बोकारो : सदर अस्पताल में लापरवाही की सारी हदें पार, बंध्याकरण ऑपरेशन में काटी महिला की आंत, जिंदगी और मौत से जूझ रही पीड़िता (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/09/2018 - 14:08

Prakash Mishra

Bokaro:  बोकारो के सदर अस्पताल के चिकित्सकों की ऐसी लापहरवाही सामने आयी है. जिससे शबाना खातून(26) जीवन और मौत से जूझ रही है और उस वक्त को कोस रही है. जब वह इस अस्पताल में आयी थी. दरअसल मामला बंध्याकरण के ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है. ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर्स ने ऐ, लापरवाही दिखायी कि महिला की आंत ही कट गयी. अब उसकी हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है.   सदर अस्पताल से उसे बेहतर इलाज कर लिए रिम्स तक भेज गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. अब पीड़िता का पूरा परिवार परेशान है. ये  मामला चिकित्सकों की लापरवाही का है, लेकिन जिला प्रशासन मामले को रफा-दफा करने में लगा हुआ है. बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद से परिवार की माली हालत भी खराब हो गयी है. इस मामले को लेकर परिवार वालों ने डीडीसी से शिकायत भी की है., पर अब भी इलाज में लापरवाही बरती जा रही है.

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 9 जनवरी को हुआ था ऑपरेशन

 9 जनवरी को शबाना खातून का बंध्याकरण ऑपरेशन महिला चिकित्सकों ने सदर अस्पताल में किया था.   ऑपरेशन के कुछ घंटे के बाद जब महिला होंश में वह आयी तो वह लगातार उल्टी करने लगी. जब इसकी शिकायत वहां के चिकित्सकों से महिला की सास ने किया तो महिला चिकित्सक ने यह कहते हुए भाग दिया कि 13 महिला का ऑपरेशन हुआ है. जब उनकी हालत ठीक है तो पीड़िता की हालत भी छीक होगी और उसकी  उल्टी भी बंद हो जायेगी. लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और उसी हालत में शबाना की 10 जनवरी को डॉक्टर्स ने छुट्टी दे दी. लेकिन उल्टी बंद नहीं हुआ और 13 जनवरी को उसे फिर से सदर अस्पताल में ही भर्ती कराया गया. वहां से अल्ट्रासाउंड के लिए शबाना को पीएमसीएच धनबाद रेफर कर दिया गया. वहां चिकित्सकों ने कहा कि ऑपरेशन में शबाना की आंत कट गयी है और इसी वजह से   उसकी हालत खराब हो रही है. दो दिनों के बाद 16 जनवरी को शबाना को रिम्स भेज दिया गया. रिम्स में चिकित्सकों ने दो बार शबाना का ऑपरेशन किया और उसे वहीं कई दिनों तक वहां रखा. शबाना को रिम्स से 1 फरवरी को छुट्टी दे दी गयी और उसे परिवार वाले घर ले आये.

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 अब बिगड़ती जा रही है हालत

गुरुवार को शबाना की हालत खराब होते देख उसके मुहल्ले के लोगों ने डीडीसी से मुलाकात की. जिसके बाद जिले के सिविल सर्जन ने एम्बुलेंस भेज कर फिर से सदर अस्पताल में पीड़िता को एडमिट करवाया है. लेकिन शबाना की हालत बिगड़ती ही जा रही है. इतना ही नहीं अब तक तीन बार उसका ऑपरेशन कर दिया गया है, फिर कोई राहत नहीं है. परिवार से शबाना की हालत देखी नहीं जा रही है, उपर से आर्थिक तंगी ने भी हालत और भी खस्ता कर दी है.

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 माराफारी के आजाद नगर की रहने वाली है शबाना

शहर के माराफारी थाना इलाके के आजाद नगर के भागलपुर मुहल्ला निवासी कादिर अंसारी की पत्नी शबाना खातुन हैं. जिसे दो बेटा और एक बेटी है. उसकी सास शमशेरा बेगम ने बताया कि 9 जनवरी को बंध्याकरण के लिये ले गयी थी, जिसके बाद ही ऐसी स्थिति हो गयी.

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दर्द से छटपटा रही शबाना और परिवार है बेबस

शबाना की जो हालत आज है, उसे लेकर पूरी तरह से वे महिला चिकित्सक जिम्मेवार हैं, जिन्होंने उसका ऑपरेशन किया था. अब शबाना जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है. भगवान का दर्जा पाने वाले डॉक्टर्स की देन है कि आज शबाना दर्द से कराह रही है और घरवाले बस अपनी बेबसी ही जाहिर कर पा रहे हैं. क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं कि वह उसे इलाज के लिये किसी महंगे अस्पताल में लेकर जायें.

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