सार्जेंट मेजर व रीडर पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद जामताड़ा के पुलिस अफसरों ने महिला सिपाही को चोरी के केस में फंसा कर सस्पेंड किया !

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 03/10/2018 - 16:52

Sweta Kumari
Ranchi :
जामताड़ा जिला बल के महिला पुलिसकर्मियों के साथ यौन शोषण का सिलसिला हाल का मामला नहीं है. वहां पर यह कृत्य लंबे समय से चल आ रहा है. डर की वजह से महिलाएं सामने नहीं आती थी. ताजा जानकारी यह है कि जब एसपी के आवासीय कार्यालय में तैनात एक महिला सिपाही ने विरोध में आवाज उठाया, तब एसपी कार्यालय से उसका तबादला कर दिया गया. महिला सिपाही की पोस्टिंग दूसरी जगह कर दिया गया. इसी दौरान 18 नवंबर को छापामारी के दौरान कथित रुप से एक घर से 25 हजार रुपये की चोरी हुई. बाद में रुपये घर में ही मिल गये. इसके बावजूद यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला सिपाही के खिलाफ केस कर दिया गया और उसे निलंबित कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि सिपाही का तबादला और निलंबन का आदेश एसपी के स्तर से ही जारी होता है. अब पुलिस मुख्यालय सीनियर पुलिस अफसर इस मामले को इस तरह पेश कर रहें हैं कि चोरी के मामले में कार्रवाई होने के बाद महिला सिपाही ने सार्जेंट मेजर व रीडर पर आरोप लगाया. इसलिए दोनों को क्लीनचीट दिया गया.

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17 नवंबर को एसडीपीओ कार्यालय में हुई थी गवाही

दो महिला पुलिसकर्मियों ने यौन शोषण के विरोध में अावाज उठायी थी. जिसके बाद 17 नवंबर को एसडीपीओ कार्यालय में दोनों महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया था. एसडीपीओ पूज्य प्रकाश ने दोनों महिला से पूछताछ की थी. इसे पूरे प्रकरण में जामताड़ा की एसपी जया राय और यौन शोषण की जांच करने वाली आंतरिक कमेटी ने कोई जिक्र ही नहीं किया. क्योंकि कमेटी को यह साबित करना था कि महिला सिपाही पर पहले चोरी का इल्जाम लगा, फिर उसने यौन शोषण का आरोप लगाया. जबकि सच इसके उलट है. महिला सिपाही यौन शोषण का विरोध  जून 2017 से ही कर रही थी. 

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 जून 2017 को एसपी कार्यालय से हटा दिया गया था महिला सिपाही को

यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला सिपाही पहले एसपी के आवासीय कार्यालय में पदस्थापित थी. जब उसने रीडर की गलत डिमांड पूरी नहीं की, तब  27 जून उसका तबादला कर दिया गया. 27 जून को उसे साहेबगंज पुलिस लाईन भेजा गया. जहां से जुलाई माह में उसकी ड्यूटी श्रावणी मेला में लगा दिया गया. नवंबर माह में वह जामताड़ा लौटी.  नवंबर के पहले सप्ताह में उसकी पोस्टिंग QRT टीम में कर दिया गया. 17 नवंबर 2017 को एसडीपीओ के कार्यालय  में उसने यौन शोषण के आरोपों को लेकर गवाही दी. उसी रात उसे नारायणपुर थाना की पुलिस के साथ छापामारी के लिए भेज दिया गया.

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क्या है चोरी की घटना का सच

- 17-18 नवंबर 2017 को महिला पुलिसकर्मियों की टीम को  नारायणपुर थाना की पुलिस के साथ क्षेत्र में छापेमारी के लिये भेजा गया. जहां भोला मंडल के घर पर पुलिस ने  छापेमारी की. छापेमारी टीम में पीड़ित महिला सिपाही के अलावा अन्य महिलाकर्मी भी मौजूद थी.

- 18 नवंबर को भोला मंडल की पत्नी दुलारी देवी ने महिला पुलिसकर्मियों पर उसके घर में रखे 25 हजार रूपये चोरी करने का आरोप लगाया. दुलारी देवी ने इस संदर्भ में थाना में आवेदन भी दिया था. जिसमें उसने कहा था कि अपनी डिलिवरी के लिए उसने 25 हजार रूपया घर में रखे थे. जिसे महिला पुलिसकर्मियों ने ले लिया. आवेदन के मुताबिक छापेमारी के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी ने अपने जैकेट से दस हजार रूपया निकालकर दिया. लेकिन बाकि के 15 हजार रूपये नहीं मिले.

- दुलारी देवी के इस आवेदन के आधार पर थाना प्रभारी ने यौन शोषण के पीड़ित महिला सिपाही के खिलाफ जांच प्रतिवेदन एसपी को भेजा और एसपी ने जांच प्रतिवेदन मिलते ही 20 नवंबर को महिला सिपाही को निलंबित कर दिया.

- 19 नवंबर को ही दुलारी देवी ने दोबारा थाना पहुंच कर बताया कि उसने  गलतफहमी की वजह से  चोरी की शिकायत  की थी. उसके 15 हजार रुपये घर में एक कोना में मिल गया है. इस लिए उसने पहले जो शिकायत की थी, उसे वापस लेती है. थाना प्रभारी ने दुलारी देवी के इस दूसरे आवेदन की जानकारी न तो एसपी को दी और न ही एसपी जया राय ने यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला सिपाही से पूरे मामले की जानकारी ली. बिना जानकारी लिये ही महिला सिपाही को निलंबित कर दिया.  

- भोला मंडल के घर से 15 हजार रुपये चोरी करने के मामले में थाना प्रभारी ने 29 नवंबर को अज्ञात महिला सिपाही के खिलाफ एक केस (कांड संख्या-250/2017) दर्ज किया है. इस मामले में थाना प्रभारी ने अज्ञात महिला सिपाही को अभियुक्त बनाया है. यहां सवाल यह उठता है कि जब थाना प्रभारी ने 19 नवंबर को ही महिला सिपाही के खिलाफ एसपी को रिपोर्ट कर दी थी और एसपी जया राय ने उस रिपोर्ट के आधार पर महिला सिपाही को निलंबित कर दिया था, फिर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों की गयी. जबकि उस वक्त तक को थाना प्रभारी और एसपी को चोरी करने वाली महिला सिपाही का नाम पता था. थाना प्रभारी को नामजद प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए थी.

इन तथ्यों से साफ है कि जामताड़ा जिला पुलिस बल में एेसे पुलिस अफसर हैं, जो महिला सिपाहियों का शोषण करते हैं. और अगर कोई महिला सिपाही इसके विरोध में खड़ी होती है, तो उसे ड्यूटी के नाम पर परेशान किया जाता है. इतना ही नहीं झूठी आपराधिक मुकदमा तक दर्ज कर दिया जाता है. मामला बिगड़ने पर एसपी समेत सभी अफसर एक जुट होकर गलत रिपोर्ट तैयार करते हैं और सीनियर अफसरों को भी अंधेरे में रख कर गुमराह करने का काम करते हैं. यही कारण है कि महिला सिपाहियों के साथ यौन-शौषण के प्रमाण मौजूद रहने के बाद भी एसपी के नेतृत्व में गठित आंतरिक जांच कमेटी ने आरोपी सार्जेंट मेजर और रीडर को क्लीन चीट दे दिया.  इस कमेटी की रिपोर्ट पर ही संथाल परगना रेंज के डीआइजी ने अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेज दी और पुलिस मुख्यालय में बैठे अफसरों ने आईजी के द्वारा किये गये निलंबन आदेश को रद्द कर दिया.

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