजमीनों को कोलकत्ता और मुबंई हज यात्रा पर जाना पड़ता था. उन्होंने कहा कि इससे हाजियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था. मोख्तार अहमद ने बताया कि रांची से फिर से इम्बारकेशन पॉइंट छीनना दुर्भाग्यपूर्ण है.

उड्यन और अल्पसंख्यक मंत्री झारखंड से ही हैं सासंद, फिर भी छीना जा रहा हक

हज कमेटी के सदस्य सह प्रवक्ता खुर्शीद हसन रुमी ने कहा कि उड्यन मंत्री जयंत सिन्हा और अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी दोनों ही झारखंड से सांसद है. ऐसे में रांची से हज इम्बारकेशन प्वाइंट हटाने का प्रास्ताव राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. रुमी ने कहा कि इससे मुस्लिम समाज में अक्रोश है. सरकार ने इस पर विचार नहीं किया तो लोग आंदोलन करने पर मजबुर हो जायेंगे. उन्होंने बताया कि झारखंड स्टेट हज कमेटी केंद्र और राज्य से मिलकर बात करेगी.

क्या कहती हैं मुस्लिम संस्थाएं

रांची के इम्बारकेशन प्वाइंट हटाने के प्रस्ताव का झारखंड के तमाम मुस्लिम संस्थाओं ने विरोध किया है.  हज सेवक संस्था मरहबा ह्यूमन सोसाइटी के सचिव नेहाल अहमद ने कहा कि रांची से विमान रद्द करने का प्रास्तव झारखंड के आजमीनों (हज पर जाने वाले) के लिए दुखद खबर है. इसे नहीं हटाने के लिए मुस्लिम संस्थाओं के साथ बैठक कर केंद्रीय अल्संख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और सेंट्रल हज कमेटी को पत्र लिखा जायेगा. झारखंड मुस्लिम युवा मंच के अध्यक्ष कहते हैं कि एक तरफ झारखंड के मुसलमानों को मुख्यमंत्री रघुवर दास 60 करोड़ के हज भवन का तोहफा देते हैं, वहीं उनके ही केंद्रीय मंत्री नकवी जी इम्बारकेशन प्वाइंट को हटाकर लोगों को भवन की सुविधाओं से वंचित करना चाहते हैं. हमलोग मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि इसे नहीं हटाया जाए.  इसके हटने से राज्य के आजमीनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. उन्हें रांची के बदले कोलकाता जाना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि फिर 60 करोड़ की लागत से अलिशान हज हाउस का बनना बेकार हो जायेगा. 

हज भवन निर्माण घोटाला

झारखडं गठन के 17 वर्षों के अंतराल में हज कमेटी और हज हाउस के कारण राज्य की काफी किरकिरी हुई. 2001 में हज कमेटी बनी जिसके अध्यक्ष अर्जुन मुंडा रहें. जबकि 2004 से 2007 तक बिना अध्यक्ष के कमेटी चली. इसके बाद झामुमो की सरकार में हाजी हुसैन अंसारी हज कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए. अंसारी अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहते हुए दो टर्म हज कमेटी अध्यक्ष बने रहें. इस दौरान 2007 में 4.89 करोड़ की लागत से राज्य में हज हाउस का निर्माण हुआ. भवन निर्माण के दो ही साल के बाद बिल्डिंग की दिवारें चारों तरफ से दरकने लगी.  भवन की जर्जर स्थति को देख बीआईटी मेसरा और सनटेक ने जांच कर इसे धवस्त कर फिर से बनाने की सलाह दी. हज हाउस निर्माण घोटाले में राज्य के पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के अभियंता पुत्र शब्बीर अली समेत छह के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुआ. आरोपियों में कार्यपालक अभियंता किरण कुजूर, बीके लाल, अब्राहम रौना, मंजर खान और कयामुद्दीन खान शामिल हैं. चार्जशीट में बताया गया है कि ठेकेदार कयामुद्दीन खान ने वर्ष 2009 में अभियंता शब्बीर अली, कार्यपालक अभियंता बीके लाल और किरण कुजूर के साथ मिलीभगत कर कडरू में हज हाउस निर्माण में घटिया सामानों का उपयोग किया, जिससे निर्माण के दौरान ही भवन ध्वस्त हो गया। करीब चार करोड़ की सरकारी राशि के गबन का भी आरोप लगा है. अदालत ने आरोपियों को हाजिर होने के लिए सम्मन जारी करने का आदेश दिया है. घोटाले को लेकर निगरानी ब्यूरो थाना में वर्ष 2012 में केस दर्ज कराया था. 

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