गर्मी पड़ने से पहले ही सूखने लगे हलक : गंदा पानी पीने को मजबूर दुन्दिया गांव के लोग

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 03/07/2018 - 14:48

DUMKA : झारखंड में कुछ दिनों पहले तक वसंती हवाओं की अंगड़ाई लोगों को खुशनुमा एहसास करा रही थी, वहीं अब धीरे धीरे गर्मी का मौसम भी सोपान चढ़ने लगा है. लेकिन अभी ठीक से गर्मी पड़नी शुरू भी नहीं हुई कि सूबे के कई इलाकों में लोगों के हलक सूखने लगे हैं. पानी की भारी किल्लत से उन्हें रोज दो-चार होना पड़ रहा है. पेयजल की समस्या शहरी क्षेत्र  में तो रहती ही है, ग्रामीण इलाकों में तस्वीर और भी भयावह हो जाती है. मगर इसे सिस्टम की संगदिली ही कहिये कि न पेयजल स्वच्छता विभाग और ना  चुने हुए जनप्रतिनिधि ही ध्यान देते हैं. जिन टोले-मुहल्ले और कस्बों की  आबादी कम हो वहां मूलभूत समस्याओं का अंबार लगा हुआ रहता है. ऐसे ही बेरहम हालात से जूझ रहे हैं दुमका के रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत पड़ने वाले दुन्दिया गांव के लोग, जिन्हें पीने का पानी मयस्सर नहीं. दुन्दिया गांव के लातार टोला निवासी मंगल मरांडी कहते हैं कि हमारे टोला में एक ही चापाकल है. अभी गांव में जो कुएं है उससे पेयजल की जरूरत  तो किसी तरह पूरी हो रही है, पर ज्यादा दिन तक नहीं हो सकती. वहीं गर्मी बढ़ने पर पेयजल की समस्या बेहद दुखदायी हो जाती है. इंसान के साथसाथ पशुओं को पीने का पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन जाती है. 

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टोले में एकमात्र चापाकल, वो भी पांच वर्षों से खराब

टोला के लुखिराम मरांडी बताते है मेरे टोला में एक ही चपाकल है जिसे खराब हुए करीब पांच वर्ष हो गये, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नही है.चापाकल मरम्मती के लिय कई वर्षो से कई बार जनप्रतिनिधियो के पास शिकायत की गयीलेकिन किसी ने इसकी मरम्मत नही करवायी.चुनाव के समय यही जनप्रतिनिधि घर-घर वोट मांगने आते है लेकिन गांव के मूलभूत समस्याओं से आंखे मूंदे रहते है. इस टोला में करीब एक सौ की जनसंख्या है जो मात्र एक कुआँ के भरोसे चलता है. गर्मी बढ़ते ही कुआं का पानी भी गन्दा हो जाता है,जो व्यवहार के योग्य नही रहता. मगर कोई विकल्प नहीं होने के कारण गंदा पानी पीना ही लोगों की नियति बन जाती है. 

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चापाकल बन जाता तो गंदा पानी पीने की मजबूरी नहीं होती

टोला की महिला फुलमुनी मुर्मू  कहती है परिवार की जरूरत और अपने मवेशियों की पानी की जरूरत को पूरा करना मुश्किल हो जाता है. टोला में चपाकल अगर ठीक कर दिया जाता तो कम से काम  लोगों के सूखते हलक में तरावट आती और लोगों को गंदी पानी पीने की मजबूरी से छुटकारा मिल जाता. 

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