बकोरिया कांड : एडीजी एमवी राव ने सरकार को लिखा पत्र, डीजीपी डीके पांडेय ने फर्जी मुठभेड़ की जांच धीमी करने के लिए डाला था दबाव

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 01/11/2018 - 20:07

Ranchi : सीआइडी के पूर्व एडीजी एमवी राव ने पिछले हफ्ते सरकार को एक पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने कहा है कि डीजीपी डीके पांडेय ने उन पर बकोरिया में हुए फर्जी मुठभेड़ की जांच को धीमा करने का दवाब डाला था. एडीजी ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि एक बड़े अपराध को दबाने और अपराध में शामिल अफसरों को बचाने की कोशिश हो रही है. श्री राव ने गृह सचिव एसकेजी रहाटे को दिए पत्र की प्रति मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार और राज्यपाल के प्रधान सचिव एसके सत्पथी को भी दी है. एमवी राव द्वारा पत्र लिखे जाने की पुष्टि एक शीर्ष अधिकारी ने की है. पत्र की प्रति न्यूज विंग के पास उपलब्ध हैं.

जांच में बाधा डालने के लिए  एमवी राव का ट्रांसफर !

एमवी राव के पत्र से पुलिस व प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. आठ जून 2015 की रात पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में नक्सली डॉ अनुराग और 11 निर्दोष लोगों को पुलिस ने कथित मुठभेड़ में मार गिराया था. मरने वालों में दो नाबालिग भी थे. अभी तक चार की पहचान नहीं हुई है. पुलिस के मुठभेड़ की कहानी शुरु से ही विवादों में घिरी हुई है. ढ़ाई साल से अधिक वक्त बीतने के बाद भी सीआइडी मामले की जांच पूरी नहीं कर सकी है. इस बीच हाई कोर्ट के निर्देश पर सीआइडी के तत्कालीन एडीजी एमवी राव ने  बकोरिया कांड की जांच में तेजी लायी थी. जिसके बाद कई अफसरों के सामने डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी एमवी राव के बीच हॉट-टॉक हुआ. फिर 13 दिसंबर को सरकार ने एमवी राव को सीआइडी एडीजी के पद से हटा दिया. गौर करने वाली बात है कि तबादले की प्रक्रिया में डीजीपी, गृह सचिव, मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक शामिल होते हैं. ऐसे में अगर जांच में बाधा उत्पन्न करने के लिए एमवी राव को सीआइडी एडीजी के पद से हटाया गया है, तो यह एक गंभीर मामला साबित होगा.

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एमवी राव ने अनुचित निर्देश मानने से इंकार कर दिया था

सूत्रों ने बताया कि एमवी राव ने अपने पत्र में अक्टूबर माह में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने से लेकर सीआइडी में पोस्टिंग होने और सीआइडी जिन

MV Rao
MV Rao

मामलों की जांच कर रही है, उसकी चर्चा की है. साथ ही कहा है कि सीआइडी में पुलिस मुठभेड़ के कई मामले कई सालों से जांच के लिए लंबित है. मामलों की जांच पूरी नहीं की गयी है. उन्होंने सभी मामलों की समीक्षा करके जांच के लिए जरुरी निर्देश जारी किए थे. इस बीच हाई कोर्ट ने मामले में तेजी लाने और पलामू के तत्कालीन डीआइजी हेमंट टोप्पो और पलामू सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक का बयान दर्ज करने का निर्देश सीआइडी को दिया. जिसके बाद एडीजी सीआइडी के निर्देश पर दोनों अफसरों का बयान दर्ज किया गया. जिसमें दोनों अफसरों ने पुलिस मुठभेड़ को गलत बताया है. इसी बीच डीजीपी डीके पांडेय ने एडीजी पर बकोरिया कांड की जांच को धीमा करने का दबाव बनाया. एडीजी सीआइडी एमवी राव ने अनुचित निर्देश मानने से इंकार कर दिया. इसी दौरान सीआइडी ने पलामू के तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल (वर्तमान में दुमका के एसपी) को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा. जिसके तीन दिन बाद एमवी राव का तबादला कर दिया गया.

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MV Rao's letter
MV Rao's letter

घटना के तुरंत बाद ही बदल दिए गए थे एडीजी रेजी डुंगडुंग व डीआइजी हेमंत टोप्पो

इससे पहले भी आठ जून 2015 की रात पलामू के सतबरवा में हुए कथित मुठभेड़ के बाद कई अफसरों के तबादले कर दिए गए थे. सबको पता था कि मुठभेड़ के मामलों की जांच सीआईडी करती है. तब एडीजी रेजी डुंगडुंग सीआईडी के एडीजी थे. सरकार ने उनका तबादला कर दिया था. ताकि मामले की जांच गंभीरता से ना हो. उनके बाद सीआईडी एडीजी के पद पर पदस्थापित होने वाले दो अधिकारियों अजय भटनागर और अजय कुमार सिंह के कार्यकाल में मामले की जांच सुस्त तरीके से हुई. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इसपर टिप्पणी की थी. रांची जोन के आइजी सुमन गुप्ता का भी तबादला कर दिया था. क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर तब के पलामू सदर थाना के प्रभारी हरीश पाठक से मोबाइल पर बात की थी. हरीश पाठक को बाद में एक पुराने मामले में निलंबित कर दिया गया था. वह इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह हैं. इसी तरह पलामू के तत्कालीन डीआइजी हेमंट टोप्पो का भी तबादला तुरंत कर दिया गया था.

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DK Pandey
DK Pandey

बकोरिया कांड के मुख्य बिंदु

आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में कुल 12 लोग मारे गए थे. उनमें से एक डॉ आरके उर्फ अनुराग के नक्सली होने का रिकॉर्ड पुलिस के पास उपलब्ध था.

घटना के ढ़ाई साल बीतने के बाद भी मामले की जांच कर रही सीआइडी ने न तो तथ्यों की जांच की, न ही मृतक के परिजनों और घटना के समय पदस्थापित पुलिस अफसरों का बयान दर्ज किया.

पलामू सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक ने बयान दिया है कि पलामू के एसपी ने उन्हें घटना का वादी बनने के लिए कहा. इंकार करने पर सस्पेंड करने की धमकी दी.

हरीश पाठक ने अपने बयान में यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम हाउस में चौकीदार ने तौलिया में खून लगाया और कथित मुठभेड़ के बाद मिले हथियारों की मरम्मती डीएसपी के कार्यालय में की गयी. यही कारण है कि घटना के 25 दिन बाद जब्त हथियार को कोर्ट में पेश किया गया.

मारे गए 12 लोगों में दो नाबालिग थे. चार की पहचान अभी तक नहीं हुई है. आठ मृतकों के संबंध में नक्सली होने का कोई रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है.

मामले की जांच किए बिना ही डीजीपी डीके पांडेय ने कथित मुठभेड़ में शामिल जवानों व अफसरों के बीच लाखों रुपये इनाम के रूप में बांट दिए.

मामले की जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट एसटीएफ के तत्कालीन आइजी आरके धान ने दिया है. उन्होंने घटना के बाद घटनास्थल पर गए सभी अफसरों का बयान दर्ज करने का निर्देश अनुसंधानक को दिया है. उल्लेखनीय है कि घटना के बाद डीजीपी डीके पांडेय, तत्कालीन एडीजी अभियान एसएन प्रधान, एडीजी स्पेशल ब्रांच घटनास्थल पर गए थे.

आइजी आरके धान ने घटना के समय पलामू में पदस्थापित पुलिस अफसरों के मोबाइल का लोकेशन हासिल करने का भी निर्देश दिया है.

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