हिरणपुर थाना के मुंशी, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत पांच पर मामला दर्ज

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/12/2018 - 20:32

पाकुड़: हिरणपुर थाना के मुंशी, कंप्यूटर ऑपरेटर, दो संवाददाताओं सहित एक अन्य पर मामला दर्ज हुआ है. पाकुड़ एसपी को बदनाम करने के बाबत पशु तस्कर कैलाश साहा के आवेदन पर आईटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. उल्लेखनीय है कि सात फरवरी को एक पशु तस्कर हिरणपुर पुलिस द्वारा पकड़ा गया था, जिसे थाने की हाजत में रखा गया था. आठ फरवरी को कैलाश साह नामक पशु तस्कर को थाने से ही बेल दे दिया गया.

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पुलिसिया कार्रवाई पर उठ रहे सवाल, रिपोर्ट आने का इंतजार

इसी बीच शाम को दो पत्रकार थाने आए थे, जिसे पशु तस्कर ने हाजत के अंदर से बातचीत के क्रम में यह बताया कि अमन भगत नाम के किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस के नामपर हजारों रुपये मांगे जा रहे थे, लेकिन मामला पांच सौ रुपये प्रति खेप के हिसाब से तय हुआ था. पत्रकारों एवं पशु तस्कर की बातचीत में अमन भगत के साथ एसपी का भी उल्लेख् हुआ था. अतिउत्साही पत्रकारों ने अपरिपक्वता दिखाते हुए उक्त बातचीत का वीडियो व्हाट्सअप में वायरल कर दिया. वीडियो जब एसपी पाकुड़ के संज्ञान में आया, तो कैलाश साह नामक उक्त पशु तस्कर द्वारा यह आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया कि गिरफ्तारी के बाद उसे मुंशी ने कमरे में बंद कर मारा-पीटा और पत्रकारों को बुलाकर उससे जबरदस्ती बुलवाया कि पुलिस के नामपर अमन भगत पैसे की वसूली करता है. अब सवाल यह उठता है कि गिरफ्तारी के बाद जिस व्यक्ति को हाजत में रखा जाता है, उसका जेल के लिए चालान जरूरी हो जाता है, लेकिन उसे दूसरे दिन थाने से ही बेल दे दिया गया? अगर कमजोर धारा में मामला दर्ज हुआ, तो उसे हाजत में रखने की क्या आवश्यकता थी? दूसरा सवाल उठता है कि जब मुंशी द्वारा उस पशु तस्कर के साथ मारपीट की गई, तो बिना इलाज कराए उसे कैसे बेल दे दिया गया? अगर मुंशी द्वारा उसे पीटा गया था और किसी अंदुरुनी चोट के कारण जमानत के बाद उसके साथ कुछ अनहोनी हो जाती, तो जिम्मेदार कौन होता?

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पिटाई मामले में उठ रहे कई सवाल

सवाल यह भी उठता है कि एक थाने में क्या मुंशी की इतनी चलती होती है कि वो थानेदार सहित अन्य सभी अपने से वरीय पदाधिकारियों के रहते हुए थानेदार द्वारा गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति की पिटाई कर सके? अगर ऐसा है, तो फिर थानेदार पर कार्रवाई क्यों नही हुई. वीडियो में यह स्पष्ट दिखता है कि पशु तस्कर हाजत के अंदर से बात कर रहा है. ऐसे में एफआईआर में यह दर्ज होना कि किसी बंद कमरे में पीटा गया जांच का विषय लगता है. सबसे बड़ी बात यह है कि क्या अमन भगत द्वारा पुलिस के नाम पर होने वाली वसूली के आरोप में कोई कार्रवाई हुई या नही. इन सब विषयों पर जांच निष्पक्ष होनी चाहिए. ऐसा लगता है कि पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद अपने बचाव में दबाव डालकर कैलाश साह से यह शिकायत करवायी. क्योंकि कैलाश साह के अनुसार ही अगर एक मुंशी की धौंस पर वह पत्रकारों के सामने गलत बयानी कर सकता है, तो फिर कैलाश साह थानेदार और जिले के वरीय पुलिस पदाधिकारियों की धौंस पर झूठी शिकायत भी दर्ज करा सकता है. कुल मिलाकर पूरा मामला गड़बड़ झाला जान पड़ता है. पाकुड़ के पत्रकार उक्त इस मामले से आहत हैं. जल्द ही पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल डीजीपी से मिलकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करेगा. इधर पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र प्रसाद बर्नवाल ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ओडी में तैनात पुलिस पदाधिकारी एवं थानेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

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