वाह रे झारखंड सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था, रिम्स में एम्बुलेंस छह और चालक सिर्फ एक, बाकी बाबूओं की सेवा में

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 02/21/2018 - 17:30

Saurabh Shukla

Ranchi : किसी भी मरीज के लिए एंबुलेंस उतना ही आवश्यक है, जितना डॉक्टर और दवा. लेकिन जरा सोचिये कि जब मरीजों की सेवा के लिए कार्यरत एंबुलेंस चालक बाबू की सेवा में लगे हों ,तब मरीजों का क्या हाल होगा. राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में इन दिनों मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल रहा है. कारण है एंबुलेंस चालकों की कमी और बाबूओं की सेवा में लगे रहना. एंबुलेंस चालक को बाबूओं की सेवा के साथ विभागीय काम से फुर्सत मिल जाये तब ही मरीज को एंबुलेंस मिल पाता है.
 

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मंत्री, निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक की सेवा में पांच चालक

एम्बुलेंस चालकों का रोस्टर
एम्बुलेंस चालकों का रोस्टर


राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के घर पर रिम्स के एक एंबुलेंस चालक मंगल राम अपनी सेवा दे रहा है. जबकि रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव के साथ मोहम्मद इम्तियाज इमाम और विजय राम की ड्यूटी है. वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसके चौधरी के साथ मोहम्मद मासूम रजा अंजुम और संतोष चौधरी की ड्यूटी है. बचे चार एंबुलेंस चालक विभागीय काम, ब्लड बैंक वाहन, नर्सों का बस और पीएसएम विभाग में कार्यरत हैं. लिहाजा मरीजों के लिए एक भी एंबुलेंस की सेवा नहीं है.
 

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धूल फांक रही एम्बुलेंस

धूल फांक रही एम्बुलेंस
धूल फांक रही एम्बुलेंस


चालक के अभाव में रिम्स के चार कार्डियक एंबुलेंस एसी,  दो बड़ी एंबुलेंस,  दो मारुति एंबुलेंस और एक शव वाहन कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर है. लाखों रुपए की लागत से खरीदी गयी एंबुलेंस रिम्स परिसर की महज शोभा बढ़ा रही है.
 

निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा और प्राइवेट के सहारे है मरीज

रिम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीज नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा और प्राइवेट एंबुलेंस पर निर्भर हैं. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को जिंदगी मिलेगी दोबारा नाम की संस्था एंबुलेंस मुहैया कराती है. साथ ही रिम्स परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस भी है, लेकिन इसके लिए मरीजों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ती है.
 

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15 चालकों की है आवश्यकता : प्रभारी चालक
रिम्स एंबुलेंस सेवा के प्रभारी चालक इंद्रजीत सरकार ने कहा कि अभी एंबुलेंस सेवा में मात्र 9 चालक है. उन्होंने कहा कि अधिकांश चालक अधिकारी और विभागीय कार्य में व्यस्त रहते हैं. रिम्स में मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा तभी मिल पाएगी, जब चालकों की संख्या 15 होगी. इस विषय से रिम्स निदेशक को भी अवगत कराया है. प्रबंधन के फैसले पर ही सबकुछ निर्भर है.

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रिम्स से नहीं मिलता है एम्बुलेंस
अपनी पत्नी को छुट्टी के बाद घर ले जाने के लिए रिम्स एंबुलेंस सेवा में आए राजेश ने कहा कि सरकारी एंबुलेंस नहीं मिल रहा है. मजबूरन प्राइवेट एंबुलेंस से अपनी पत्नी को लेकर जाना पड़ रहा है. सरकार गरीबों की सेवा की बात करती है, लेकिन यह महज एक दिखावा है.

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