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डिजिटल इंडिया के नाम पर ठगी गयी महिलाएं, काम नहीं करता सखी मंडल को दिया गया मोबाइल

बेकार निकला सखी मंडल को दिया गया सरकारी मोबाइल, डिजिटल इंडिया के नाम पर सखी-सहेलियों से ठगी

NEWS WING TEAM 

Ranchi, 15 October : आठ मार्च 2017 महिला दिवस के दिन धुर्वा के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से सूबे के मुखिया रघुवर दास ने यह घोषणा की थी कि राज्य में सखी मंडल समूहों के बीच एक लाख स्मार्ट फोन बांटे जाएंगे. छह अप्रैल को खुद पीएम मोदी ने योजना की शुरुआत साहेबगंज से की. उन्होंने सखी मंडल समूहों के बीच मोबाइल बांटा और दूसरी योजनाओं का शुभारंभ किया. यह अलग बात है कि पीएम के इस 75 मिनट के दौरे पर सरकार के नौ करोड़ खर्च हो गये. मतलब एक सेकेंड पर 20,000 रुपए. उसके बाद खुद सीएम रघुवर दास ने भी योजना की शुरुआत की. 24 अगस्त को सीएम ने गोड्डा से योजना की शुरुआत की और सखी मंडल समूहों के बीच स्मार्ट फोन बांटा. फिर तो सिलसिला शुरू हो गया और हर मंत्रियों ने अपने-अपने क्षेत्र में मोबाइल बांटना शुरू कर दिया. योजना के पीछे महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ और भी कई चीजे थीं. लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि सरकार की इस योजना पर सरकारी अफसरों ने पानी फेर दिया. स्मार्ट फोन बोल कर सरकार की तरफ से सखी मंडल की महिलाओं को स्मार्ट फोन के जैसा बिना सिम का एक झुनझुना थमा दिया गया. जो किसी भी काम का ही नहीं है. न्यूज विंग ने मामले को लेकर अलग-अलग जिलों में रियलिटी चेक किया. ऐसी एक भी महिला नहीं मिली जो सरकारी मोबाइल से खुश हों. मोबाइल को लेकर सभी महिलाएं सरकार को कोस रही हैं. उनका कहना है कि इससे अच्छा तो हमें मोबाइल सरकार देती ही नहीं.

यह भी पढ़ेंः स्मार्टफोन के नाम पर ग्रामीण महिलाओं को थमा दिया झुनझुना, बताया ही नहीं कैसे करेंगे इस्तेमाल

महिलाओं को दिया ऑउटडेटेड मोबाइल क्या है परेशानी  

4-जी के इस दुनिया में जहां खुशहाली से लेकर बर्बादी सब इंटरनेट के जिम्मे है. उस जमाने में सखी मंडल की महिलाओं को सरकार ने एक ऐसा स्मार्ट देने का काम किया है जो ऑउटडेट हो चुका है.

1. फोन से ठीक तरह से लंबी देर तक बात भी नहीं हो सकती है.

2. मोबाइल का चार्जर ऐसा है जिससे मोबाइल चार्ज ही नहीं होता है.

3. बैट्री कुल मिला कर 15 घंटे भी चल जाए तो सुभान अल्ला.

4. सरकार ने मोबाइल के लिए ऐसी कंपनी चुनी जिसका राजधानी रांची में ना ही आउटलेट है और ना ही सर्विस सेंटर.

5. किसी भी तरह का डाउनलोड अच्छी तरह से नहीं होता.

6. मेमोरी की समस्या हमेशा बनी रहती है.

7. कोई भी ऐप सही से काम नहीं करता

8. एक बार मोबाइल काम करना बंद कर दे तो सीधा कचरे के डब्बे में जाएगा.

सरकार ने दिया Karboon K9 4G स्मार्ट फोन

- 3.2 MP Rear Camera, 1.3 MP Front Camera

- 12.7 cm (5) FWVGA Screen Capacitive Touch 854 x 480 pixels resolution Vibrator Mode

- K9 Smart has a 1.2 GHz Dual Core CPU, 1 GB RAM, and 8 GB Storage (with 32 GB expandable memory)

- Dual Sim Support

- 2300mAH Li-ion Battery

यह भी पढ़ेंः झारखंड में सखी मंडल स्मार्टफोन योजना फेल, ना चलाने की ट्रेनिंग मिली ना सिम कार्ड

बड़े पैमाने पर हुई है कमीशनखोरी

सूत्रों के मुताबिक एक मोबाइल पर चार हजार खर्च हुए. सरकार ने एक लाख मोबाइल कार्बन कंपनी से खरीदे. यानि टोटल डील चार करोड़ की हुई. बाजार में भी इस मोबाइल की कीमत करीब चार हजार रुपए है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक लाख मोबाइल सेट लेने पर कंपनी ने किसी तरह का कोई ऑफर या डिस्काउंट नहीं दिया होगा ?

ऐसा नहीं है कि बाजार में इस बजट में अच्छे स्मार्ट फोन नहीं हैं. लेकिन कमीशन खोरी की चक्कर में सरकारी अधिकारियों ने Karboon K9 जैसी ऑउटडेटेड मोबाइल सखी मंडल की महिलाओं को थमा दिया.

