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शहीदों के गांव नेताओं के लिए मनोरंजन स्थल बन गये हैं : बिरसा मुंडा की परपोती असरीता (देखें वीडियो)

News Wing

Ranchi, 15 November : 15 नवंबर 2017 बिरसा मुंडा के 142वीं जयंती के रूप में पूरे राज्य और देश मनाया जायेगा. आज हम बात कर रहे हैं डॉ असरीता टुटी से जो बिरसा मुंडा की चौथी पीढ़ी की वंशज हैं. देश की पहली आदिवासी महिला हॉकी कोच भी रही हैं. क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा में पीएचडी कर चुकी हैं. वर्तमान समय में नैकरी से वीआरएस लेकर समाज के लिए काम कर रही हैं.

न्यूजविंग के वरीय संवाददाता प्रवीण कुमार ने डॉ असरीता टुटी से कई मुद्दों पर खास बातचीत की. पेश हैं उसके अंश;

न्यूजविंग : रघुवर सरकार ने शहीदों के गांव के विकास की बड़ी-बड़ी घोषणा की है. बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू का क्या हाल है. विकास का सच वहां क्या है ?

डॉ. असरीता टुटी : उलिहातू के विकास को लेकर सरकार सिर्फ ढिंढोरा पीट रही है. सच्चाई यह है कि गांव में विकास का कोई काम नहीं हुआ है. पूरे राज्य में जो विकास योजना चल रही हैं, वही योजना यहां भी चल रही हैं. बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाओं की स्थिति दयनीय है. सरकार द्वारा शहीदों के गांव के विकास का दावा बेईमानी है. गांव में अभी भी बहुत सारी समस्यायें मौजूद हैं. आदर्श ग्राम के रूप में उलिहातू को भी रखा गया है लेकिन सिर्फ नाम का.

न्यूजविंग : अमित शाह, राजनाथ सिंह, रघुवर दास भी उलिहातू गये. विकास के वायदे भी किये. आज भी आपके गांव में केन्द्रीय मंत्री जुएल उरांव पहुंचे हैं. आप क्या कहेंगी इस बारे में?

डॉ. असरीता टुटी : ऐसी कोई बात नहीं है. विकास शब्द का इस्तेमाल ये अपने वोट बैंक के लिए करते हैं. ढिंढोरा पीटने से विकास नहीं होता. अमित शाह के गांव जाने पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था. उस समय भी गांव वालों को नहीं पूछा गया था. इससे गांव के लोग काफी नाराज और आक्रोशित हैं. इसी कारण जुएल उरांव के कार्यक्रम में भी ग्रामीणों ने शामिल ना होने का निर्णय लिया.

न्यूजविंग : सुखराम मुंडा आपके अपने चाचा हैं. वह भी बिरसा के वंशज हैं. सुखराम मुंडा ने कहा था कि उलिहातू गांव से हमारा किसी तरह का खून का रिश्ता नहीं है. क्या यह सच है?

डॉ. असरीता टुटी : आज सत्ताधारी दल भाजपा और आजसू दोनों सुखराम मुंडा को अपने साथ रखे हुए हैं. साथ रखने का एकमात्र कारण है कि सुखराम मुंडा का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा सके.

बिरसा के आरमानों को सुखराम भूल गये हैं. सरकार की कठपुतली बने हुए हैं. आज भी गांव में बिरसा मुंडा के नाम पर किसी आयोजन में नेता-अफसर अगर शामिल नहीं हो पाते हैं तो डीसी सुखराम को ही कहते हैं कि आप आयोजन कर लीजिए. हमें बिल बाद में भेज दीजिएगा. यह है सरकार का नजरीया. ऐसे व्यवहार से क्या गांव का विकास होगा और विकास के वादे कभी पूरे हो पाएंगे? यह सिर्फ ढकोसलाबाजी है. शहीदों के वंशज सुखराम मुंडा सरकार के मुखौटे हैं. इस से ज्यादा कुछ नहीं. पूरे गांव के लोग काफी दुखी हैं. गांव के परंपरागत सिस्टम की सरकार अवहेलना कर रही है.

न्यूजविंग : धर्म स्वतंत्र विधेयक को आप किस तरह से देखती हैं?

