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newswing probe-01: PTPS को Joint Venture में NTPC को देने का फैसला जिस कमेटी ने लिया, उसमें NTPC के अफसर भी थे सदस्य

NEWS WING

Ranchi, 20 November: रघुवर दास की सरकार ने वर्ष 2015 में पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस) को ज्वाइंट वेंचर कंपनी पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) को सौंप दिया. पीवीयूएनएल कंपनी में नेशनल पावर थर्मल कारपोरेशन (एनटीपीसी) कंपनी की हिस्सेदारी 74.26 प्रतिशत है और झारखंड सरकार की कंपनी उर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेयूवीएनल) की हिस्सेदारी 25.74 प्रतिशत है.  newswing.com की जांच में पता चला है कि सरकार और एनटीपीसी के बीच हुए इस सौदे में पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी थी. पीटीपीएस को ज्वाइंट वेंचर कंपनी को सौंपने का फैसला जिस कमेटी ने लिया, उस कमेटी में एनटीपीसी कंपनी के अधिकारी भी सदस्य के रुप में शामिल किए गए थे. नतीजा यह हुआ कि कमेटी ने एनटीपीसी के प्रस्ताव के अनुरुप ही फैसला लिया. newswing.com ने 06 नवंबर 2017 को इस प्रकरण से जुड़े 17 सवाल उर्जा विभाग के प्रधान सचिव को ई-मेल के जरिये भेजा था. जिसका उत्तर हमें नहीं मिला है. जवाब मिलने पर हम उसे भी प्रकाशित करेंगे. 

सरकार बनने के छह दिन बाद मिला प्रस्ताव, 27वें दिन बनी कमेटी, 117वें दिन हुआ एमअोए

विधानसभा चुनाव-2014 में बहुमत मिलने के बाद 28 दिसंबर 2014 को रघुवर दास ने मुख्यमंत्री का पद संभाला. नयी सरकार के गठन के मात्र नौ दिन बाद 06 जनवरी 2015 को एनटीपीसी ने मुख्यमंत्री को एक प्रस्ताव दिया. इस प्रस्ताव में पीटीपीएस को अधिग्रहण करने की बात कही गयी थी. मुख्यमंत्री को प्रस्ताव मिलने के 27वें दिन 02 फरवरी 2015 को सरकार ने एक अधिसूचना जारी की. समिति को एनटीपीसी के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा गया. समिति में तत्कालीन मुख्य सचिव अध्यक्ष थे. जबकि सदस्य के रुप में तत्कालीन विकास सचिव, वित्त विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव, उर्जा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव, झारखंड उर्जा विकास निगम लिमिटेड के तत्कालीन मुख्य प्रबंध निदेशक या उनके प्रतिनिधि, एनटीपीसी के तत्कालीन मुख्य प्रबंध निदेशक या उनके प्रतिनिधि को मनोनित किया गया. इस समिति के गठन के 90 दिन के भीतर 03 मई 2015 को सरकार और एनटीपीसी के बीच एक एकरारनामा (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) साईन किया गया. जिसके तहत पीटीपीएस को ज्वाइंट वेंचर कंपनी पीवीयूएनएल कंपनी को सौंप दिया गया. इस पूरे प्रकरण में यह उल्लेखनीय बात है कि सरकार ने इसकी अनुमति कैबिनेट में दी थी. जिसके तहत ज्वाइंट वेंचर कंपनी पुराने मशीनरियों के नवीनीकरण, रिनोवेशन, आधुनिकीकरण आदि करेगी. साथ ही पतरातू थर्मल पावर स्टेशन के विस्तारीकरण में कुल 4000 मेगावाट क्षमत का नया संयंत्र लगेगा.

पहले का विज्ञापन रद्द नहीं किया सरकार ने

यहां उल्लेखनीय है कि पीटीपीएस में 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता के विस्तार के लिए पूर्व की हेमंत सोरेन सरकार ने विज्ञापन जारी किया था. पड़ताल में यह बात सामने आयी है कि पीटीपीएस को ज्वाइंट वेंचर कंपनी को देने से पहले वर्तमान सरकार ने पूर्व की सरकार में जारी विज्ञापन को रद्द नहीं किया. पीटीपीएस को ज्वाइंट वेंचर कंपनी पीवीयूएनल को सौंपने के लिए सरकार ने कोई विज्ञापन जारी नहीं किया. जिस समिति ने एनटीपीसी कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर करने का फैसला लिया, उस कंपनी में एनटीपीसी के अधिकारियों को शामिल किया जाना संदेह पैदा करता है. पूरा मामला इतनी जल्दी (मात्र चार माह) में निपटाया गया. जिसमें राज्यहित की अनदेखी भी की गयी. जिसका खुलासा हम आगे करेंगे.