किस तरह के काम के लिए दिया जा रहा है ऑउटडेटेड फोन

- स्वलेखा में इंट्री के लिए  

- भीम ऐप के माध्य से ट्रांजेक्शन के लिए

- गांव में ग्रामीण महिलाओं को स्मार्टफोन देकर उन्हें मोबाइल एडवाइजरी सर्विस के साथ भी जोड़ना लक्ष्य था.

- ध्वनि संदेश के माध्यम से खेती, सरकारी योजना और मौसम की जानकारी देना 

- मुख्यमंत्री सखी मंडल स्मार्ट फोन योजना का लक्ष्य गांवों और शहरों के बीच डिजीटल माध्यमों की

दूरी और विषमता को खत्म करना है

- योजना के तहत डिजीटल माध्यमों के जरिए कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देना  

- शक्ति ऐप के जरिए ग्रामीण महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना 

- ई-किसान ऐप के जरिए पशु, सखी और आजीविका कृषक मित्र हर तरह का आंकड़ा ऑनलाईन और ऑफलाइन मोड में देख सकें.

यह भी पढ़ेंः अफसरों ने रघुवर के मंसूबों पर पानी फेरा

सवाल जो उठने लाजिमी हैं

1)    जब सरकार की किसी योजना के संचालन के लिए मोबाइल उपयुक्त नहीं है, तो सरकार ने ये मोबाइल सखी मंडल के बीच बांटी क्यों?

2)    जिस मोबाइल कंपनी का ना ही आउटलेट और ना ही सर्विस सेंटर झारखंड की राजधानी रांची में नहीं है वैसे कंपनी का मोबाइल आखिर सरकार ने क्यों बांटा?

3)    सरकार एक लाख महिलाओं को मोबाइल देने का काम कर रही है. हर मोबाइल पर सरकार चार हजार रुपए खर्च कर रही है. ऐसे में चार करोड़ की डील है. क्या सरकार का सारा पैसा आउटडेटेड मोबाइल देने से पानी में नहीं चला गया?

4)    इतनी बड़ी राशि बर्बाद हो जाती है. कमीशनखोरी के कारण योजना चौपट हो जाती है. इसकी जवाबदेही किसकी बनती है.   

नगड़ी प्रखड का रियलिटी चेक

रांची जिले के नगड़ी प्रखंड का टुंडुल दक्षिणी पंचायत में 12 सखी समूहों के अध्यक्षों को सरकार की तरफ से स्मार्ट फोन दिया गया है. स्मार्ट फोन मिलने के बाद वो उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं. फोन से कितने खुश हैं. यह जानने के लिए News Wing उनके घर गया.

-    रोशनी महिला समिति की सक्रिय सदस्य दयामणी सुसाना तिर्की ने बताया कि उनके अध्यक्ष को भी स्मार्ट फोन मिला है. स्मार्ट फोन की हकीकत जानने के लिए अध्यक्ष सोनी प्रवीण के घर गया. श्रीमती प्रवीण ने बताया कि फोन तो उन्हें अगस्त महीने में ही मिल गया था. लेकिन सिम अभी तक उन्हें नहीं मिला है. सबसे बड़ी बात उन्होंने बतायी कि फोन को चलाना कैसे है किसी ने इस बात की जानकारी उन्हें नहीं दी है. नतीजतन फोन हर वक्त उनके बेटे के पास ही रहता है. बताया कि फोन पर अगर 10 मिनट किसी से बात कर ली तो ऐसा लगता है कि कान जल जाएगा. चार्ज दिन भर नहीं चलता.

-    एक और महिला समिति की अध्यक्ष रुकसार प्रवीण से जाकर उनके घर मुलाकात की. रुकसार की सुना तो हंसी नहीं रुकी. उन्होंने जैसे ही फोन ऑन किया वो खराब हो गया. बाजार जाकर उनके घरवाले ने फोन ठीक कराया. ठीक होने के बाद जब फोन घर पर आया तो पता चला कि फोन के साथ मिला चार्जर से फोन चार्ज ही नहीं हो रहा है. इंटरनेट ठीक से नहीं चलता. फोन काफी गर्म हो जाता है. उन्होंने बताया कि ये फोन किसी काम का नहीं है. वो दूसरे फोन से अपना काम करती है.  

क्या कहा सरकार के अधिकारी ने

परितोष उपाध्याय, विशेष सचिव, ग्रामीण विभाग-  अभी तक ऐसी शिकायत हमारे पास नहीं आयी है. मोबाइल बांटे अभी सिर्फ एक ही महीना हुआ है. कार्बन मोबाइल का सर्विस सेंटर झारखंड में है या नहीं इस बात पर मैं किसी तरह का कोई कमेंट नहीं कर सकता हूं. मोबाइल आईटी विभाग की तरफ से बांटा जा रहा है. ना कि ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से.  

क्या कहते हैं मोबाइल एक्सपर्ट- मोबाइल एक्सपर्ट कमलेश भारद्वाज कहते हैं कि एक जीबी रैम वाले मोबाइल फोन में इंटरनेट की 4जी स्पीड कम हो जाती है. 4जी स्पीड का सही फायदा लेने के लिए मोबाइल में कम से कम तीन जीबी का रैम होना चाहिए. कार्बन के9 4जी मोबाइल का बजार में कीमत चार हजार रुपये है. इसके सर्विस सेंटर पूरे राज्य में कुछेक स्थानों पर ही है.

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