डॉ. असरीता टुटी : धर्म स्वतंत्र विधेयक आदिवासियों को आपस में लड़ाने के लिए लाया गया है. सरना और इसाई दोनों ही आदिवासी हैं. धर्म परिवर्तन कोई जबरदस्ती नहीं कराता. यह कानून आदिवासियों के बीच सरना और ईसाइयों में फूट डालने के मकसद से भाजपा सरकार द्वारा लाया गया. आदिवासी किस मजबूरी में ईसाई धर्म अपनाते हैं, सरकार यह नहीं देख पा रही है. उन्हें सिर्फ टारगेट किया जा रहा है. जबकि सचाई यह है कि रघुवर सरकार आदिवासियों का हिन्दुकरण करा रही है. सरकारी दस्तावेजों में आदिवासियों का, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के नाम में कुमार, कुमारी और देवी लिखकर हमें समाप्त करने की साजिश चल रही है. यही काम निर्वाचन आयोग भी करता रहा है. आदिवासियों का हिन्दुकरण भी सरकार की नजर में है. इस पर भी सरकार कुछ बताये.

न्यूजविंग : भूमि अधिग्रहण बिल- 2017 को किस नजर से देखते हैं?

डॉ. असरीता टुटी : सरकार आदिवासियों की जमीन अंधाधुंध तरीके से लूटना चाहती है. इसलिए यह कानून लाया गया. रघुवर सरकार की मंशा आदिवासियों के विकास की नहीं बल्कि आदिवासियों की जमीन हड़पने की है. जमीन लूट कर पूंजीपतियों को देना ही मकसद है.

न्यूजविंग : राज्य बने 17 साल होने को है. झारखंडी भाषाओं का विकास का किस तरह से विकास किया जा रहा है?

डॉ. असरीता टुटी : यह सच है कि झारखंड की स्थानीय भाषाओं को राज्य सरकार ने द्वितीय राज्यभाषा का दर्जा दिया है. लेकिन वर्तमान सरकार भाषाओं की घोर उपेक्षा कर रही है. भाषाओं को समाप्त करने की साजिश सरकार कर रही है. अगर आदिवासीयों की भाषा समाप्त होगी तो परंपरा और संस्कृति खत्म हो जाएगी. इसके कारण धीरे-धीरे आने वाले समय में आदिवासी समाप्त हो जाएंगे. फिर उनके संसाधनों को लूटने में सरकार को सुविधा होगी. इसी मंशा से रघुवर भी काम कर रहे हैं. विश्वविद्यालय में भी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा के शिक्षक नियुक्त ना करना, भाजपा सरकार की बड़ी उपलब्धि है.

न्यूजविंग : भाजपा से आदिवासी समाज को क्या उम्मीद है?

डॉ. असरीता टुटी : आदिवासियों के विकास की बात रघुवर सरकार कर रही है जबकि आदिवासी लगातार पिछले 3 सालों से सरकार से परेशान है. सीएनटी संशोधन बिल, भूमि अधिग्रहण बिल, धर्म स्वतंत्र विधेयक, इन तमान कानूनों ने आदिवासियों को परेशान करने का काम किया है. सरकार आदिवासियों का विकास नहीं कर रही है. सरकार सिर्फ धोखा देने का काम कर रही है.

न्यूजविंग : क्या बिरसा का गांव नेताओ का टूरिज्म स्थल बन गया है?

डॉ. असरीता टुटी : हां यह सच है. गांव में नेता आते हैं. कुछ भी बोल कर चले जाते हैं. आज जुएल उरांव भी गांव में आये. इस पर गांव के लोग नारज हैं. पिछले कई आयोजन में आदिवासियों की घोर उपेक्षा की गई है. शहीदों के गांव जाकर ये लोग शहीदों के नाम पर अपना मनोरंजन करते हैं. पिछले 3 साल में जितने आयोजन सराकर ने किये, सबमें समय और पैसे बर्बाद किये. इतनी राशि से उलिहातू के कई बुनियादी समस्याओं का हल किया जा सकता था. इससे गांव का काफी विकास होता.

आयोजन में ग्राम सभा की कोई बात नहीं चलती है. बस सरकार ऊपर से अपनी बात थोपती है. सरकार को पत्थरगड़ी को समझना चाहिए. यह आदिवासी और मुंडाओं की परंपरा है.

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