09 सितंबर 2013 पीपीपी मोड पर 1320 मेगावाट क्षमता का प्लांट लगाने के लिए निकला था टेंडर

झारखंड में बिजली उत्पादन करने के लिए राज्य सरकार की तीन इकाईयां थी. पतरातू थर्मल पावर स्टेशन, सिकिदरी हाइडल पावर स्टेशन और तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन. इसके अलावा दामोदर वैली कारपोरेशन, आधुनिक पावर प्लांट आदि अन्य गैर राज्य सरकारी कंपनियां भी बिजली उत्पादन करती है. वर्ष 1962 में रुस की मदद से पतरातू थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना की गयी थी. वर्ष 1965 में बिजली उत्पादन का काम शुरु हुआ था. वर्ष 1980 तक उसकी उत्पादन क्षमता 880 मेगावाट थी. जो बाद में घटकर 770 मेगावाट हो गयी. समय बीतने के साथ-साथ पीटीपीएस की स्थिति खराब होती गयी. झारखण्ड राज्य के गठन के बाद भी यह समस्याओं से जूझता रहा. लेकिन किसी ने ठीक से इसकी सुधि नहीं ली. नतीजा यह हुआ कि उपेक्षित होने के कारण इस संयंत्र से उत्पादन कम होता चला गया. जबकि राज्य में बिजली की खपत बढ़ती चली गयी. इसे देखते हुए पूर्ववर्ती हेमंत सोरेन सरकार ने इसमें 660 मेगावाट के दो और नये प्लांट (कुल क्षमता 1320 मेगावाट) लगाने का निर्णय लिया. सरकार की पतरातू एनर्जी लिमिटेड ने दिनांक 09.10.2013 को पीपीपी मोड पर 660 मेगावाट क्षमता के दो नये प्लांट लगाने हेतु एक टेंडर-NIT/688/PR-JSEB-2013-2014 निकाली. इस टेंडर में प्री-क्वालिफिकेशन की तिथि 02.12.2013 थी. इस बीच झारखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने झारखण्ड राज्य विद्युत् बोर्ड को विघटित कर चार निगमों का गठन  विद्युत् अधिनियम की धारा 131 एवं 133 में निहित प्रावधानों के तहत किया. इससे संबंधित अधिसूचना 06.01.2014 को जारी किया गया. जिसके मुताबिक कुल चार निगम बनाए गए. झारखण्ड उर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL), झारखंड उर्जा संचरण निगम (JUSNL), झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) और झारखंड उर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (JUUNL). झारखंड उर्जा विकास निगम को अन्य तीनों कंपनियों के शेयरधारक बनाया गया. जेयूयूएनल का काम उर्जा का उत्पादन करना, जेयूएसएनल का काम बिजली का ट्रांसमिशन करना और जेबीवीएनएल का काम बिजली का वितरण करना था.

निजी क्षेत्र की सात कंपनियों ने पीपीपी मोड पर प्लांट लगाने में रुचि दिखायी थी 

चारों में से जेयूयूएनल कंपनी को यह शक्ति भी दी गयी थी कि वह ज्वाइंट वेंचर में पावर प्लांट का निर्माण भी करेगी. इसी कंपनी ने पीटीपीएस में 660 मेगावाट क्षमता के दो प्लांट लगाने के लिए टेंडर जारी किया था. टेंडर की जांच की अंतिम तिथि 24.9.2014 था. बिड की बैठक 30.9.2014 को निर्धारित थी. यूटिलिटी रेस्पोंस टू क्वायरी 10.10.2014  रखी गई. बिड की तिथि 20.10.2014, लेटर ऑफ़ अवार्ड की तिथि 20.01.2015 तय़ थी. इस टेंडर में सरकार ने 8500 करोड़ रूपये के निवेश का प्रावधान किया था. टेंडर में देश के सात कंपनियों ने रुचि दिखाई थी. जिनमें सीआइसीएल प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता, सीएलपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मुंबई, एस्सार पावर गुजरात लिमिटेड अहमदाबाद, जिंदल पावर प्राइवेट लिमिटेड गुड़गांव, जेएसडब्लू एनर्जी लिमिटेड मुंबई, सेरा स्टेरलाइट लिमिटेड मुंबई और अडानी पावर गुजरात शामिल था. 

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