आधार के कारण राशन और पेंशन से वंचित होने से झारखंड में भुखमरी से एक और मौत

Submitted by NEWSWING on Tue, 01/02/2018 - 12:49

Garhwa : झारखंड  के सिमडेगा जिले में भूख से संतोषी की मौत ने जहां पूरे सरकार,सिस्टम पर कई सवाल खड़े किये. वहीं राज्य की पीडीएस सिस्टम को भी अपेन घेरे में लिया. सवाल कई हुए पर मामला अब थोड़ा पुराना हो गया और सबकुछ मैनेज भी हो गया. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. राज्य में भूख से हुई मौत की लिस्ट में कई नामों में एक और नाम 67 वर्षीय एतवरिया देवी भी शामिल हो गयीं हैं .

गढ़वा ज़िले के माझिआंव प्रखंड के सोनपुरवा गांव की रहनो वाली विधवा एतवरिया देवी की 25 दिसम्बर को भूख और थकावट से मौत हो गई. एतवरिया देवी अपने बेटे घुरा विश्वकर्मा, बहू उषा देवी और उनके तीन बच्चों के साथ एक कच्चे घर में रहती थीं. परिवार के लिए पर्याप्त पोषण न मिलना और भोजन की कमी भी सामान्य बात है. एतवरिया देवी को अक्सर दिन में केवल एक बार भात और नमक खाकर ही जीना पड़ता था. एतवरिया देवी के लिए भोजन की कमी, तब और बढ़ी जब परिवार को अक्टूबर से दिसम्बर 2017 तक राशन नहीं मिला. उन्हें उनकी नवम्बर और दिसम्बर महीने की वृद्धा पेंशन नहीं मिली.

इसे भी पढ़ें - खरसावां गोलीकांड के शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि, नहीं पहुंचे मुख्यमंत्री

राशन से वंचित

एतवरिया का परिवार उनकी मृत्यु के पहले तीन महीने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत मिलने वाले राशन (25 किलो प्रति माह) से वंचित था. अक्टूबर में उषा देवी के अंगूठे का निशान आधार-आधारित बायोमेट्रिक POS मशीन में सत्यापित नहीं हो पाया. राशन डीलर ने उन्हें बाद में आने को कहा. लेकिन जब ऊषा देवी दोबारा राशन की दुकान गयीं तो उन्हें डीलर ने बोला कि राशन का भण्डार समाप्त हो गया है. डीलर के अनुसार नवम्बर माह में उन्हें राशन का आवंटन नहीं हुआ था और इसलिए एतवरिया के परिवार को उस महीने का राशन नहीं मिला. दिसम्बर में एतवरिया देवी की मृत्यु होने तक गांव में राशन का वितरण नहीं हुआ था क्योंकि राशन डीलर के अनुसार POS मशीन ख़राब हो गई थी.

इसे बारे में गांव के लोगों की शिकायत है कि डीलर POS मशीन में हुए ट्रांजैक्शन के अनुसार वितरण नहीं करता. उसने अक्टूबर माह में अधिकतर कार्डधारियों के नाम पर अनाज और केरोसिन के मासिक कोटे का दो गुना ट्रानजैक्ट किया था, लेकिन सिर्फ एक महीने का ही राशन बांटा. वहीं एतवरिया के परिवार को राशन न मिलना जन वितरण प्रणाली में आधार के कारण हो रहे विघटन का एक और उदहारण है. जबकि डीलर ने बचे हुए अनाज के भण्डार को छुपाने के लिए राशन के डिजिटल रिकॉर्ड्स में हेरा-फेरी करना शुरू कर दिया है. इसके लिए उन्होंने प्रमाणीकरण और वितरण की प्रक्रियाओं को अलग करना शुरू कर दिया है. जैसे -  POS मशीन में कार्डधारियों के अंगूठे का निशान ले लेना, फिर उन्हें बोलना कि अनाज बाद में मिलेगा, और फिर कभी राशन देना और कभी न देना.

