एमपी के बाद अब यूपी में व्यापम, नकल माफिया एक लाख रुपया लेकर बनाते थे MBBS डॉक्टर, खुलासे के बाद पुलिस ने दो छात्रों को पकड़ा

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 03/21/2018 - 13:11

Meerut : मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले ने देशभर को हिलाकर रख दिया था. अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही मामला देखने को मिला है. दरअसल यूपी में एक ऐसे रैकेट को पुलिस ने पकड़ा है , जो साल 2014 से ही मेडिकल के छात्रों को पैसा लेकर पास कराया करता था. मामले में खुलासा तब हुआ जब यूपी के 600 गैर योग्य छात्रों के एमबीबीएस की परीक्षा पास करने का मामला सामने आया. अब मामले का खुलासा होने के बाद सभी छात्रों की डॉक्टरी की डिग्री भी चली गयी और फिलहाल सभी बेकार हो गये हैं.

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पैसे मिलते ही नकल गिरोह ने बदल दीं कॉपियां

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय

अब इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई की और दो छात्रों को सोमवार को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किये गये छात्रों पर नकल माफिया रैकेट को एक-एक लाख रूपया देने का आरोप है. पुलिस ने बताया कि इन दोनों छात्रों के पैसे देने के बाद नकल माफिया गिरोह ने इनकी कॉपियों को बदल दिया और एक्सपर्ट्स के उत्तर वाले कॉपियों को शामिल कर दिया. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एमबीबीएस परीक्षा की कॉपियां बदलने के मामले में मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज से पकड़े गये एमबीबीएस के दोनों छात्रों को अदालत ने जेल भेज दिया है. एसटीएफ के सीओ ‌ब्रजेश कुमार ने बुधवार को बताया कि मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के छात्र स्वर्णजीत निवासी संगरुर, पंजाब और आयुष निवासी अंसल सुशांत सिटी, पानीपत को मंगलवार को पुलिस ने अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, कैंपस में एमबीबीएस की कॉपियां बदलने के मामले में बरामद दो कॉपी मेरठ एवं मुजफ्फरनगर के दो कॉलेजों की निकली हैं. विश्वविद्यालय ने मुख्य परीक्षा के लिए इन कॉलेजों को कॉपियां भेजी थीं. लेकिन ये कॉपियां कॉलेज से मेडिकल की कॉपियां लिखने वाले गिरोह तक पहुंच गई.

दो कॉलेजों पर एसटीएफ बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में

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STF

विश्वविद्यालय के इस खुलासे के बाद इन दोनों कॉलेजों के खिलाफ एसटीएफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है. एसटीएफ ने पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है. गौरतलब है कि 17 मार्च को एसटीएफ ने कविराज नाम के व्यक्ति को विश्वविद्यालय से पकड़ा था. पूछताछ में कविराज ने बताया कि वह विश्वविद्यालय के कर्मचारी कपिल कुमार, संदीप, पवन, चंद्रप्रकाश, सलेकचंद के साथ मिलकर एमबीबीएस, एलएलबी, स्नातक, एमए की कॉपियों को बदल देता था. विश्वविद्यालय की गोपनीय शाखा से कॉपियों को चोरी करके उनपर नंबर बढ़ाकर दोबारा से रख दिया जाता था. एसटीएफ ने आरोपियों से दो कॉपियां बरामद की थी. एसटीएफ ने इन दोनों कॉपियों के बारे में विश्वविद्यालय से रिकॉर्ड मांगा था.

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विश्वविद्यालय ने एसटीएफ को दोनों कॉपियों की जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें दो नये कॉलेजों पर तलवार लटक रही है. बरामद कॉपी में से एक कॉपी एसडी कॉलेज मुजफ्फरनगर को आवंटित थी, जबकि दूसरी आधारशिला कॉलेज ऑफ एजुकेशन मेरठ को. विश्वविद्यालय सभी केंद्रों पर सीरियल नंबर के आधार पर कॉपियों का बंडल आवंटित करती है. ये कॉपियां 13 मार्च से शुरू हुई मुख्य परीक्षाओं के लिए थी. लेकिन कॉलेजों से इन कॉपियों का प्रयोग एमबीबीएस की कॉपी बदलने में हुआ.  सूत्रों ने बताया कि एसटीएफ इन दोनों ही कॉलेजों से कुछ लोगों को जल्द ही हिरासत में ले सकती है.

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