चास के डिप्टी मेयर अविनाश कुमार करते हैं जिला परिषद में ठेकेदारी, सेटिंग ऐसी कि किसी पार्षद ने निगम बैठकों में नहीं उठाया लाभ के पद का यह मामला 

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/09/2018 - 15:14

Akshay Kumar Jha
Ranchi/ Bokaro: वो पब्लिक सर्वेंट भी कहलाना चाहते हैं. मौके पर कहने से भी नहीं चूकते कि ‘भाई हम तो जनता के सेवक हैं’. निगम में दूसरे नंबर के पदधारी हैं. सरकारी पद पर हैं. दूसरी तरफ लाभ के पद का भी मौज ले रहे हैं. बात हो रही है बोकारो जिले के चास नगर निगम के डिप्टी मेयर अविनाश कुमार की. अनिवाश कुमार डिप्टी मेयर रहते हुए बोकारो की जिला परिषद से कई ठेका लेकर ठेकेदारी का भी काम कर रहे हैं. अगर निगम की नियमावली की बात करें, तो ऐसा वो नहीं कर सकते हैं. अगर करते भी हैं, तो इस बात की जानकारी उन्हें निगम को देनी होगी. निगम में जानकारी देने के बाद निगम की बैठक में कोई भी पार्षद इस मामले को उठा सकता है, लेकिन सेटिंग इनकी ऐसी है कि आज तक किसी पार्षद ने कभी ये मामला निगम की बैठकों में नहीं उठाया. 

इसे भी पढ़ें - 3000 करोड़ के मुआवजा घोटाले में सबसे ज्यादा गड़बड़ी करने वाले सीओ ने एसआईटी को बताया था, वरीय अधिकारियों का दबाव था

मगध कंस्ट्रक्शन नाम की कंपनी के हैं मालिक
चास नगर निगम के डिप्टी मेयर अविनाश कुमार की कंपनी का नाम मेसर्स मगध कंस्ट्रक्शन है. वो जिला परिषद में 2012 से ही काम के लिए टेंडर डाल रहे हैं. चास नगर निगम का चुनाव 2015 में हुआ. वो 18 नंबर वार्ड से पार्षद चुन कर आए हैं. बाद में निगम के डिप्टी मेयर बने. निगम के डिप्टी मेयर रहते हुए, उन्हें जिला परिषद से 16 मार्च 2017 को चास प्रखंड में लेवाटांड़ गांव के पीपल मोड़ से लेकर गिरधर तुरी के घर तक पीसीसी बनाने का काम मिला. यह काम 13,76,100 रुपए का था. दोबारा इन्हें 24 जनवरी 2018 को चास प्रखंड के सतनापुर पंचायत भवन की चहारदीवारी बनाने का काम मिला. यह काम 10,25000 रुपए का था. 
कैसे हैं लाभ के पद पर
डिप्टी मेयर एक सरकारी पद है. इस पद के लिए चुने जाने के बाद सैलेरी मिलने का प्रावधान है. ऐसा कोई भी शख्स दूसरा कोई लाभ के पद पर नहीं रह सकता, जो सरकारी पद पर होते हैं. ठेकेदारी का काम कोई चैरेटी का नहीं होता. ठेकेदारी के काम के एवज में वो सरकार से कॉन्ट्रैक्ट फीस लेते हैं. जिससे उन्हें लाभ पहुंचता है. दूसरी तरफ वो सरकार से वेतन भी ले रहे हैं. ऐसे में सरकार से दो तरह से वो लाभ नहीं ले सकते हैं. 

इसे भी पढ़ें - हमें नहीं चाहिए नया भारत, लौटा दो मेरा पुराना भारत, जहां लोगों में डर व खौफ न हो : गुलाम नबी आजाद

क्या कहती है निगम की नियमावली
सभी पार्षद को नगरनिगम सचिव को इस बात की जानकारी देनी है कि वह या उनकी पत्नी किसी कंपनी का सदस्य हैं, या फिर किसी फर्म का भागीदार हैं, या किसी व्यक्ति के अधीन काम करते हैं. यह भी सूचना देनी है कि पार्षद ने किसी कंपनी या फर्म या व्यक्ति के साथ कोई संविदा की है या नहीं. अगर ऐसा है, तो ये साबित होता है कि पार्षद लाभ के पद पर है. अगर इन बातों की सूचना पार्षद निगम के सचिव को दे देते हैं,  तो निगम की बैठक में ये मामला उठाया जाना चाहिए और इसपर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए. 

इसे भी पढ़ें - जेपीएससी छठी पीटी परीक्षाः आरक्षण के साथ 15 गुणा जारी करना था रिजल्ट, सरकार ने कर दिया 104 गुणा
बैठक में किसी पार्षद ने नहीं उठाया यह मुद्दा
आखिर ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि किसी पार्षद ने यह मुद्दा निगम की बैठकों में नहीं उठाया. 2015 निगम चुनाव के बाद चास निगम ने करीब आठ बैठकें की हैं, लेकिन कभी किसी पार्षद ने यह मामला बैठक में नहीं उठाया. जबकि नियमावली में साफ तौर पर जाहिर किया गया है कि अगर किसी पार्षद का लाभ के पद से जुड़ा मामला हो, तो उसे बैठक में उठाना चाहिए. ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि डिप्टी मेयर की पार्षदों के साथ ऐसी सेटिंग है कि कोई इनके खिलाफ ये मामला बैठक में नहीं उठाता है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.