Skip to content Skip to navigation

मोमेंटम झारखंड में 225 करोड़ एमअोयू करने वाला प्रज्ञान फाउंडेशन कोलकाता पुलिस की गिरफ्त में

जिस प्रज्ञान फाउंडेशन को यूजीसी ने कई साल पहले फरजी घोषित कर दिया था, उसे गुपचुप तरीके से झारखंड लाया गया

NEWS WING

Ranchi, 23 September :
प्रज्ञान फाउंडेशन को प्रज्ञान इंटरनेशन यूनिवर्सिटी की मान्यता देने के मामले में ताजा तथ्य सामने अायी है. दिसंबर 2011 में यूजीसी ने प्रज्ञान फाउंडेशन की इंडिन इंस्टीच्यूट अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता को  फरजी घोषित कर दिया था. उस संस्थान को झारखंड के कुछ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से रांची लाया. उस संस्थान को यूनिवर्सिटी की मान्यता देने के लिए गुपचुप तरीके से प्रक्रियाअों को पुरा करा कर विधानसभा से विधेयक पास कराया. इतना ही 16-17 फरवरी 2017 को अायोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट-2017 (मोमेंटम झारखंड) में  सरकार अौर प्रज्ञान यूनिवर्सिटी के बीच 225 करोड़ का एमअोयू भी करवा दिया. एमअोयू पर प्रज्ञान फाउंडेशन के ट्रस्टी सुरेश कुमार अग्रवाल अौर राज्य सरकार के उच्च तकनीक विभाग के निदेशक मीणा ठाकुर का हस्ताक्षर है. सुरेश अग्रवाल फिलहाल कोलकाता पुलिस की गिरफ्त में है.

225 करोड़ में छह काम करने का था एमअोयू

- डिपार्टमेंट अॉफ होलिस्टिक हेल्थ एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन्स.

- डिपार्टमेंट अॉफ रिलिजिएंट अॉफ पारा मेडिकल साइंस.

- डिपार्टमेंट अॉफ स्प्रिच्यूलिटी एंड मेडिटेशन.

- डिपार्टमेंट अॉफ नेचुरोपैथी एंड योगा.

- डिपार्टमिअोन, सोशल वेलफेयर एंड पीस स्टडिज.

- डिपार्टमेंट अॉफ एस्ट्रोलॉजी, वेदिक साइंस एंड अोरिएंटल स्टडिज.

इसे भी पढ़ें : ना बिल्डिंग, ना कार्यालय, दे दी विश्वविद्यालय की मान्यता, रघुवर दास ने प्रोस्पेक्टस भी जारी कर दी

यूनिवर्सिटी झारखंड का, पत्राचार कोलकाता के पते पर

प्रज्ञान इंटरनेशन यूनिवर्सिटी का विधेयक 18 मार्च 2016 को विधानसभा में ध्वनि मत से पारित करा दिया गया था. जिसके बाद छह मई 2016 को राज्यपाल के हस्तक्षर से इसकी अधिसूचना बी कराी कर दी गयी.  न्यूज विंग डॉट कॉम की पड़ताल में सरकार के स्तर से प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी को भेजे गए पत्र की प्रति मिला है, जिसमें पत्राचार का पता कोलकाता है. सवाल यह उठता है कि जब यूनिवर्सिटी झारखंड में है, तो सरकारी पत्राचार उसके कोलकाता स्थित कार्यालय के पते से क्यों किया जा रहा था. 

कोलकाता के पते पर ये पत्र जारी किए गए

- राज्यपाल के अोएसडी राजीव कुमार सिन्हा ने 28 जून को एक पत्र प्रज्ञान फाउंडेशन को लिखा है. इसकी प्रति न्यूज विंग के पास उपलब्ध है. चंदन अग्रवाल को लिखे गए पत्र में पता 40/02, रुपचंद मुखर्जी लेन, कोलकाता, 700025 लिखा गया है.

- 21 जून 2016 को उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक ब्रज मोहन कुमार ने भी एक पत्र प्रज्ञान फाउंडेशन को लिखा है. इसमें भी पता कोलकाता का ही हैं. 

- भारतीय विश्वविद्यालय संघ का भी एक पत्र मिला है. 29 जुलाई 2016 को लिखे गए पत्र में झारखंड में स्थापित प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का पता कोलकाता का ही लिखा हुअा है. 

इसे भी पढ़ें : प्रज्ञान विश्वविद्यालय की मान्यता देने का मामला : सरकार ने कैबिनेट, विधानसभा व राज्यपाल को अंधेरे में रखा

अब सवाल यह उठता है

- जिस संस्थान को यूजीसी ने छह साल पहले फरजी घोषित कर दिया, उसे झारखंड लाकर गुपचुप तरीके से कागज पर विश्वविद्यालय किसने खुलवाया ?

- उसे कोलकाता के होटल अोबरॉय में अायोजित मुख्यमंत्री के रोड शो में स्पेशल इनवाईटी बनाने में उद्योग विभाग के किस पदाधिकारी ने भूमिका निभाई ?

- उसके साथ मोमेंटम झारखंड में 225 करोड़ के निवेश का एमओयू कराने में किसने प्रमुख भूमिका निभाई ?

- सरकार के निर्देश पर फिलहाल उच्च तकनीकि शिक्षा विभाग ने प्रज्ञान इंटरनेशल विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर उसकी मान्यता रद्द करने व विघटित करने की चेतावनी दी है. पर असल सवाल का जवाब क्यों नहीं ढ़ूंढ़ा जा रहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना कैसे हो गयी. 


 

इसे भी देखें: झारखड की शिक्षा जालसाजों के हाथ सौंप रही सरकार : जयशंकर चौधरी

चर्चा है कि एक नेता व एक अफसर ने मुख्यमंत्री को गुमराह किया

चर्चा है कि सरकार के कदम से कदम मिलाकर चलने वाली एक संस्था से जुड़े एक राजनेता तथा उद्योग विभाग के एक अधिकारी के दबाव में यह पूरा गैरकानूनी काम हुआ. उसी राजनेता और अधिकारी ने शैक्षणिक मामले को औद्योगिक निवेश के तौर पर दिखाने के बहाने एमओयू कराकर मुख्यमंत्री को गुमराह किया. उसी राजनेता और अधिकारी ने उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर दबाव डालकर सारा काम गुपचुप तरीके से कराया. जबकि अब इस मामले में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की गर्दन फंस रही है.

Slide
Share

Add new comment

loading...