इसे भी पढ़ें - बकोरिया कांड का सच-08: जेजेएमपी ने मारा था नक्सली अनुराग व 11 निर्दोष लोगों को, पुलिस का एक आदमी भी था साथ ! (देखें वीडियो)

ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार इस डीलर को अक्टूबर-दिसम्बर महीने का राशन आवंटित हुआ था. लेकिन डीलर ने इस दौरान कई कार्डधारियों को यह कहकर राशन नहीं दिया कि उनके पास पर्याप्त भण्डार नहीं है. ये अनियमितताएं दर्शाती हैं कि, जनवितरण प्रणाली को आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था से जोड़ने से राशन की चोरी कम नहीं हुई है. बल्कि इससे लोगों के लिए राशन लेना और मुश्किल हो गया है.

पेंशन से वंचित

इस मामले में गौर करने वाली बात यह भी है कि एतवरिया देवी को 600 रुपये प्रति माह की वृद्धा पेंशन स्थानीय सामुदायिक सेवाप्रदाता केंद्र (CSP) (झारखंड ग्रामीण बैंक अंतर्गत) में उनके आधार-आधारित बैंक खाते से मिलती थी. उन्होंने आखिरी बार अपनी पेंशन अक्टूबर 2017 में ली थी. नवम्बर में पेंशन की राशि उनके खाते में नहीं आई थी. वे दिसम्बर में CSP केंद्र गयी थी, अपनी उस माह के पेंशन को निकालने. POS मशीन में उनके अंगूठे के निशान का सत्यापन होने के बाद CSP के कर्मी ने उन्हें बोला कि सत्यापन फेल हो गया है. लेकिन एतवरिया की बैंक स्टेटमेंट के अनुसार उस दिन (8 दिसम्बर) को उनके खाते से 600 रुपये का ट्रांजैक्शन किया गया था. बैंकिंग के CSP मॉडल में बायोमेट्रिक सत्यापन होने के बाद ग्राहक के खाते से पैसा CSP के खाते में हस्तांतरित होता है. हस्तांतरण के बाद CSP कर्मी को ग्राहक को भुगतान करना है. सोनपुरवा के CSP कर्मी के अनुसार एतवरिया द्वारा बायोमेट्रिक सत्यापन करने के तुरंत बाद भी इंटरनेट चला गया था. इसके कारण पेंशन की राशि CSP के खाते में जमा नहीं हो पाई.

इसे भी पढ़ें - बिहार में अपराधियों की शामत, ईडी ने शुरू की संपत्ती की कुर्की

सरकार द्वारा जीने के अधिकार का लगातार हनन

एतवरिया देवी की मौत गढ़वा जिले में एक माह के अंतराल में भुखमरी और थकान से हुई दूसरी मौत है. 1 दिसंबर को 64 वर्षीय प्रेमनी कुंवर आधार-सम्बंधित समस्याओं के कारण अपने राशन और पेंशन से वंचित होकर भुखमरी की शिकार हो गयी थी. झारखंड में पिछले चार महीनों में कम से कम चार लोग आधार के कारण अपने राशन, पेंशन जैसे अधिकारों से वंचित होने के कारण भूख का शिकार हुए हैं. इन योजनाओं में आधार की अनिवार्यता समाप्त करने व दोषी कर्मियों को सज़ा देने के बजाय सरकार मृत के परिजनों को परेशान कर रहे हैं.

भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड फिर से निम्न मांगे दोहरा रहा है: (1) सोनपुरवा के राशन डीलर को अविलम्ब बर्ख़ास्त किया जाए और जन वितरण प्रणाली के अनाज की चोरी और प्रणाली के रिकॉर्ड्स के साथ छेड़खानी करने के लिए उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए; (2) राशन वितरण के लिए ऑनलाइन व्यस्था को खत्म किया जाए एवं पूरे राज्य में ऑफलाइन व्यस्था लागू की जाए; (3) जन वितरण प्रणाली से निजी डीलरों को तुरंत हटाया जाए और ग्राम पंचायत/महिला संगठनों को राशन वितरण की जिम्मेवारी दी जाए और (4) जन वितरण प्रणाली में सस्ते दर पर दाल एवं खाद्य तेल शामिल किया जाए.

एतवरिया देवी का मौत के बाद यह रिपोर्ट भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड के एक तथ्यान्वेषण दल द्वारा बनाई गयी है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Main Top Slide
City List of Jharkhand
loading...
Loading...