अंतरिक्ष में ISRO की एक और सफल उड़ान, नेविगेशन सैटेलाइट IRNSS-1I का किया सफल प्रक्षेपण

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 04/12/2018 - 11:09

नेविगेशन सैटेलाइट से मिलेगी सीमा-समुद्र के नक्शे की सटीक जानकारी

Shriharikota: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नैविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस -1 आई का बुधवार को श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण किया. यह भारत के नैविगेशन सेटेलाइट की श्रेणी का आठवां उपग्रह है. इसरो के अधिकारियों ने बताया कि आईआरएनएसएस -1 आई को लेकर पीएसएलवी - सी 41 यान ने बुधवार सुबह चार बजकर चार मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से उड़ान भरी. यह सामान्य प्रक्षेपण रहा. पीएसएलवी ने यहां से उड़ान भरने के 19 मिनट बाद उपग्रह को कक्षा में स्थापित कर दिया. यह पीएसएलवी के 43 प्रक्षेपणों में से 41 वां सफल प्रक्षेपण था. 


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कक्षा में स्थापित किये गये 1,425 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह का निर्माण इसरो के सहयोग से बेंगलुरू की निजी कंपनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजिज ने किया है. निजी इंडस्ट्री द्वारा बनाया गया दूसरा उपग्रह है. पहला उपग्रह आईआरएनएसएस -1 एच को कक्षा में स्थापित करने का पिछले वर्ष का प्रक्षेपण असफल रहा था. इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने मिशन को सफल बताया और वैज्ञानिकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि आईआरएनएसएस -1 आई निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हुआ. 

सीमा-समुद्र के नक्शे की मिलेगी सटीक जानकारी

आईआरएनएसएस-1आई सात नेविगेशन सैटेलाइट में से पहले आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा. करीब 2420 करोड़ की लागत से बने नेविगेशन सैटेलाइट की मदद से नक्शा बनाने में मदद मिलेगी और इस लिहाज से यह सेना के लिए भी बेहद कारगर साबित होगी. इतना ही समुद्री रास्ते और मौसम के बारे में भी यह उपग्रह सटीक जानकारी मुहैया कराएगी. उपग्रह बदलने के लिए यह प्रक्षेपण इसरो का दूसरा प्रयास था. इससे पहले पिछले साल अगस्त में आईआरएनएसएस-1 एच को अंतरिक्ष में भेजने का मिशन विफल हो गया था, क्योंकि उपग्रह को कवर करने वाली हीट शील्ड अलग नहीं हो पायी थी. जीसैट-6 ए को अंतरिक्ष में भेजने के दो सप्ताह बाद इसरो ने नेविगेशन सेटेलाईट का प्रक्षेपण किया है. हालांकि रॉकेट ने जीसैट -6 ए को कक्षा में स्थापित कर दिया था लेकिन दो दिन के भीतर ही इसरो का उपग्रह से संपर्क टूट गया था. 

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