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संतोषी ने जान देकर पूरे गांव को दी सौगात

NewsWing

Ranchi,04November : यह भी एक अजीब विडंबना है. सिमडेगा की एक गरीब भूखी बच्ची संतोषी की भूख से तड़पकर मौत हो गयी. लेकिन उसकी मौत से उत्पन्न विवादों ने ग्रामीणों में एक आस जगा दी है.उसके गांव कारीमाटी को झारखंड सरकार ने एक बड़ा उपहार दिया है.

कारीमाटी गांव को आदर्श गांव बनायेंगे सीएम

तीन नवंबर को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड मंत्रालय में उसके गांव के लोगों से मुलाकात की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीमाटी गांव को आदर्श गांव बनाकर इस कलंक को खत्म किया जाएगा। गांव से गरीबी समाप्त करना सरकार का लक्ष्य है. इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि गांव के लोग हर रविवार को बैठक करें. इसमें गांव के गरीबों को चिह्नित करें. सरकार गाय पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन करने में मदद करेगी. इसके साथ ही गांव के युवक-युवतियों को कंबल, तौलिया, चादर आदि बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. इनके द्वारा उत्पादित सारे सामग्रियों की खरीदारी राज्य सरकार द्वारा कर ली जायेगी. उन्हें अपने समान बेचने कहीं नहीं जाना होगा. बच्चों को शिक्षित करें. शिक्षा से ही गरीबी समाप्त हो सकती है. गांव के लोगों को शराब नहीं पीने के लिए प्रेरित करें. गांव में शराब बंदी होने पर सरकार एक लाख रुपये का इनाम भी देगी. 

संतोषी की मौत से बदनाम हुआ गांव

इस मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि संतोषी कुमारी की मौत भूख से नहीं हुई है. लेकिन मीडिया में आयी खबरों के कारण उनका गांव बदनाम हो गया है. ध्यान रहे कि संतोषी एक अतिनिर्धन दलित परिवार की बच्ची थी. उसकी मौत की बात को अन्य जातियों के अपेक्षाकृत सम्पन्न लोगों द्वारा गांव की बदनामी से जोड़कर देखा जाना हैरान करने वाली बात है.

राशन नहीं मिलने की बात जिला प्रशासन ने रिपोर्ट में स्वीकारी

संतोषी की मौत चाहे जिस भी वजह से हुई हो, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा से उस नन्हीं जान का जीवन धन्य हो गया. गाँव को राज्य सरकार की ओर से काफी सुविधा मिलेगी. अगर संतोषी की दुखद मौत नहीं हुई होती, तो कारीमाटी गांव को यह सौगात नहीं मिलती.ध्यान रहे कि संतोषी की मौत के बाद स्वयं जिला प्रशासन की रिपोर्ट में यह साफ लिखा गया था कि, संतोषी के परिवार को फरवरी 2017 से राशन नहीं मिला है. आधार कार्ड से लिंक नहीं होने के कारण राशन नहीं मिलने की बात भी जिला प्रशासन की रिपोर्ट में स्वीकार की गई थी. 

आधार कार्ड के नाम पर  राशन से वंचित नहीं किया जा सकता - SC

जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश है कि आधार कार्ड के नाम पर किसी भी व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत ऐसे तमाम परिवार को प्रतिमाह राशन उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है. जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट स्वीकार किया है कि फरवरी के बाद से सरकार इस दायित्व को पूरा करने में विफल रही है.

भूख से हुई मौत कोई सरकार स्वीकार नहीं करती 

संतोषी की मौत भूख से हुई अथवा नहीं, इसका पता तो तभी चल पाएगा, जब यह पता चले कि भूख से मौत की परिभाषा क्या है.अभी इसकी कोई सरकारी परिभाषा नहीं है। इसके कारण किसी भी मौत को भूख से हुई मौत के रूप में कोई सरकार स्वीकार नहीं करती. 

जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार लंबे समय तक समुचित मात्रा में तथा गुणवत्तापूर्ण खाद्य नहीं मिले तो व्यक्ति किसी बीमारी का शिकार होकर असमय मौत का शिकार हो जाता है. सम्भव है कि अंतिम समय तक भी उसे कुछ खाद्य पदार्थ मिला हो. लेकिन समुचित खाद्य उपलब्ध नहीं होने के कारण भुखमरी की स्थिति में होने वाली ऐसी मौतों को ही दुनिया भर में भूख से हुई मौत के तौर पर स्वीकार किया जाता है. 

फिलहाल झारखंड में कतिपय अधिकारियों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को खलनायक के तौर पर बदनाम करने की मुहिम चला रखी है. जबकि सोचिये, अगर संतोषी न मरती, अगर सामाजिक कार्यकर्ता न होते, तो मुख्यमंत्री आज कारीमाटी गांव को इतनी बड़ी सौगात भी नहीं देते.

लिहाजा, मृतक बच्ची संतोषी तथा उसके मामले को सामने लाने वाली तारामणि को धन्यवाद पाने का हक तो बनता है. उनके कारण सिर्फ उनके गांव का ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में आधार कार्ड और राशन कार्ड संबंधी कई कमियां सामने आईं जिन्हें दूर करने का निर्देश राज्य सरकार ने दिया है.

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