ग्रामीण मजदूरी और रोजगार पर केंद्रित हो बजट, रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों ने की मांग

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 01/22/2018 - 15:41

New Delhi : रोजमर्रा के उपयोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनियां चाहती हैं कि आगामी बजट ग्रामीण बाजारों पर केंद्रित हो जिससे वेतन-मजदूरी में गिरावट को रोका जा सके. उनका कहना है कि बजट में नीतियां अधिक रोजगार सृजन और व्यक्तिगत आयकर स्लैब में कटौती पर केंद्रित होनी चाहिये ताकि उपभोक्ताओं को अधिक खरीद क्षमता मिल सके. इसके अलावा उद्योग ने भंडारगृह और शीत भंडारण श्रृंखला को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया है. साथ ही उद्योग चाहता है कि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानि कि एफडीआई बढ़ाने के प्रयास होने चाहिये.

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नीचे आ रही है ग्रामीण मजदूरी

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवके गंभीर ने कहा कि ग्रामीण मजदूरी नीचे आ रही है और अपर्याप्त रोजगार सृजन की वजह से वृद्धि में गतिरोध और खर्च योग्य आय में वृद्धि सुस्त है. उन्होंने बजट को लेकर अपनी अपेक्षा बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्रित प्रयास होने चाहिये और किसानों के हाथ में अधिक धन के लिए सब्सिडी बेहतर तरीके से लक्षित होनी चाहिये.

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सरकार को उपभोग बढ़ाने वाली नीतियां लानी चाहिये

ईवाई के कर भागीदार प्रशांत खाटोर ने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां लानी चाहिये ताकि उपभोग बढ़ाया जा सके. व्यक्तिगत आयकर में कमी होनी चाहिये जिससे लोगों के हाथ में अधिक खर्च योग्य आय आ सके. इसी तरह की राय जताते हुए गंभीर ने कहा कि आयकर स्लैब में कमी से मध्यम वर्ग और वेतनभोगी वर्ग को राहत मिलेगी. वर्ष 2018-19 का आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा.

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