रामगढ़ मॉब लिंचिंग में मारे गए अलीमुद्दीन अंसारी का नहीं बना मृत्यु प्रमाणपत्र, परिजन एक साल से लगा रहे सरकारी दफ्तरों के चक्कर

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 06/12/2018 - 09:21

Ramgarh : झारखंड के रामगढ़ में हुई चर्चित मॉब लिंचिंग में मारे गए अलीमुद्दीन अंसारी की मौत को एक साल होने को है लेकिन अभी तक उनका परिवार मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है. गौरतलब है कि पिछले साल 29 जून को भीड़ के बुरी तरह पीटने से अलीमुद्दीन अंसारी की मौत हो गई थी. इस मामले में रामगढ़ के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बीते 20 मार्च को ग्यारह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बावजूद अलीमुद्दीन के परिजन उनके मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए परेशान हैं. उन्हें अभी तक प्रमाणपत्र नहीं मिला है.

रिम्स प्रबंधन ने मृत्यु प्रमाणपत्र देने से किया इनकार : मृतक की पत्नी

अलीमुद्दीन अंसारी की पत्नी मरियम खातून ने बताया कि रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) के प्रबंधन ने उनका मृत्यु प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया है. मरियम खातून ने कहा कि मेरे शौहर की हत्या के एक साल बाद भी मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण हम परेशान हैं. इस कारण हमें बीमा के दावे, बैंक में जमा पैसे और कई दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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क्यों नहीं मिला प्रमाणपत्र

रिम्स ने अलीमुद्दीन का मृत्यु प्रमाणपत्र इसलिए नहीं दिया क्योंकि वहां पहुंचने से पहले ही अलीमुद्दीन अंसारी की मौत हो चुकी थी. रिम्स प्रबंधन का तर्क है कि वहां उनका मृत शरीर लाया गया था, ऐसे में मृत्यु प्रमाणपत्र कैसे जारी किया जा सकता है. उनका कहना है कि उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट तभी दे दी थी.

पुलिस ने भी प्रमाणपत्र देने से किया इनकार

मृतक के परिजन
मृतक के परिजन

अलीमुद्दीन अंसारी के बेटे शहजाद ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने सुझाव दिया कि यह प्रमाणपत्र रामगढ़ से जारी होना चाहिए. शहजाद ने कहा कि हमलोग सर्टिफिकेट बनवाने रामगढ़ थाना गए लेकिन पुलिस यह नहीं बता पा रही थी कि उनकी मौत किस जगह हुई. ऐसे में वो मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए कैसे रिपोर्ट दे सकते हैं. पुलिस ने कहा कि उनके अधिकारियों ने जब अलीमुद्दीन को बाजार टांड़ में भीड़ से बचाया, तब वो जिंदा थे. रांची ले जाते वक्त रास्ते में उनकी मौत हुई. ऐसे में मौत की वास्तविक जगह बता पाना मुश्किल है.

ऐसे हुई थी मौत

रामगढ़ जिले के गिद्दी थाना क्षेत्र के रहने वाले अलीमुद्दीन अंसारी को भीड़ ने रामगढ़ के बाजार टांड़ इलाके में सरेआम पीटा था. उनकी गाड़ी में आग भी लगा दी गई थी. भीड़ को शक था कि उस गाड़ी में बीफ है. इस मामले में रामगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जिन 11 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई, उनमें विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ गौरक्षक और भारतीय जनता पार्टी के नेता भी शामिल थे.

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