सुप्रीम कोर्ट से केंद्र ने कहा - यह पेशेवर प्रदर्शनकारियों का जमाना है

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 04/25/2018 - 16:55

New Delhi : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह पेशेवर प्रदर्शनकारियों का जमाना है, जो संसद या राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करते हैं. ताकि उनकी आवाजें सुनी जा सकें. सरकार ने इस बात पर बल दिया कि शांति एवं सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए समग्र कदम उठाना जरूरी है.  केंद्र सरकार ने एक जनहित याचिका के जवाब में मध्य दिल्ली में सीआरपीसी की धारा 144 (निषेधाज्ञा) लगाने के फैसले को सही ठहराते हुए यह बात कही. मध्य दिल्ली में कई अहम सरकारी इमारतें और अति-विशिष्ट लोगों (वीआईपी) के आवास हैं. याचिका में मध्य दिल्ली में निषेधाज्ञा लगातार लागू होने का विरोध करते हुए कहा था कि इससे प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार बाधित होता है. 

न्यायमूर्ति ए के सीकरी और अशोक भूषण की पीठ एक एनजीओ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. जिसमें मध्य एवं नई दिल्ली इलाके में सभी सभाओं एवं प्रदर्शनों पर लगायी गयी पाबंदी को चुनौती दी गई है. केंद्र ने पीठ को बताया कि अतीत में प्रदर्शनों के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो गई है. 

इसे भी पढ़ें - नाबालिग रेप मामले में आसाराम को उम्रकैद, शिल्पी और शरतचंद्र को 20-20 साल की सजा

हम एक ऐसे जमाने में हैं, जिसमें कुछ पेशेवर प्रदर्शनकारी हैं

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने केंद्र की पैरवी करते हुए कहा कि हम एक ऐसे जमाने में हैं, जिसमें कुछ पेशेवर प्रदर्शनकारी हैं. जिन्हें उच्चतम न्यायालय, संसद, राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करना अच्छा लगता है. वे प्रदर्शन करने के लिए कोई और वैकल्पिक जगह पसंद नहीं करते. कई बार प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो गई है. सरकार के तौर पर हमें समग्र कदम उठाने की जरूरत है.  एनजीओ मजदूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस) के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मध्य दिल्ली में निषेधाज्ञा लगातार लागू नहीं रखी जा सकती, जो एक आपातकालीन प्रावधान है और इसका इस्तेमाल तब किया जाना चाहिए, जब हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो. उन्होंने एएसजी की ओर से पेशेवर प्रदर्शनकारी शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकार लोगों से यह नहीं कह सकती कि वे प्रदर्शन, जो कि उनका मौलिक अधिकार है, उसके रामलीला मैदान या पश्चिमी दिल्ली के नरेला जाएं.

इसे भी पढ़ें - कंबल घोटाला : सबको थी खबर, पर “सबसे पहले” 19 मार्च को न्यूज विंग ने छापी खबर, अब दो अखबारों में लगी “सबसे पहले” क्रेडिट लेने की होड़

प्रदर्शन हमेशा वहीं होते हैं, जहां सत्ता का आसन होता है

साथ ही प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने अपने हलफनामे में समूची मध्य दिल्ली में निषेधाज्ञा लगातार लागू रखने को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश हैं, जो एक मौलिक अधिकार के रूप में प्रदर्शन करने के लोगों के अधिकार को मान्यता देते हैं. प्रदर्शन हमेशा वहीं होते हैं, जहां सत्ता का आसन होता है. मेहता ने दखल देते हुए कहा कि उनका मतलब यह नहीं था कि सभी प्रदर्शनकारी पेशेवर प्रदर्शनकारी होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ तो जरूर होते हैं. इस मामले में अगली सुनवाई अब 27 अप्रैल को होगी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

 

top story (position)