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प्रज्ञान विश्वविद्यालय की मान्यता देने का मामला : सरकार ने कैबिनेट, विधानसभा व राज्यपाल को अंधेरे में रखा

NEWS WING

Ranchi, 22 September :
प्रज्ञान फाउंडेशन को प्रज्ञान इंटरनेशनल विश्वविद्यालय की मान्यता देने के मामले में सरकार ने कैबिनेट, विधानसभा अौर राज्यपाल तक को अंधेरे में रखा गया.  न किसी नियम का पालन किया गया अौर न ही प्रज्ञान इंटरनेशन विश्वविद्यालय विधेयक-2016 को कैबिनेट से मंजूर कराया गया. न स्थल की जांच की गयी अौर न भवन की व्यवस्था देखी गयी.  अाखिर इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गयी. किस स्तर से हुई. कौन लोग शामिल थे. चूंकि मामला राज्य के मुख्यमंत्री अौर शिक्षा मंत्री से जुड़ा है. मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी का प्रोस्पैक्टस जारी किया है. शिक्षा मंत्री के अधीन अाने वाले विभाग ही मंजूरी की प्रक्रिया को पुरा करती है. इस लिए यह तय माना जा रहा है कि इसमें सत्ता शीर्ष पर अासीन लोग या उनके करीबी शामिल होंगे. बिना उनके इतनी बड़ी गड़बड़ी करना संभव नहीं है. 

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जानिए कब क्या, कैसे हुअा

- झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकि शिक्षा विभाग ने 30.11.2015 को अपने पत्रांक- 69/2015/2270 के माध्यम से प्रज्ञान फाउंडेशन को एक पत्र लिखा. 

- इस पत्र के बाद प्रज्ञान फांउंडेशन को प्रज्ञान यूनिवर्सिटी खोलने की प्रक्रिया शुरु कर दी गयी.

- 19 मार्च 2016 को विधानसभा ने बजट सत्र में पांच शैक्षणिक विधेयक को पास कर किया है. इसमें एक विधेयक प्रज्ञान इंटरनेशनल विश्वविद्यालय विधेयक-2016 भी था.

- 28 जून 2016 को शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने प्रज्ञान यूनिवर्सिटी को एक शुभकामना संदेश दिया.

- 25 मई 2017 को पश्चिम बंगाल के विधाननगर थाना में इंडियन बोर्ड अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसिन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी.

- 19 सितंबर 2017 को कोलकाता सीअाइडी की टीम रांची पहुंची अौर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से संबंधित जरुरी जानकारी मांगी.


 

यूनिवर्सिटी के लिए क्या-क्या होना जरुरी है

- एकल (सिंगल) डोमेन के लिए दो करोड़ तथा मल्टी डोमेन के लिए चार करोड़ रुपया रिजर्व फंड जमा करना होगा.

- सिंगल डोमेन के लिए कम से कम 10 एकड़ जमीन और मल्टी डोमेन के लिए कम से कम 25 एरकड़ जमीन उपलब्ध होना चाहिए.  (प्रज्ञान इंटरनेशल यूनिवर्सिटी को मल्टी डोमेन विश्वविद्यालय की मान्यता मिली है).

- कम से कम 1000 स्क्वायर मीटर का प्रशासनिक भवन और कम से कम 10 हजार स्क्वायर वर्ग मीटर का शैक्षणिक भवन का निर्माण किया होना चाहिए. 

- पुस्तकालय में समूचित मात्रा में पुस्तक, कंप्यूटर व स्टेशनरी की व्यवस्था हो.

- विश्वविद्यालय में जितने भी विभागों की पढ़ाई होगी, प्रत्येक विभाग में कम से कम एक प्रोफेसर, दो रीडर तथा तीन लेक्चरर व अन्य स्टाफ की नियुक्ति होनी चाहिए. 

- इन सारी शर्तों को पूरा करने पर ही राज्य सरकार संबंधित संस्था को राज्य में निजी विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति देगी.

