मलय व अन्नराज जलाशय योजना का सीएम ने किया ऑनलाइन शिलान्यास, कार्यक्रम में ग्रामीणों को रसोई गैस देने के बहाने बुलाया 

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 05/16/2018 - 20:18

Daltonganj : सूबे के खेतों को हरा-भरा रखने के लिए झारखंड सरकार कई योजनाएं ला रही है. इसी कड़ी में सीएम रघुवर दास ने पलामू के मलय डैम और गढ़वा के अन्नराज डैम से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पक्की नहर के निर्माण का प्रोजेक्ट भवन से ऑनलाइन शिलान्यास किया. 176 करोड़ की लागत से मलय जलाशय योजना पूरी की जायेगी, जिससे पलामू के 105 गांवों के लोगों को पानी मिलेगा, जबकि 84 करोड़ की लागत से अन्नराज जलाशय योजना से 43 गावों में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. पलामू के लहलहे में आयोजित कार्यक्रम में सांसद बीडी राम ने बताया कि पीएम मोदी ने किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. ये योजना उसी का एक हिस्सा है. इसे 2020 तक पूरा कर दिया जायेगा. केन्द्र एवं राज्य में भाजपा की सरकार होने का फायदा गरीब जनता और किसानों को मिल रहा है. विधायक श्री चैरसिया ने कहा कि पूर्व के नेताओं ने पुल और जलाशय के नाम पर यहां के लोगों को ठगने और वोट लेने का काम किया.

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क्षतिग्रस्त मिली जोड़ी गई ईंट  

मलय जलाशय योजना के ऑनलाइन शिलान्यास को लेकर मंगलवार को दिन में ही ईंट से जोड़ाई करा दी गई थी. पर मंगलवार की रात में कुछ असमाजिक तत्वों ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया था. योजना बोर्ड लगाने के लिए बुधवार को पहुंचे विभागीय पदाधिकारी इससे हैरान रह गए. आनन-फानन में 9:30 बजे तक पुनः जोड़ाई और प्लास्टर कराया गया. साथ योजना से संबधित बोर्ड भी लगाया. इसकी सूचना प्रशासन को दी गई है.

सतबरवा में क्या होगा लाभ ?

इस योजना के निर्माण होने से सतबरवा, सदर प्रखंड और लेस्लीगंज प्रखंड में कुल 105 गांव सिचिंत होंगे. स्थानीय किसानों की यह मांग वर्षो पुरानी थी, जो पूरी होती दिख रही है. वहीं सांसद ने विभागीय पदाधिकारियों को कहा कि समय सीमा के अंदर निर्माण कार्य को पूरा करें.

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ग्रामीणों को रसोई गैस देने के बहाने बुलाया गया 

कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों कुर्सिया खाली पड़ी थी. स्थानीय नेता काफी प्रयास कर रहे थे कि कम से कम कुर्सी खाली न रहे. पर इसी दौरान अचानक तीन-चार टेम्पो से ग्रामीण कार्यक्रमस्थल पर पहुंच गए और एक स्टॉल के पास खड़े हो गए. जब स्थानीय नेताओं ने स्टॉल से कार्यक्रम पंडाल में जाने के लिए बोला तो सभी ग्रामीण लाल-पीले होने लगे व कहने लगे कि कहां गैस मिल रहा है ? ग्रामीणों को एहसास हो चुका था कि उन्हें इस गर्मी में बुला कर मूर्ख बना दिया गया है.

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