आखिर क्यों ग्रामीण अंचलों में पत्थलगड़ी का सिलसिला रुक नहीं रहा है !

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 06/13/2018 - 18:51

Pravin kumar

Ranchi/Khunti   :  खूंटी जिले से पांचवीं अनुसूची के तहत पत्थलगड़ी करने का मामला राज्य की सीमा लांघ कर दूसरे राज्यों के आदिवासी अंचलों में भी पहुंच चुका है. खूंटी जिला प्रशासन की पत्थलगड़ी रोकने की सारी कोशिशें नाकाम हो चुकी है. जिले के ग्रामीण अंचलों में पत्थलगड़ी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं राज्य सरकार के मंत्री नीलकंठ मुंडा, खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा व राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास वर्तमान पत्थलगड़ी के स्वरूप का संचालन करनेवालों को जेल की सलाखों के पीछे डालने की बात कह चुके हैं. इसके बावजूद खूंटी जिले में पत्थलगड़ी का सिलसिला जारी है. जिला प्रशासन पत्थलगड़ी के मामले में एक दर्जन से अधिक लोगों को जेल भेज चुका है. आखिर बिरसा की भूमि में चल रही पत्थलगड़ी सिर्फ प्रशासन की  नाकामियों की वजह से है या फिर जनप्रतिनिधियों के द्वारा विकास योजनाओं को लोगों तक  पहुंचाने में रुचि नही रखने के कारण है. यह सवाल मौजूं है.  

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सरकार ने आदिवासियों की भावनाओं के अनुरूप विकास योजना का संचालन नहीं किया

ग्रामीण अंचलों में विकास योजनाओं में कोताही बरतना कोई नयी बात नहीं है. पत्थलगड़ी आंदोलन से जुड़े यूसुफ पूर्ति कहते हैं कि सरकार ने कभी आदिवासियों की भावनाओं के अनुरूप विकास योजना का संचालन नहीं किया. पूर्ति ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्र में विकास के नाम पर सिर्फ लूट मचाई गयी है. कहा कि पांचवी अनुसूची क्षेत्र में संवैधानिक प्रावधानों को भी अमल में नहीं लाया गया है.  ऐसे में विवश होकर बिरसा मुंडा के रास्ते पर चलते हुए संविधान को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है,  तो नेता से लेकर सरकार एवं जिला प्रशासन को परेशानी हो रही है. 

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आदिवासियों की मनोदशा सरकार समझे : स्टेन स्वामी

पत्थरगड़ी को लेकर आदिवासी मामलों के जानकार स्टेन स्वामी कहते हैं कि आदिवासियों की मनोदशा सरकार को समझनी चाहिए. पत्थलगड़ी करने वाले लोगों से खुले मन से संवाद किया जाना चाहिए. क्योंकि आदिवासी समाज अपनी पहचान स्थापित करने के साथ-साथ अपने संवैधानिक अधिकारों को पाने के लिए पत्थलगड़ी की सहायता ले रहा है. लेकिन सरकार अगर बन्दूक, बुलेट के बल पर आदिवासियों का मुकाबला करना चाहती है,  तो वह एक बड़ी गलती होगी. समाधाान के बदले अलगाव की भावना और बढ़ेगी.

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20 सदस्यों से बनी जनजातीय सलाहकार परिषद (टीएसी) होनी चाहिए

 स्टेन स्वामी कहते हैं कि पांचवी अनुसूची और पेसा अधिनियम को लागू करने में सरकार की विफलता पथलगाडी के माध्यम से ग्राम सभा के अपने अधिकारों का दावा करने का कारण बनी. संविधान की चौथी अनुसूची  निर्धारित करती है कि अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में 20 सदस्यों से बनी एक जनजातीय सलाहकार परिषद (टीएसी) होनी चाहिए, जिनमें सभी आदिवासी होने चाहिए और यह टीएसी का कर्तव्य होगा आदिवासियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित मामलों पर राज्यपाल को सलाह देना. टीएसी की सलाह के आधार पर राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों में लोगों के शांति और सुशासन के लिए नियम बना सकते हैं, जो संविधान की पांचवी अनुसूची 244 (1) भाग ए, 4 (1), (2), 5 (2)] में मौजूद है.

आदिवासी अंचलों के लिए विशेष कानूनी प्राावधान कियेे गये हैं

आदिवासी अंचलों के लिए और भी विशेष कानूनी प्राावधान कियेे गये हैं, जिसे सरकार दरकिनार कर रही है. पत्थलगड़ी वाले इलाके में बैंक ऑफ ग्रामसभा की घोषना पूर्व में ही की जा चुकी है. और इसे पूरे देश में विस्तार देने की बात कही जा रही है. खूंटी जिले से शुरू की गयी पत्थलगड़ी अब गुजरात, महाराष्ट्र, ओड़िशा ,छतीसगढ़ आदि राज्यों में भी शुरू हो चुकी है. खूंटी जिले के दो दर्जन से अधिक गांवों में जून में पत्थलगड़ी की तैयारी की जा रही है.

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