- इन शर्तों को पुरा करने के दो साल के भीतर राज्य सरकार के पास एक कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होती है. जिसके अधार पर इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की अनुमति दिया जाता है. 

यूनिवर्सिटी की मान्यता देने के लिए क्या है नियम

- सभी शर्तों को पूरा करने के बाद जब संबंधित संस्था द्वारा राज्य सरकार को कंप्लायंस रिपोर्ट जमा किया जाता, तब राज्य सरकार उस संस्था को एक प्रजेंटेशन के लिए उच्च स्तरीय कमेटी के समक्ष अमंत्रित करती है. 

- प्रजेंटेशन में कम से कम दो विश्वविद्यालय के वीसी तथा उच्च एवं तकनीकि शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारी होते हैं. उस प्रजेंटेशन से संतुष्ट होने पर विभाग के द्वारा एक स्थल निरीक्षण समिति बनायी जाती है. 

- स्थल निरीक्षण के लिए जो समिति बनायी जाती है, उसमें विभाग के दो वरीय पदाधिकारी होते हैं. संबंधित क्षेत्र के विश्वविद्यालय के कुलपति  समिति के अध्यक्ष होते हैं. 

- समिति स्थल निरीक्षण करती है. जिसमें विश्वविद्यालय के पास जमीन की उपलब्धता, जमीन के स्वामित्व के दस्तावेजों की जांच, उसके भवन की उपलब्धता तथा मानव संसाधन एवं अन्य संरचना की तकनीकि जांच करके उसकी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की जाती है.

- समिति की रिपोर्ट अाने पर शिक्षा विभाग के द्वारा एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक अयोजित की जाती है. जिसमें विभाग के वरीय पदाधिकारियों के अलावा राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति होते हैं. 

- विभाग की समीक्षा बैठक में रिपोर्ट संतोषप्रद पाये जाने पर यूनिवर्सिटी को मंजूरी व विधेयक की कानूनी पहलुअों पर विधि विभाग से मंतव्य मांगा जाता है.

- विधि विभाग का मंतव्य मिलने के बाद विभाग प्रस्ताव व विधोयक को कैबिनेट में पेश करती है. 

- कैबिनेट से पास होने के बाद विधेयक को विधानसभा में पास कराया जाता है. 

- विधानसभा में पास कराये जाने के बाद विधेयक को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है. 

- राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय को कुलाधिपति की नियुक्ति का अदेश  दिया जाता है. 

इन सवालों का जवाब नहीं किसी के पास

- अब सवाल यह है कि जब प्रज्ञान फाउंजडेशन के पास झारखंड में न कोई जमीन है, न कोई भवन है. फिर बगैर स्थल निरीक्षण कराये पुरी प्रक्रिया को नजरअंदाज करके इसे विश्वविद्यालय के रुप में विधानसभा से पारित कैसे करा दिया गया. 

- क्या वाकई बिना किसी स्थल निरीक्षण के इस विश्वविद्यालय को अनुमति दी गई. 

- अगर स्थल निरीक्षण हुअ था, तो उस कमेटी में कौन-कौन लोग थे.

- कमेटी ने कब किस स्थान का निरीक्षण किया और कब अपनी रिपोर्ट दी और वह रिपोर्ट कहां है. 

- अगर स्थल निरीक्षण नहीं हुअा तो विभाग की समीक्षा बैठक में वरीय सदस्यों ने किस रिपोर्ट के अधार पर विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति दी. 

- इस विश्वविद्यालय की स्थापना का विधेयक विधानसभा में भेजने से पहले इसकी कैबिनेट से मंजूरी ली गयी अथवा नहीं. अगर ली गयी तो कैबिनेट की किस बैठक में मंजूरी दी गयी.

- वर्तमान सरकार छोटी-छोटी उपलब्धियों पर बड़ा प्रचार करके कार्यक्रम अायोजित करने के लिए जानी जाती है. तो फिर झारखंड में इस विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम क्यों नहीं किया गया. 

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